Axis My India के एग्जिट पोल में असम की सत्ता में बीजेपी के हैट्रिक लगाने का अनुमान जताया गया है. एग्जिट पोल के मुताबिक, 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 88 से 100 सीटें मिलने का अंदाजा है - और कांग्रेस को 24 से 36 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
असम चुनाव के दौरान कई तरह के विवाद हुए. कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार गौरव गोगोई के खिलाफ तो मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा चुनाव के काफी पहले से ही हमलावर थे, चुनावी माहौल में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दावे से अलग ही बवाल मच गया.
ध्यान देने वाली बात यह थी कि दोनों तरफ से निशाने पर महिलाएं थीं. हिमंता बिस्वा सरमा लगातार गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के पाकिस्तान कनेक्शन होने के दावे के साथ हमला बोलते रहे, तो चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की तरफ से हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा को टार्गेट किया गया.
आरोप प्रत्यारोप के जोरदार दौर के बीच कांग्रेस को अंदरूनी कलह भी भारी पड़ी. कांग्रेस को असम में अपने ही बड़े नेताओं की नाराजगी भी भारी पड़ी. भूपेन बोरा और प्रद्युत बोरदोलोई जैसे कद्दावर नेता कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में चले गए. कांग्रेस के लिए यह काफी महंगा पड़ा.
असली चुनाव नतीजे तो 4 मई को आएंगे, लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों को देखें तो असम चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने वाले नेताओं के लिए कुछ न कुछ मैसेज जरूर है.

हिमंता बिस्वा सरमा
28 मार्च केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुवाहाटी में एक रोड शो के दौरान दावा किया था कि बीजेपी 90 से ज्यादा सीटें जीतकर असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी. एग्जिट पोल तो अमित शाह के दावे को सही साबित करता नजर आ रहा है. सही क्या एग्जिट पोल के मुताबिक तो बीजेपी को करीब तीन-चौथाई सीटें मिलने जा रही हैं.
हिमंता बिस्वा सरमा शुरू से ही अपना स्टैंड साफ रखे हुए थे. महिला वोट बैंक के साथ-साथ मुस्लिम वोटर पर भी उनकी नजर थी. बेशक वो घुसपैठियों का मुद्दा उठाते रहे, और चुनाव बाद एक भी घुसपैठिए को असम में न रहने देने का दावा करते रहे, लेकिन मुस्लिम वोटर को लेकर भी हमेशा सतर्क नजर आए.
हिमंता बिस्वा सरमा की तरफ से बार बार यही समझाने की कोशिश थी कि मुस्लिम समुदाय से उनको कोई दिक्कत नहीं है, वो तो सिर्फ मियां लोगों के खिलाफ हैं. असम में बांग्ला बोलने वाले मुसलमानों को मियां बोला जाता है. जिन लोगों को मियां कहकर संबोधित किया जाता है, उनको ‘अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए’ के तौर पर देखा जाता है.
असम में 10 मार्च को अरुणोदय योजना के तहत 40 लाख परिवारों को 9,000-9,000 रुपये की रकम दी गई. जनवरी, 2026 में ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने घोषणा की थी कि चार महीने की रकम के साथ बोहाग बिहू उत्सव के लिए एक्स्ट्रा रकम भी दी जाएगी - हिमंता बिस्वा सरमा के लिए तो फिलहाल एग्जिट पोल का यही पैगाम है कि वो M-फैक्टर को पकड़े रहें, राजनीति रफ्तार भरती रहेगी.
गौरव गोगोई
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई शुरू चुनाव के काफी पहले से ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के निशाने पर थे. हिमंता बिस्वा सरमा का आरोप रहा है कि गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के पाकिस्तान योजना आयोग के सलाहकार अली तौकीर शेख और आईएसआई से संबंध पाए गए हैं. और, इसी बात को लेकर बीजेपी गौरव गोगोई को लगातार निशाना बनाती रही है.
बेशक, हिमंता बिस्वा सरमा के हमले गौरव गोगोई के लिए परेशान करने वाले रहे होंगे, लेकिन उससे भी बड़ी समस्या उनके लिए कांग्रेस की अंदरूनी कलह रही. प्रद्युत बोरदोलोई और भूपेन बोरा का कांग्रेस छोड़ना, गौरव गोगोई के लिए ऐसी चुनौती थी जिससे वो निबट नहीं सके.
हिमंता बिस्वा सरमा डंके की चोट पर कहते आ रहे थे कि कांग्रेस में एक भी हिंदू नेता को नहीं रहने देंगे, और गौरव गोगोई स्थिति को संभाल नहीं पाए - एग्जिट पोल तो यही बता रहा है कि सरकार बनाने की तैयारी से पहले गौरव गोगोई को कांग्रेस को संभालने का तरीका ढूंढना होगा.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 2021 में भी असम चुनाव में सक्रिय नजर आई थीं. चाय बागानों में महिलाओं से मुलाकात वाली उनकी तस्वीरें सुर्खियां भी बटोर रही थीं. लेकिन, इस बार प्रियंका गांधी को केरल चुनाव की तैयारी कर रही थीं. वायनाड लोकसभा सीट से संसद पहुंचने के बाद प्रियंका गांधी का हक भी बनता था.
लेकिन, प्रियंका गांधी को कांग्रेस आलाकमान ने असम चुनाव देखने के लिए भेज दिया. असम चुनाव के नोडल अफसर की भूमिका में गौरव गोगोई थे, प्रियंका गांधी की भूमिका बड़ी तो थी, लेकिन सीमित थी. प्रियंका गांधी को असम चुनाव के लिए कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख बनाया गया था. स्क्रीन कमेटी की उम्मीदवारों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन उनका नाम केंद्रीय चुनाव समिति करती है.
प्रियंका गांधी की आधिकारिक भूमिका अपनी जगह थी, लेकिन असम में उनके होने के अलग मायने थे. ऐसी भूमिका तो प्रियंका गांधी की 2022 के हिमाचल प्रदेश चुनाव में भी नहीं थीं, लेकिन वहां कांग्रेस की सरकार बन गई - प्रियंका गांधी के लिए असम से जो संदेश मिला है, वो 2022 के यूपी चुनाव जैसा ही है.
पवन खेड़ा
पवन खेड़ा को या तो असम का राजनीतिक मौसम सूट नहीं कर रहा है, या फिर वो किसी न किसी तरह उसकी चपेट में आ जाते हैं. फरवरी, 2023 में असम पुलिस ने पवन खेड़ा को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन कांग्रेस की लीगल टीम के फौरन सक्रिय हो जाने से सुप्रीम कोर्ट से उनको अंतरिम जमानत मिल गई, और वो छूट गए. तब पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की थी, जिसे लेकर असम में एफआईआर दर्ज कराई गई थी.
5 अप्रैल को पवन खेड़ा ने गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं. पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास यूएई, एंटीगुआ और बारबुडा के साथ साथ मिस्र का भी पासपोर्ट है. पवन खेड़ा ने अपने दावे के सपोर्ट में कुछ दस्तावेजों की कॉपी भी दिखाई थी.
उसके बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर असम पुलिस की अपराध शाखा ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कर लिया था. पवन खेड़ा को तेलंगाना कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. गुवाहाटी हाई कोर्ट से भी याचिका खारिज हो जाने के कारण पवन खेड़ा को अब फिर से सुप्रीम कोर्ट का आसरा है.
एग्जिट पोल की मानें तो असम के लोगों का तो पवन खेड़ा के लिए यही संदेश है कि वो दूरी बनाए रखें तो राजनीतिक सेहत भी सही रहेगी.