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ट्रंप का जंगी छलावा... एक तरफ ईरान से पीस डील की बातें, फ‍िर इजरायल संग म‍िलकर अटैक!

शन‍िवार को अमेर‍िका और इजरायल ने जब ईरान पर अटैक क‍िया तो लगा क‍ि कोई जून 2025 में हुए 12 द‍िन के युद्ध की स्‍क्र‍िप्‍ट दोबारा पढ़ रहा है. बताया गया कि जेनेवा में अमेरिका और ईरान समझौते के करीब थे. लेकिन हकीकत ईरान के भीतर यूएस-इजरायल के जॉइंट ऑपरेशन के रूप में सामने आई. पिछले साल जून में भी ट्रंप ईरान के साथ डील के 'करीब' थे. फिर जो हुआ, उसे दुनिया ने देखा.

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अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ खोला मोर्चा. (Photo: AP)
अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ खोला मोर्चा. (Photo: AP)

शनिवार सुबह तेहरान में धुएं के गुबार उठे. सायरन बजने लगे. पहले खबरें आईं क‍ि इजरायल ने प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक की है. लेक‍िन, अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने वीड‍ियो संदेश जारी कर कहा क‍ि यह उनका ईरान की बर्बर इस्‍लाम‍िक रीजीम और उसकी फौज IRGC पर अटैक है.  ईरान के दर्जन भर शहरों पर म‍िसाइल अटैक हुए. जून 2025 और ताजा हमले के बाद ट्रंप के बयान में फर्क इतना था क‍ि तब ट्रंप कह रहे थे क‍ि ये अटैक ईरान की न्‍यूक्‍ल‍ियर साइट पर हमला है ताक‍ि वह परमाणु हथियार न बना सके. इस बार ट्रंप कह रहे हैं क‍ि वे ईरान में रीजीम चेंज चाहते हैं और IRGC तुरंत सरेंडर करे. कुल म‍िलाकर, सबकुछ वैसे ही हो रहा है, जैसे जून 2025 में हुआ था. 12 दिन वाले उस युद्ध का रिपीट टेलीकास्ट. कोई फर्क नहीं. सिर्फ तारीख बदली है. एक तरफ पीस डील का छलावा और दूसरी तरफ म‍िसाइल और बम के धमाके.

जून 2025 याद कीजिए. ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते की बातें चल रही थीं. सब कह रहे थे कि सहमति बन गई. बस कागज पर साइन बाकी थे. तब इजरायल ने हमला कर दिया. अचानक. बिना इंतजार किए. अब ठीक वैसा ही सीन जेनेवा में दोहराया गया. अमेरिका और ईरान के बीच बातें चल रही थीं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची खुद इंडिया टुडे की गीता मोहन से कह चुके थे कि हम परमाणु हथियार और न्यूक्लियर एनर्जी के हर मुद्दे पर बात करने को तैयार हैं. लेकिन अगर हमला हुआ तो जवाब भी देंगे. लेक‍िन, ईरान की बातों से बेपरवाह अमेर‍िका और इजरायल ने तेहरान सह‍ित उसके दर्जनभर शहरों पर मिसाइलें दाग दीं. जबक‍ि बीती रात CBS न्यूज से बात करते हुए ओमान के व‍िदेश मंत्री बद्र ब‍िन हमद अल बुसैदी ने कहा क‍ि दोनों देशों के बीच पीस डील के करीब हैं. आमानी व‍िदेश मंत्री ईरान और अमेर‍िका के बीच मध्‍यस्‍थता कर रहे थे,

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क्या जून 2025 वाला ही खेल खेला गया है? एक तरफ ईरान से अमन की बातें, दूसरी तरफ जंग की तैयारी. यूएस इस रीजन में अपने दो अपने एयरक्राफ्ट कैरियर भेज चुका था. अभी यूएसएस गेराल्ड फोर्ड भूमध्य सागर में तैनात है. और यूएसएस अब्राहम लिंकन ओमान के पास अरब सागर में. कोई बदलाव नहीं. ट्रंप ने जून में हमले के बाद अपनी सहभागिता जताई थी. इस बार भी वीडियो जारी करके कहा, हमने बड़ा ऑपरेशन शुरू कर दिया है.

