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मां की चीख, बहनों की सिसकियां... असम विमान क्रैश में शहीद दानिश आलम को अंतिम विदाई, पूरा गांव रोया

Air Force martyr Danish Alam: असम के जोराहाट में वायुसेना के AN-32 विमान हादसे में भोजपुर के अग्निवीर जवान दानिश आलम शहीद हो गए. पैतृक गांव कायमनगर में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई. पूरी रिपोर्ट...

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 असम में शहीद हुए बिहार के जांबाज सपूत की आखिरी यात्रा.(Photo:ITG)
असम में शहीद हुए बिहार के जांबाज सपूत की आखिरी यात्रा.(Photo:ITG)

असम के जोराहाट में हुए भारतीय वायुसेना (IAF) के AN-32 विमान हादसे में देश ने अपना एक और जांबाज सपूत खो दिया है. इस हादसे में शहीद हुए भोजपुर के लाल और अग्निवीर जवान दानिश आलम का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव कायमनगर पहुंचा. जैसे ही तिरंगे में लिपटा वीर सपूत अपने घर की चौखट पर आया, पूरा इलाका चीख-पुकार और आंसुओं में डूब गया. हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने इस बहादुर बेटे को अंतिम सलामी दी.

कोइलवर प्रखंड के कायमनगर गांव में उस समय माहौल गमगीन हो गया जब शहीद दानिश आलम का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा. अंतिम दर्शन के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. चारों ओर 'भारत माता की जय' और 'वीर जवान दानिश आलम अमर रहें' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा.

तिरंगे में लिपटे बेटे का शव देखकर माता-पिता और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. परिजनों की चीख-पुकार सुन वहां मौजूद हर आंख नम हो गई. रिश्तेदार और ग्रामीण परिवार को सांत्वना देते नजर आए.

इस दौरान भोजपुर के DM तनय सुल्तानिया, एसपी राज सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. वहीं बिहटा एयरफोर्स स्टेशन से पहुंचे अधिकारियों और जवानों ने राजकीय सम्मान के साथ शहीद को अंतिम सलामी दी. 

बिहिटा एयरफोर्स स्टेशन के विंग कमांडर केके झा ने कहा कि शाहिद दानिश आलम मिलनसार और कुशल व्यवहार का जवान था, उसने जो देश की सेवा किया है उसे देश हमेशा याद रखेगा.

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शहीद दानिश आलम के बड़े पिता शहाबुद्दीन अंसारी ने कहा कि उन्हें अपने भतीजे की शहादत पर गर्व है. उन्होंने कहा कि यदि परिवार के अन्य बच्चों को भी देश सेवा का अवसर मिला तो वे पीछे नहीं हटेंगे.

दानिश आलम मोहम्मद फारुख आलम और अख्तरी बेगम के एकलौते पुत्र थे. उन्होंने 29 जून 2025 को भारतीय वायुसेना में अग्निवीर के रूप में सेवा शुरू की थी. हाल ही में बकरीद पर घर आए थे और 30 मई को वापस ड्यूटी पर लौटे थे. लेकिन किसे पता था कि कुछ ही दिनों बाद वह तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटेंगे.

घर से निकली अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए. हाथों में तिरंगा लिए लोग अपने वीर सपूत को अंतिम सलामी दे रहे थे. कायमनगर बाजार स्थित कब्रिस्तान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया.

देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भोजपुर के वीर सपूत दानिश आलम अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी शहादत और देशभक्ति की गाथा हमेशा याद रखी जाएगी.

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