राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच पुराने विवादों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने गहलोत पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि वह सार्वजनिक रूप से 'भूल जाओ और माफ कर दो' की बात करते हैं, लेकिन खुद इस सिद्धांत का पालन नहीं करते.
लोकेश शर्मा ने कहा कि गहलोत लगातार मानेसर प्रकरण का जिक्र कर सचिन पायलट को निशाना बनाते रहते हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे कई अवसरों का क्रमवार विवरण मौजूद है, जब गहलोत ने सार्वजनिक मंचों से मानेसर घटना का उल्लेख किया.
शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अशोक गहलोत द्वारा लगाए गए आरोपों को सही माना जाए और वास्तव में उनकी सरकार गिराने की कोशिश में केंद्रीय नेताओं अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका थी, तो उनके खिलाफ प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं कराई गई. उन्होंने कहा कि यदि इतने गंभीर आरोप थे तो कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी.
साल 2020 का किया जिक्र
उन्होंने वर्ष 2020 के राजनीतिक संकट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय अहमद पटेल की मौजूदगी में समझौता हुआ था और यह तय किया गया था कि पार्टी छोड़कर गए नेताओं को वापस लिया जाएगा. शर्मा ने पूछा कि यदि ऐसा नहीं था तो फिर जैसलमेर में यह स्पष्ट क्यों नहीं कहा गया कि उन नेताओं को पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा.
लोकेश शर्मा ने क्या आरोप लगाए
लोकेश शर्मा ने कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत कांग्रेस संगठन और उसकी कार्यप्रणाली को भली-भांति जानते हैं. उनके अनुसार, गहलोत को लगता था कि जनता उनकी हर बात पर विश्वास कर लेगी. शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्होंने लोगों को कम आंकने की गलती की. उन्होंने यह भी कहा कि यदि गहलोत का विरोध केवल सचिन पायलट से था, तो फिर वह पार्टी विधायकों को बस में बैठाकर पार्टी हाईकमान से मिलने क्यों नहीं गए, जैसा कि वर्ष 2022 में पार्टी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष के आवास के बाहर ले जाया गया था.
राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनने की बात
शर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए अशोक गहलोत उनसे कहा करते थे कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनना चाहते और मुख्यमंत्री पद पर ही बने रहना चाहते हैं.
सचिन पायलट को लेकर गहलोत हमलावर
सचिन पायलट को लेकर गहलोत की लगातार टिप्पणियों पर टिप्पणी करते हुए लोकेश शर्मा ने कहा कि जब भी अशोक गहलोत को यह संकेत मिलता है कि जिस युवा नेता को वह पसंद नहीं करते, उसे पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है, तो वह असहज हो जाते हैं. उन्होंने दावा किया कि संभवतः उन्हें यह जानकारी मिली होगी कि पार्टी नेतृत्व सचिन पायलट को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर विचार कर रहा है, इसी कारण उन्होंने हाल में पायलट को साजिशकर्ता बताया.
लोकेश शर्मा ने कर्नाटक का दिया उदाहरण
लोकेश शर्मा ने कर्नाटक कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नेतृत्व परिवर्तन बेहद सहज तरीके से हुआ. उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया ने बिना किसी विवाद के मुख्यमंत्री पद छोड़ा, जबकि राजस्थान में अशोक गहलोत ने पार्टी नेतृत्व द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षकों का अपमान किया था. लोकेश शर्मा के इन बयानों ने राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है. हालांकि, इन आरोपों पर अशोक गहलोत या उनके समर्थकों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.