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गली-गली दौड़ा, घरों में घुसा... अलवर में पटाखों की आवाज से निकाला गया तेंदुआ

राजस्थान के अलवर में लोगों से जान बचाकर गलियों में एक लेपर्ड भागने लगा. जिसको वन विभाग ने 7 घंटे बाद हुआ रेस्क्यू कर लिया. लेपर्ड के देखने के लिए वहां हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गई.

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अलवर के बहरोड में घूम रहा तेंदुआ (फाइल फोटो)
अलवर के बहरोड में घूम रहा तेंदुआ (फाइल फोटो)

अलवर के बहरोड के भीड़भाड़ वाले इलाके में आचनक एक लेपर्ड आ गया. जिसकी सूचना लोगों ने वन विभाग को दी. मामले की जानकारी मिलने के बाद वहां वन विभाग की टीम पहुंच गई. 7 घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने लेपर्ड को पकड़ लिया और उसे सरिस्का के जंगल में छोड़ा दिया.

लेपर्ड को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई. जिसके बाद लोगों से जान बचाकर लेपर्ड इधर-उधर भागने लगा. डर से लेपर्ड कई बार घर और खेतों में घुसा गया, जहां से उसको बाहर निकालने के लिए पटाखे चलाने पड़े.

गांव के लोगों में मचा हडकंप

बहरोड के तसिंग रोड स्थित जेतपुरा गांव में तेंदुआ आने से हड़कंप मच गया. सबसे पहले तेंदुआ को सबलपुरा मोहल्ले स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नंबर 3 के पास देखा गया. इसके बाद लोगों ने मामले की सूचना पुलिस और वन विभाग को दी. कुछ देर में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया. 

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तेंदुआ की खबर आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई और आसपास के लोग लेपर्ड को देखने के लिए जमा होने लगे. इसके बाद जेतपुरा मोहल्ले की एक पुरानी हवेली में लेपर्ड छुप गया. लेकिन लोगों के शोर से तेंदुआ डर गया और जान बचाकर इधर-उधर गलियों में भागने लगा. इससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया.

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लोगों के डर से भागने लगा लेपर्ड

 मामले पर क्षेत्रीय वन अधिकारी हंसराज यादव ने बताया कि डॉक्टर सहित सरिस्का की टीम में 15 वन कर्मी शामिल थे. इसमें किशनगढ़ और तातारपुर नाका सहित आसपास की टीम भी मौजूद थी. लेपर्ड को घर और खेतों से बाहर निकालने के लिए पटाखे चलाए गए. इस दौरान लेपर्ड खासा डर गया और घरों की छत और गलियों में दौड़ लगाने लगा. खबरों के अनुसार लेपर्ड की उम्र करीब 5 से 6 साल है. भीड़ ज्यादा होने के कारण लेपर्ड इधर-उधर भाग रहा था, इसलिए उसको पकड़ने में समय लगा.

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सीसीटीवी कैमरे में तस्वीरें कैद

लेपर्ड को देखने के लिए दिन भर लोग घर की छतों पर खड़े रहे. वहीं मुहल्लों में लगे सीसीटीवी कैमरे में तेंदुआ की गतिविधियां कैद हो गईं. सरिस्का के अधिकारियों ने बताया कि तेंदुआ को सुरक्षित ट्रेंकुलाइज करके सरिस्का के जंगल में छोड़ दिया गया है. वहीं दूसरी तरफ एक दूसरा तेंदुआ 8 दिनों से अलवर में घूम रहा है और वन विभाग के अधिकारी उसको ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन अभी तक उनको सफलता नहीं मिल पाई है.

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