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बटुक भैरव जी की आरती (Batuk Bhairav Aarti)

बटुक भैरव जी की आरती

पुराणों की मानें तो भैरव आरती का नियमित पाठ करने से साधक की जन्म कुंडली में मौजूद शनि, राहु और केतु से जुड़े दोष धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. साथ ही, यह नकारात्मक शक्तियों, काला जादू और बुरी आत्माओं के प्रभाव से भी रक्षा करता है.

बटुक भैरव जी की आरती
बटुक भैरव जी की आरती

ॐ जय बटुक भैरव देवा, प्रभु जय बटुक भैरव देवा।
सुर नर मुनि सब करते, प्रभु तुम्हरी सेवा॥ ॐ जय बटुक भैरव देवा...

 

तुम्ही पाप उद्धारक, दुःख सिन्धु तारक।
भक्तों के सुखकारक, भीषण वपु धारक॥ जय भैरव देवा...

 

वाहन श्वान विराजत, कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमित तुम्हारी, जय जय भयहारी॥ जय भैरव देवा...

 

तुम बिन शिव सेवा,सफल नहीं होवे।
चतुर्मुख दीपक, दर्शन दुःख खोवे॥ जय भैरव देवा...

 

तेल चटकी दधि मिश्रित, भाषावलि तेरी।
कृपा कीजिए भैरव, करिए नहीं देरी॥ जय भैरव देवा...

 

पाँवों घुँघरू बाजत, डमरू डमकावत।
बटुकनाथ बन बालक, जन मन हरषावत॥ जय भैरव देवा...

 

बटुकनाथ की आरती, जो कोई नर गावे।
कहे धरणीधर वह नर, मन वांछित फल पावे॥ जय भैरव देवा...

 

-------समाप्त-------

समाप्त

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