बारह वर्ष पूरे होने पर हम सामान्यतः इसे एक ‘तप’ कहते हैं. ‘तप’ शब्द में संघर्ष, निरंतर प्रयास और लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प समाहित है. इसलिए जब हम कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व का एक तप पूर्ण हुआ है, तो इस अवधि का मूल्यांकन इन्हीं कसौटियों पर किया जाना चाहिए. उस दृष्टि से देखें तो यह कालखंड सेवा, समर्पण और सुशासन का स्वर्णिम युग रहा है.
तपस्या के दो पक्ष होते हैं. यदि यह तपस्या समाज के लिए हो तो उसका फल भी समाज को ही मिलता है और समाज के अनेक वर्गों को उसका लाभ प्राप्त होता है. मोदीजी की इस तपस्या का परिणाम भारत के सामान्य नागरिक के जीवन में आई अभूतपूर्व क्रांति के रूप में दिखाई देता है. वर्ष 2014 से 2026 तक की उनकी 12 वर्षों की यात्रा एक परिवर्तनकारी युग की साक्षी है. यह केवल सत्ता के 12 वर्ष नहीं, बल्कि विश्वास, विकास, सुशासन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और जनकल्याण का अद्वितीय संगम है.
आज एक और विशेष अवसर है. निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में मोदी जी ने लगातार 4399 दिन पूरे किए हैं. इस दौरान उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया. कुछ लोग कहेंगे कि नेहरू जी और मोदी जी की तुलना नहीं हो सकती. नेहरू जी जब प्रधानमंत्री बने थे, तब भारतीय समाज में यह धारणा थी कि उनका कोई विकल्प नहीं है. लेकिन जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तब जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से अधिक परिपक्व हो चुकी थी. उसे मतदान का अधिकार और उसका महत्व समझ में आ चुका था. लोगों को अपनी आशाओं और आकांक्षाओं का स्पष्ट बोध था. उन्हें यह भी पता था कि सरकार जनता के कल्याण के लिए होती है. ऐसे समय में मोदी जी की सरकार बनी. जनता ने 2014 में उन्हें भरपूर समर्थन देकर वह चुनौती दी, जिसे कांग्रेस 50-60 वर्षों में पूरा नहीं कर सकी थी. मोदीजी ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मंत्र दिया, जो आगे चलकर ‘सबका विश्वास, सबका प्रयास’ तक विस्तारित हुआ. 2014, 2019 और 2024 के विजय चरणों को पार करते हुए वे आज भारत को वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं.
2014 और 2019 के स्पष्ट जनादेश के बाद 2024 की विजय केवल चुनावी सफलता नहीं थी, बल्कि जनता द्वारा विकास, सुशासन और स्थिर नेतृत्व पर व्यक्त किया गया पुनः विश्वास था. 1962 के बाद लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी देश के पहले नेता बने. जब दुनिया की अनेक लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रही थीं, तब भारत ने स्थिरता, निरंतरता और निर्णायक नेतृत्व का मार्ग चुना. पिछले दशक में भारत ने आर्थिक सुधार, सामाजिक परिवर्तन, आधारभूत संरचना विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रभावी विदेश नीति के माध्यम से स्वयं को अधिक सक्षम, आत्मविश्वासी और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है. विश्व के 24 से अधिक देशों द्वारा उन्हें दिए गए सर्वोच्च सम्मान इसकी पुष्टि करते हैं.
यह केवल एक नेता की यात्रा नहीं थी, बल्कि इसमें भारत की जनता सहभागी रही. परिणामस्वरूप भारत की अर्थव्यवस्था 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई और भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया. सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए आर्थिक समृद्धि आवश्यक है. मोदी जी ने इसे केवल समझा ही नहीं, बल्कि इसके लिए हर स्तर पर प्रयास भी किए. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों ने भारतीयों में आत्मविश्वास जगाया और भारतीय उत्पादों पर दुनिया का भरोसा बढ़ाया. आज स्वदेशी रक्षा उपकरणों की मांग इतनी बढ़ गई है कि अगले दस वर्षों का उत्पादन भी कम पड़ सकता है. यही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक शक्ति है.
देश के 12 राज्यों में नक्सलवाद के प्रभाव को कम करना मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि है. जिन क्षेत्रों में दशकों तक विकास नहीं पहुंच पाया था, वहां आज विकास की धारा पहुंच रही है. लगभग 20 करोड़ लोग भय और गरीबी के साये में जीवन जी रहे थे. नक्सलवाद के कारण विकास रुक गया था और हजारों युवाओं का जीवन प्रभावित हुआ था. आज स्थिति बदल रही है. गढ़चिरौली जैसे क्षेत्रों में स्टील उद्योग स्थापित हो रहे हैं, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और बड़े शैक्षणिक संस्थान शुरू हो रहे हैं. विकास की आवाज ने बंदूक की आवाज पर विजय प्राप्त की है.
