मिडिल ईस्ट में हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं. अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद है और उधर हूती विद्रोहियों के सऊदी असर के लिए समुद्री रूट पर नाकाबंदी के चलते लाल सागर के जरिए निर्यात को लेकर चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं. इन सबका असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है, तो तेज रफ्तार से भागते हुए अब 95 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है.
तेल की कीमतों में जारी इस उछाल ने पहले ही ग्लोबल टेंशन को हाई पर पहुंचाया है, तो वहीं विदेश से इसे लेकर एक बड़ी चेतावनी आई है, जो डराने वाली है. दरअसल, गोल्डमैन सैश ने वॉर्निंग देते हुए कहा कि Crude Oil Price 120 डॉलर के पार जा सकता है.
'अगर हुआ ऐसा तो तेल...'
अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से शुरू हुए संघर्ष के चलते वैश्विक तेल बाजारों में इस महीने भारी उथल-पुथल मची हुई है, बुधवार को खबर लिखे जाने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और Brent Crude Oil Price 95.26 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इन्वेस्टमेंट बैंक Goldman ने अपने एक नोट का हवाला देते हुए कहा है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से माल ढुलाई में ऐसी ही रुकावट जारी रहती है, तो फिर चौथी तिमाही तक इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल सकती है. बता दें इससे पहले मार्च-अप्रैल महीने में जब US-Iran जंग चरम पर थी, तो तेल की कीमत ने 120 डॉलर का स्तर छू लिया था.
होर्मुज-लाल सागर ने बढ़ाई मुसीबत
गोल्डमैन के विश्लेषकों ने डान स्ट्रुवेन के नेतृत्व में कहा कि मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ने और फारस की खाड़ी से अनुमानित ऑयल फ्लो के युद्ध-पूर्व स्तरों के 45% से नीचे गिरने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि तेल की कीमत 120 डॉलर के पार निकलने के इन अनुमानों के लिए जोखिम हाई हैं, जो होर्मुज में लगातार व्यवधान और लाल सागर में निर्यात पर संकट की संभावना को दर्शाता है.
तेल में उछाल का जोखिम ज्यादा
हालांकि, गोल्डमैन ने वेस्ट एशिया में तनाव कम होने की स्थिति में चौथी तिमाही में ब्रेंट का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल और अगले साल 75 डॉलर प्रति बैरल तक गिरने का भी अनुमान है. यहां बता दें कि Hormuz Strait बंद होने से कच्चे तेल के कार्गो को ग्लोबल खरीदारों तक पहुंचाने में लाल सागर शिपिंग का महत्व बढ़ा है, लेकिन यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर एक्शन ने इस समुद्री रूट को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में रायस्टैड के चीफ भू-राजनीतिक विश्लेषक जॉर्ज लियोन ने कहा, 'अगर सीजफायर नहीं होता है, और होर्मुज काफी हद तक बंद रहता है, वहीं लाल सागर में जहाजों के आवागमन के लिए हूती विद्रोहियों का खतरा बढ़ता रहता है, तो तेल की कीमतों में महत्वपूर्ण उछाल का जोखिम काफी अधिक होगा.