चिंतपूर्णी माता की आरती प्रतिदिन सच्चे मन से ध्यान कर पाठ करने से मां की कृपा बरसती है. मातारानी के सभी रूप अलग-अलग जरुर हैं लेकिन अंत में वे माता आदिशक्ति का ही रूप हैं. ऐसे में उनकी किसी भी रूप में पूजा करें लेकिन मां आदिशक्ति आपसे प्रसन्न हो जाती हैं. चिंतपूर्णी माता आरती का सबसे बड़ा लाभ होता है.
जय चिंतपूर्णी माता, चिन्ता हरो माता
जीवन मेँ सुख दे दो, कश्ट हरो माता
ॐ जय चिंतपूर्णी माता
ऊन्चा पर्वत तेरा, झ्न्डे झूल रहे
करेँ आरती सारे, मन मेँ फूल रहे।
ॐ जय चिंतपूर्णी माता
सती के शुभ चरणोँ पर, मन्दिर है भारी
छिन्न मस्तिका कह्ते, सारे सन्सारी।
ॐ जय चिंतपूर्णी माता
माईदास एक ब्राह्मण, स्वपन मेँ दरस दिये
पूजा पिन्डी ध्यान कर, आनन्द भाव किये।
ॐ जय चिंतपूर्णी माता
बरगद पेड है दर पर, सुख भंडार भरे
घन्टे घन घन बाजे, जय जय कार करें।
ॐ जय चिंतपूर्णी माता
कन्या गाती दर पे, मधुर स्वरोँ मेँ जब
जिन्को सुन के, चिन्ता, मन की हटे माँ सब।
ॐ जय चिंतपूर्णी माता
पान सुपारी ध्वजा नारियल, छ्त्र चुन्नी संग में
चन्दन इत्र गुलाब जल, भेंट चढे अंग में।
ॐ जय चिंतपूर्णी माता
चिन्तित जीवन की माँ, तुम हो रख वाली
सेवक आरती करता, कर मेँ लिये थाली।
ॐ जय चिंतपूर्णी माता...
-------समाप्त-------