जून 2025 के इजरायली हमले के बाद यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्‍टेट मार्को रुबियो ने कहा था कि ट्रंप उस हमले से खुश नहीं थे. लेक‍िन, इस बार ट्रंप ने पहले मीड‍िया के सामने आकर हमले की जानकारी दी. उसके बाद नेतन्याहू टीवी पर आए और कहा क‍ि 'अमेर‍िका और इजरायल ने ईरान की आतंकी रेजीम पर हमला क‍िया है. जो हमारा अस्‍त‍ित्‍व म‍िटाना चाहती है. 47 साल से ईरान 'डेथ टू इजरायल' और 'डेथ टू अमेर‍िका' के नारे लगा रहा है. हमारे लोगों का खून बहा रहा है. अब र‍िजीम को जाना होगा.'  स्ट्रैटेजिक एक्सपर्ट माइकल नाइट्स ऑफ वाशिंगटन इंस्टीट्यूट कहते हैं, इजरायल अमेरिका का फ्रंटलाइन स्टेट है. अमेरिका उसके हितों को अपने हितों की तरह गार्ड करता है. और इस बार नेतान्‍याहू को व्‍हाइट हाउस में ट्रंप के रूप में एक बेहद भरोसेमंद साथी म‍िल गया है.

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ईरान अपने टारगेट को लेकर क्‍ल‍ियर है

जैसा कि ईरान कह चुका था कि वह वार और पीस दोनों के लिए तैयार है. हमला हुआ तो इस रीजन के अमेरिकी बेस वैध टारगेट बन जाएंगे. जून 2025 में दुनिया ने देखा कि इजरायल और अमेरिका ने मनचाहे हवाई हमले किए. ईरान ने जवाब दिया. मिसाइलें तेल अवीव तक पहुंचीं. कतर के अमेरिकी बेस तक धमक सुनाई दी. ट्रंप को अचानक सीजफायर करना पड़ा. 12 दिन में युद्ध थम गया. लेकिन ईरान की मिसाइलों की सटीकता बढ़ गई थी. शन‍िवार को हुए अटैक के बाद ईरान ने तुरंत इजरायल, कतर, बहरीन, कुवैत और यूएई में अमेर‍िकन म‍िल‍िट्री और एयरबेस पर म‍िसाइलें दागी हैं.

ईरान यह भी चाहेगा क‍ि यद‍ि अमेर‍िका और इजरायल अपने हमले नहीं रोकते हैं तो लेबनान और इराक में ह‍िजबुल्‍ला और यमन में हूती उसका हाथ बंटाएं और इस वार को रीजनल बनाने में मदद करें. ताक‍ि अमेर‍िका और इजरायल पर एक्‍स्‍ट्रा प्रेशन बनाया जा सके.

जून 2025 में ईरान ने दिखाया था कि उसकी मिसाइलें कितनी सटीक हो सकती हैं. अब उसने नए ड्रोन और मिसाइल सिस्टम तैयार किए हैं. स्ट्रेट ऑफ हरमुज में एक्सरसाइज चल रही थी. अगर युद्ध लंबा चला तो इरान की अर्थव्यवस्था चरमराएगी लेकिन अमेरिका भी फंस जाएगा.

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अरब देशों की कश्‍मकश...

अरब देशों की कश्मकश सबसे बड़ी है. वे ईरान से डरते हैं लेकिन इजरायल के अनप्रेडिक्टेबल बर्ताव से भी. सऊदी क्राउन प्रिंस ने कहा, हमारी जमीन इस्तेमाल नहीं होगी. यूएई ने भी यही दोहराया. लेक‍िन अब ईरान ने जवाबी हमले शुरू किए हैं तो ये देश बीच में फंस गए हैं. ओमान तो मीडिएटर बन रहा था. लेकिन उसकी सीमा भी सीमित है. कुवैत, इराक और जॉर्डन मूकदर्शक हैं.

स्ट्रैटेजिक गेम की बात करें तो यह सिर्फ इजरायल-ईरान नहीं. पूरा मिडिल ईस्ट दांव पर है. तेल सप्लाई. ग्लोबल इकोनॉमी. रूस और चीन ईरान के साथ खड़े हो सकते हैं. हथियार और डिप्लोमेटिक सपोर्ट देंगे. अमेरिका को दो मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा.

एटलांटिक काउंसिल के विलियम वेचसलर कहते हैं, इजरायल चुनावी साल में है. वह ईरान को न्यूक्लियर थ्रेशोल्ड से रोकना चाहता है. लेकिन कीमत क्या होगी. उधर, ट्रंप ईरान पर हुए अटैक को न‍िर्णायक बनाकर साब‍ित करना चाहते हैं क‍ि 1979 की इस्‍लाम‍िक क्रांत‍ि के बाद ईरान की जो सत्‍ता अमेर‍िकी नेतृत्‍व के सीने में चुभ रही थी, वो कांटा ट्रंप ने हटा द‍िया है.