पिछले 12 वर्षों में भारत ने आधारभूत संरचना विकास में अभूतपूर्व प्रगति की है. राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क 91 हजार किलोमीटर से बढ़कर लगभग 1.46 लाख किलोमीटर तक पहुंच गया है. प्रतिदिन औसतन 34 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण हो रहा है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लाखों किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है, जिससे किसानों, विद्यार्थियों और ग्रामीण नागरिकों के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया है. रेलवे क्षेत्र में ब्रॉडगेज विद्युतीकरण तेजी से हो रहा है. वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत स्टेशन योजना और आधुनिक रेलवे स्टेशनों ने भारतीय रेल की नई पहचान बनाई है. मेट्रो नेटवर्क 248 किलोमीटर से बढ़कर 1,095 किलोमीटर से अधिक हो गया है.
मोदी सरकार ने ‘अन्नदाता’ किसान को विकास के केंद्र में रखा. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान की गई. तीसरे कार्यकाल की पहली फाइल भी किसान कल्याण से संबंधित थी, जिससे सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट होती है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ अभियान से लाखों हेक्टेयर क्षेत्र सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत आया. कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई और भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया.
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 81 करोड़ नागरिकों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया. प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से 4 करोड़ से अधिक परिवारों को पक्के घर मिले. उज्ज्वला योजना से 11 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला. आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त हुई. जल जीवन मिशन के माध्यम से 16 करोड़ से अधिक घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया गया.
मोदी सरकार की नीतियों में महिलाओं को विशेष महत्व दिया गया. जनधन खातों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है. ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं. सुकन्या समृद्धि योजना, मातृत्व लाभ, स्वयं सहायता समूहों का सशक्तीकरण और सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने महिला नेतृत्व आधारित विकास की अवधारणा को साकार किया है.
मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत ने डिजिटल क्रांति का नया इतिहास रचा है. जनधन, आधार और मोबाइल के माध्यम से लाखों करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचे हैं. यूपीआई लेन-देन में भारत ने वैश्विक नेतृत्व प्राप्त किया है. भारतनेट परियोजना के तहत लाखों ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा गया है. डिजिटल गवर्नेंस, फेसलेस कर प्रणाली और जीईएम पोर्टल ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है.
भारत अब दुनिया से समानता के आधार पर संवाद कर रहा है. भारत को व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी चाहिए, लेकिन आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च रखा और वैश्विक दबाव के आगे झुके बिना स्वतंत्र नीति अपनाने की क्षमता प्रदर्शित की.
आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘पीएलआई’ योजनाओं ने विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है. भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश बन गया है. इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई है. सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए बड़े निवेश आकर्षित हुए हैं और भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहन मिलने से देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप और सैकड़ों यूनिकॉर्न विकसित हुए हैं.
मोदी सरकार के 12 वर्षों में भारत ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को गर्व के साथ पुनर्स्थापित किया है. अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक और केदारनाथ पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं ने देश की आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा दी है. छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन कर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले मोदीजी ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़े ‘पंचतीर्थ’, बिरसा मुंडा जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’, सरदार पटेल की ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’, नेताजी सुभाषचंद्र बोस के सम्मान, कर्तव्य पथ और नए संसद भवन जैसे राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों को स्थापित किया है.
महाराष्ट्र इस विकास यात्रा का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य रहा है. महाराष्ट्र की प्रत्येक आवश्यकता और चुनौती के समाधान में मोदीजी ने सहयोग किया. इंदू मिल स्मारक के लिए भूमि उपलब्ध कराने से लेकर अमरावती टेक्सटाइल पार्क, वधावन बंदरगाह, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, समृद्धि महामार्ग, अटल सेतु, कोस्टल रोड और मेट्रो परियोजनाओं तक हर प्रमुख परियोजना को उनका समर्थन प्राप्त हुआ.
आज विश्व भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने वाले, विश्वसनीय और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में देख रहा है. आज का भारत आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर खड़ा है. विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में ये 12 वर्ष मजबूत नींव रखने वाले सिद्ध हुए हैं. विश्वास, विकास और जनभागीदारी की यह यात्रा आने वाले समय में और अधिक गति से आगे बढ़ेगी, यही देशवासियों का दृढ़ विश्वास है.