मेरे सहित हमारी उम्र के तमाम लोग, एक सशक्त, सक्षम और स्वाभिमानी भारत के सपने के साथ बड़े हुए हैं. एक ऐसा भारत जो तीव्रता से विकास के पथ पर अग्रसर हो, जिसकी बात दुनिया गौर से सुने और सबसे बड़ी बात यह है कि जिसके नेतृत्व पर उसकी महान जनता अगाध विश्वास करती हो. किंतु अपने जीवनकाल के ज्यादातर हिस्से में हमें अपने इस सपने से समझौता ही करना पड़ा. लेकिन हम सब लोग सौभाग्यशाली हैं कि अब हम अपनी खुली आंखों से यह सपना सच होते देख पा रहे हैं. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के विगत 12 वर्षों के अनथक प्रयासों, साहसिक नेतृत्व और अंत्योदय को समर्पित जीवन से यह संभव हो पाया है. आज भारत सशक्त भी है, सक्षम भी और स्वाभिमानी भी है.
मोदीजी के नेतृत्व में भारत की यह कामयाबी की कहानी आंकड़े स्वयं कह रहे हैं. पीएम आवास योजना के तहत चार करोड़ पक्के घर, 81 करोड़ लोगों को हर माह मुफ्त राशन, 60 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत के तहत निशुल्क उपचार की सुविधा, 40 लाख करोड़ रुपये का गारंटी मुक्त मुद्रा ऋण- यह सब अंत्योदय को समर्पित एक मनीषी ही कर सकता है. आप सोचिए कि आजादी के पहले सात दशक में कुल 3.2 करोड़ घरों में ही नल से पेयजल आपूर्ति हो पा रही थी, अब यह आंकड़ा चार गुना से अधिक बढ़कर 16 करोड़ तक पहुंच गया है. 2014 तक देश के केवल 5 शहर ही मेट्रो ट्रेन से जुड़े थे, अब इन शहरों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है. मेट्रो रेल नेटवर्क भी 248 किलोमीटर से बढ़कर 1155 किलोमीटर हो गया है.
आज भारत दुनिया को हर क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर रहा है. दुनिया के कुल डिजिटल लेन-देन का 56 प्रतिशत अकेले भारत में हो रहा है. कभी अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर रहने वाला भारत आज रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है. अंतरिक्ष से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण तक, भारत आत्मनिर्भरता के नए अध्याय लिख रहा है. नारी वंदन के अपने संकल्प को पूरा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिया है. ऑपरेशन सिंदूर में भारत की यही नारी शक्ति दुश्मन देश पर भारी पड़ी. कभी देश बाह्य प्रायोजित आतंकवाद के साथ ही देश के अंदर पलने वाले नक्सल आतंक का शिकार था, आज देश नक्सल हिंसा को निर्णायक रूप से नियंत्रित करने के साथ-साथ सीमा पार स्थित आतंकी ढांचों को निशाना बनाने का साहस भी रखता है. यह नया भारत है- जो शांति भी चाहता है और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जानता है.
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का जो राष्ट्रीय विजन आकार ले रहा है, उसका प्रभाव देश के प्रत्येक राज्य में दिखाई दे रहा है. उत्तराखंड भी इसका एक सशक्त उदाहरण है. हम देवभूमिवासियों के लिए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जाने योग्य साबित हुआ है. प्रधानमंत्री जी की उत्तराखंड के प्रति श्रद्धा और आत्मीयता किसी से छिपी नहीं है. यही कारण है कि केंद्र सरकार के सहयोग से आज उत्तराखंड में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है. विगत चार वर्षों में सड़क, रेल, हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन, स्वास्थ्य, धार्मिक पुनर्जागरण तथा औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है.
11 हजार 700 करोड़ रुपये की लागत से चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है. 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस-वे ने दूरी और समय दोनों को कम कर दिया है. अब दिल्ली से देहरादून की यात्रा ढाई घंटे में पूरी होने लगी है. इसके अतिरिक्त सितारगंज–टनकपुर, पौंटा साहिब–देहरादून, भानियावाला–ऋषिकेश, काठगोदाम–लालकुआं–हल्द्वानी बाईपास तथा रुद्रपुर बाईपास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी कार्य जारी है.
दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में रेल संपर्क लंबे समय तक केवल एक सपना था. लेकिन आज ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रही है. इसके साथ ही केंद्र सरकार ने 48 हजार करोड़ रुपये की टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है. प्रदेश के 11 रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है.
हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं. जॉलीग्रांट, पंतनगर और पिथौरागढ़ एयरपोर्ट का विस्तार किया गया है. उड़ान योजना के तहत प्रदेश में 18 हेलीपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 12 पर सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं. गौचर, श्रीनगर, चिन्यालीसौड़, हल्द्वानी, मुन्स्यारी, पिथौरागढ़, पंतनगर, चंपावत, बागेश्वर, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है. वर्ष 2022 तक जहां राज्य में केवल दो हेलीपोर्ट थे, वहीं आज उनकी संख्या बढ़कर सात हो चुकी है. हेलीपैड की संख्या भी लगभग दोगुनी होकर 118 तक पहुंच गई है.
केंद्र सरकार के सहयोग से पर्वतमाला परियोजना के माध्यम से उत्तराखंड में रोपवे नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. गौरीकुंड से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजनाएं प्रदेश के पर्यटन और तीर्थाटन को नई दिशा देंगी. प्रधानमंत्री जी ने चारधामों के साथ-साथ उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों के पुनरोद्धार और पुनर्विकास को भी प्राथमिकता दी है. केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पुनर्विकास परियोजनाएं तथा मानसखंड मंदिर माला मिशन इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं. इन प्रयासों ने उत्तराखंड को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाई है.
जल संसाधनों और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कार्य हो रहे हैं. केंद्र सरकार के सहयोग से जमरानी, सौंग और लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, जिससे सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होंगे. किच्छा में एम्स सैटेलाइट सेंटर का कार्य प्रारंभ हो चुका है. एम्स ऋषिकेश में देश की पहली हेली एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है, जो आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अभिनव पहल है.
इन सब उपलब्धियों के समानांतर उत्तराखंड ने भी प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने का कार्य किया है. हमारी सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू कर देश को एक नई दिशा दी है. सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, भू-कानून में सुधार, निवेश प्रोत्साहन, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के लिए रोजगार सृजन और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में हमने अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं. आज उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र ही नहीं, बल्कि सुशासन, नवाचार और विकास का भी एक उभरता हुआ मॉडल बन रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष केवल एक राजनीतिक कालखंड नहीं हैं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास के पुनर्जागरण की गाथा हैं. यह उन करोड़ों गरीबों के जीवन में आशा का दीप जलाने की कहानी है, जिन्हें पहली बार लगा कि सरकार उनके द्वार तक पहुंच सकती है. यह उन युवाओं के सपनों को पंख देने की कहानी है, जिन्होंने नए भारत में अपनी संभावनाओं को पहचाना. यह उन माताओं-बहनों के सम्मान की कहानी है, जिन्हें विकास की मुख्यधारा में बराबरी का स्थान मिला.
आज जब हम विकसित भारत के अमृतकाल में प्रवेश कर चुके हैं, तब उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व है कि वह इस परिवर्तन यात्रा का सक्रिय सहभागी बने. हमें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बनेगा.
यह केवल विकास की यात्रा नहीं है, यह 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास, आकांक्षाओं और संकल्प की यात्रा है. और इस यात्रा में उत्तराखंड गर्व के साथ प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के स्वप्न का एक सशक्त वाहक बनकर आगे बढ़ता रहेगा.