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ओडिशा में वापस नहीं होंगी गलतियों से भरी स्कूल की किताबें, क्लासरूम में ही सुधार करेंगे टीचर

ओडिशा सरकार ने कक्षा 1 से 8 की त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों को वापस लेने से इनकार कर दिया है. सरकार का कहना है कि शिक्षक कक्षा में ही गलतियां सुधारेंगे, जबकि संशोधित किताबें 2027-28 सत्र से लागू होंगी. वहीं, बीजेडी ने 1,760 गलतियों का दावा करते हुए किताबें तुरंत वापस लेने और नई प्रतियां देने की मांग की है.

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ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने जांच के आदेश दिए हैं (File Photo- ITG)
ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने जांच के आदेश दिए हैं (File Photo- ITG)

ओडिशा सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में गलतियां होने की बात स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि इन किताबों को वापस नहीं लिया जाएगा. सरकार ने कहा कि चूंकि किताबें पहले ही राज्यभर के छात्रों में वितरित की जा चुकी हैं, इसलिए शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय इन गलतियों को सुधारेंगे. संशोधित और त्रुटिरहित किताबें 2027-28 शैक्षणिक सत्र से लागू की जाएंगी.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की निदेशक मधुस्मिता साहू ने बताया कि शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छोटे बच्चों को किताबों में मौजूद गलतियां ठीक कराएं, जबकि बड़ी कक्षाओं के छात्र शिक्षकों की निगरानी में स्वयं त्रुटियों की पहचान कर उन्हें सुधारेंगे. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी गलतियां न हों, इसके लिए SCERT ने आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.

बीजेडी ने की किताबों वापस लेने की मांग

इस बीच विपक्षी बीजेडी ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए त्रुटिपूर्ण किताबों को तत्काल वापस लेने और छात्रों को नई संशोधित पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की है. बीजेडी प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने आरोप लगाया कि गलतियों वाली किताबें छात्रों में भ्रम पैदा करेंगी और उनकी परीक्षा की तैयारी व प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ेगा. उन्होंने दावा किया कि कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में कुल 1,760 त्रुटियां हैं और सरकार इन्हें स्वीकार करने के बावजूद वापस नहीं ले रही है.

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मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा मामले की जांच के आदेश दिए जाने के एक दिन बाद राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है. विकास आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव देओ रंजन कुमार सिंह समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के सचिव बिजय केतन उपाध्याय और सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव स्मिता पाणि इसके सदस्य बनाए गए हैं.

समिति को यह जांचने का जिम्मा दिया गया है कि त्रुटियां किस स्तर पर हुईं, उनकी प्रकृति और संख्या क्या है तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों की पहचान की जाए. समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है.

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