तीन संभावनाएं उभर रही है ताजा युद्ध की

बड़ा सवाल यह है क‍ि क्या यह जंग 12 दिन में निपट जाएगी या पार्ट 2 ज्‍यादा विनाशकारी साबित होगी. इस बार अमेरिका की तैयारी ज्यादा आक्रामक है. दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप. सैकड़ों फाइटर जेट. एयर डिफेंस सिस्टम म‍िड‍िल ईस्‍ट में तैनात हैं. बड़ी तादाद में सैन‍िक भी भेजे गए हैं. फिलहाल इस बात के संकेत नहीं हैं कि अमेरिका अपने सैनिक ईरान की जमीन पर उतारेगा. ऐसे में हमले के बाद तीन संभावनाएं द‍िखती हैं-

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पहली, लिमिटेड स्ट्राइक्स. सिर्फ न्यूक्लियर साइट्स और मिसाइल फैक्टरियां टारगेट. जून 2025 की तरह. ईरान जवाब देगा लेकिन सीमित. फिर डिप्लोमेसी शुरू.

दूसरी, लंबा युद्ध. ईरान अपने प्रॉक्सी सक्रिय करेगा. हिजबुल्लाह, हूती, इराकी मिलिशिया. स्ट्रेट ऑफ हरमुज बंद. तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी. अमेरिकी बेस पर हमले. साइबर वॉर. ईरान की मिसाइलों की रेंज 2,000 क‍िमी से ज्यादा है. ज‍िसमें पूरा म‍िड‍िल ईस्‍ट कवर होता है.

तीसरी, रेजिम चेंज की कोशिश. ट्रंप ने अपनी चेतावनी में यही कहा है. लेकिन यह खतरनाक होगा. ईरान की सेना कमजोर नहीं है. ट्रंप IRGC को सरेंडर के ल‍िए कह रहे हैं. जो कभी होगा नहीं. ईरान की एयर डिफेंस में कमियां जरूर हैं. लेक‍िन जून में उसने बहुत कुछ सीख लिया है. वह स्ट्रेटेजिक धैर्य रख सकता है. प्रोटेस्ट्स भी अंदर चल रहे हैं लेकिन रेजिम अभी मजबूत है.

ईरान पर अटैक, पूरी दुन‍िया का संकट

अब पूरा सीन साफ है. शनिवार का हमला जून 2025 का रीमेक है, या कहें क‍ि उसी का पार्ट 2 है. लेकिन इस बार स्केल बड़ा है. अमेरिका ज्यादा तैयार है. ईरान ज्यादा सतर्क. अरब देश ज्यादा डरे हुए. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर सीजफायर जल्दी नहीं हुआ तो यह 12 दिन से ज्यादा चलेगा. महीनों तक. विनाशकारी होगा. मिसाइलों की बौछार. प्रॉक्सी वॉर. साइबर अटैक. तेल संकट.

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ट्रंप के लिए यह टेस्ट है. वह डील चाहते थे लेकिन इजरायल का दबाव भी सहना पड़ रहा है. पेंटागन शायद ज्यादा लंबा खेल नहीं खेलना चाहता. लेकिन राजनीति अलग है. कुल मिलाकर, यह युद्ध अगर बढ़ा तो मिडिल ईस्ट का नक्शा बदल सकता है. ईरान कमजोर हो सकता है लेकिन पूरी तरह टूटेगा नहीं. क्‍योंक‍ि न तो तो वह इराक है और न वेनेजुएला. अमेरिका की छवि धूमिल होगी. इजरायल सुरक्षित महसूस करेगा लेकिन अकेला पड़ जाएगा. अरब देश नुकसान उठाएंगे.

दुनिया देख रही है. तेल अवीव से लेकर तेहरान तक. वाशिंगटन से लेकर रियाद तक. यह सिर्फ दो देशों या दो ताकतों का युद्ध नहीं है. यह पूरे इलाके, और कई मायनों में पूरी दुन‍िया का भविष्य तय कर रहा है. और जून 2025 की तरह इस बार भी सीजफायर की उम्मीद है लेकिन उसकी कीमत बहुत ज्यादा होगी.

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