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मां की चीखें, बहनों की सिसकियां... 22 साल का बेटा तिरंगे में लिपटा था, अंतिम संस्कार में रो पड़ा पूरा गांव

करीब डेढ़ साल पहले घर से निकला था तो एयरफोर्स की वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना आंखों में था. इस बार लौटा तो तिरंगे में लिपटा हुआ. राजस्थान के झुंझुनूं के 22 वर्षीय एयरफोर्स जवान आर्यन झाझड़िया की पार्थिव देह जैसे ही गांव पहुंची, मां चीख पड़ी. बहनें बिलखती रहीं और पूरा गांव रो पड़ा. 5 जुलाई को चेन्नई में ड्यूटी के दौरान हुए हादसे ने एक परिवार से उसका जवान बेटा छीन लिया था. गांव ने अपने वीर सपूत को पूरे सैन्य सम्मान के साथ आखिरी सलाम किया.

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साल 2024 में एयरफोर्स में भर्ती हुआ था बेटा. (Photo: ITG)
साल 2024 में एयरफोर्स में भर्ती हुआ था बेटा. (Photo: ITG)

जिस बेटे को मां ने वर्दी पहनाकर देश की सेवा के लिए विदा किया था, उसे शायद इस रूप में लौटने की कल्पना भी नहीं की होगी. राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पीपल का बास गांव में बुधवार को ऐसा ही दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिला. भारतीय वायुसेना के 22 वर्षीय जवान आर्यन झाझड़िया का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा तो पूरा इलाका गम में डूब गया.

घर के आंगन में ताबूत रखा गया. मां सरोज देवी बेटे के चेहरे को बार-बार निहारती रहीं. बहन पूनम की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे. पिता भागीरथ खामोश खड़े थे और दादी का विलाप सुनकर वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें भर आईं. आर्यन की पार्थिव देह मंडावा से गांव तक तिरंगा यात्रा के साथ लाई गई.

mother screams sisters sobs 22 year old son lay wrapped in Tricolour entire village wept at funeral

सड़क के दोनों ओर लोग कतार लगाकर खड़े थे. किसी ने हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि दी, किसी ने फूल बरसाए, तो किसी ने सलामी देकर अपने गांव के बेटे को विदा किया. गांव की छतों से लेकर गलियों तक सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही थी- भारत माता की जय, आर्यन अमर रहें. उस बेटे को पूरा इलाका सलामी दे रहा था, जिसने देश की वर्दी पहनकर सेवा का रास्ता चुना था.

सिर्फ 22 साल... और अधूरी रह गई जिंदगी

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आर्यन का जन्म 14 जुलाई 2004 को हुआ था. फरवरी 2024 में उन्होंने भारतीय वायुसेना जॉइन की. पहली पोस्टिंग कर्नाटक के बेलगाम में मिली. कुछ महीने पहले 20 अप्रैल 2026 को उनका तबादला चेन्नई के अवाड़ी एयरफोर्स स्टेशन पर हुआ था. परिवार को उम्मीद थी कि बेटा छुट्टियों में आएगा, लेकिन 5 जुलाई को ड्यूटी के दौरान हुए एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया. चार दिन बाद वही बेटा तिरंगे में लिपटकर घर लौटा.

mother screams sisters sobs 22 year old son lay wrapped in Tricolour entire village wept at funeral

यह भी पढ़ें: मां की चीख, बहनों की सिसकियां... असम विमान क्रैश में शहीद दानिश आलम को अंतिम विदाई, पूरा गांव रोया

श्मशान घाट पर भारतीय वायुसेना की टुकड़ी पहले से मौजूद थी. गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. सैन्य परंपराओं के अनुसार अंतिम सलामी दी गई. फिर पूरे सम्मान के साथ आर्यन का अंतिम संस्कार किया गया. वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर गर्व भी था और गहरा दुख भी. स्थानीय विधायक रीटा चौधरी, भाजपा जिला अध्यक्ष हर्षिणी कुल्हरी, पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार समेत कई जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

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22 साल की उम्र में ज्यादातर युवा अपने करियर और भविष्य के सपने बुन रहे होते हैं. आर्यन ने भी सपने देखे होंगे. लेकिन उसने अपने जीवन का रास्ता देश सेवा को चुना. उसका सफर भले छोटा रहा, लेकिन गांव वालों के लिए वह हमेशा उस बेटे के रूप में याद रहेगा, जिसने वायुसेना की वर्दी पहनकर देश का मान बढ़ाया. जब अंतिम विदाई का समय आया तो हजारों लोगों की भीड़ में किसी की आंख सूखी नहीं थी. क्योंकि उस दिन सिर्फ एक परिवार का बेटा नहीं गया था... पूरा गांव अपना बेटा खो चुका था.

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