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आज है कार्तिक पूर्णिमा, जानें क्यों हैं इस दिन गंगा स्नान का महत्व

आज यानी 14 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन जानिए क्या है गंगा स्नान का महत्व और कैसे करें आज के दिन पूजा...

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कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

आज यानी 14 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा है और आज के दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व होता है. हिंदू धर्म में इसकी बहुत मान्यता है. कहते हैं कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार लिया था. वे मत्स्य यानी मछली के रूप में प्रकट हुए थे.

इसे त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ठीक 180 डिग्री के अंश पर होता है. इस दिन चंद्रमा से निकलने वाली किरणें काफी सकारात्मक होती हैं और यह किरणें सीधे दिमाग पर असर डालती हैं. चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक है इसलिए इन किरणों का प्रभाव सबसे अधिक पृथ्वी पर ही पड़ता है.


क्या करें इस दिन
पुराणों के अनुसार, यह दिन स्नान-दान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. इस दिन स्नान करने वाले जल में थोड़ा गंगा जल डालकर नहाना चाहिए और फिर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.

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गंगा स्नान के लिए उमड़ती है भीड़
गंगा स्नान के संबन्ध में ऋषि अंगिरा ने लिखा है, 'इस दिन हाथ-पैर धोकर हाथ में कुशा लेकर स्नान करें. यदि स्नान में कुश और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाए तो कर्म फलों से सम्पूर्ण पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है. दान देते समय जातक हाथ में जल लेकर ही दान करें.'

वहीं इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि इस दिन ही भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था. इसके बाद से वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे.

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सिख धर्म के लिए भी है बड़ा महत्व
कार्तिक पूर्ण‍िमा का महत्व सिख धर्म में भी बहुत है. माना जाता है कि इस दिन सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था. इस दिवस को सिख धर्म में प्रकाशोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. इसे गुरु नानक जयंती भी कहते हैं. गुरु नानक जयंती पर गुुरद्वारों में खास पाठ का आयोजन होता है. सुबह से शाम तक की‍र्तन चलता है और गुरुद्वारों के साथ ही घरों में भी खूब रोशनी की जाती है. इसके अलावा, लंगर छकने के लिए भी भीड़ उमड़ती है.

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देखने को मिलेगा चमत्कार: आज एक अद्भुत घटना होने जा रही है. आज 70 साल बाद सबसे बड़ा चांद दिखेगा. अगली बार यह अद्भुत नजारा 2034 में देखने को मिलेगा. पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने वाला चांद 14 तारीख को धरती के बेहद नजदीक होगा इसलिए धरती से चंद्रमा बड़ा दिखाई देगा.

जानें कार्तिक पूर्ण‍िमा की पूजन विधि:
1. स्नान कर के की अराधना करनी चाहिए. संभव हो तो गंगा स्नान करें.

2. पूरे दिन या एक समय का व्रत जरूर रखें.

3. इस दिन नमक का सेवन बिल्कुल ना करें. ब्राह्मणों को दान दें.

4. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने से पुण्य प्राप्त‍ि होती है.

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