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12 गुना बढ़ेगा EV मार्केट! 2032 तक हर साल बिकेंगे 3.04 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहन, रिपोर्ट

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री साल 2024 के 20 लाख यूनिट से बढ़कर साल 2025 में 26 लाख यूनिट तक पहुंच गई. यानी एक साल में 26 फीसदी की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई. आने वाले सालों में भी EV सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ का अनुमान है.

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EV सेल्स में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बढ़कर 7.7 फीसदी हो गई है. Photo: Freepik
EV सेल्स में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बढ़कर 7.7 फीसदी हो गई है. Photo: Freepik

भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार आने वाले सालों में तेज रफ्तार से बढ़ सकता है. इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (IESA) की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर सरकारी पॉलिसी का सपोर्ट मिलता रहा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ा और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला, तो साल 2032 तक देश में हर साल 3.04 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहन बिक सकते हैं. इतना ही नहीं, कारों की बिक्री में तकरीबन 12 गुना इजाफा देखने को मिल सकता है. इस रिपोर्ट को कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस (CES) ने तैयार किया है. 

EV बिक्री में 26% की बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री साल 2024 के 20 लाख यूनिट से बढ़कर साल 2025 में 26 लाख यूनिट तक पहुंच गई. यानी एक साल में 26 फीसदी की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके साथ ही देश में कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी भी बढ़कर 9.5 फीसदी हो गई, जबकि साल 2024 में यह 8.1 फीसदी थी. इससे साफ है कि भारतीय ग्राहक तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं.

सेगमेंट की बात करें तो साल 2025 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का बाजार पर सबसे ज्यादा दबदबा रहा. कुल EV बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 60.1 फीसदी रही. वहीं इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ने 31.6 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की. यानी इन दोनों सेगमेंट ने मिलकर देश में हुई कुल इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री में 91 फीसदी से ज्यादा योगदान दिया, जिससे साफ है कि फिलहाल भारत की EV क्रांति की सबसे बड़ी ताकत टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट ही हैं.

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इन गाड़ियों का दबदबा 

साल 2025 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सबसे ज्यादा बिकने वाले EV रहे. कुल इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 60.1 फीसदी रही. वहीं इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर यानी तिपहिया का योगदान तकरीबन 31.6 फीसदी रहा. यानी देश में बिके टोटल इलेक्ट्रिक व्हीकल सेल्स में इन दोनों सेगमेंट का शेयर तकरीबन 91 फीसदी से ज्यादा रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल यानी इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बढ़कर 7.7 फीसदी हो गई है. इससे पता चलता है कि अब लोग बैटरी से चलने वाली कारों को भी तेजी से अपनाने लगे हैं. वहीं इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 0.2 फीसदी और इलेक्ट्रिक ट्रकों की हिस्सेदारी 0.4 फीसदी रही. इन दोनों सेगमेंट की बिक्री में सरकारी खरीद और फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन योजनाओं का बड़ा योगदान रहा.

बढ़ेगी बैटरी की मांग

रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती बिक्री के साथ बैटरी की मांग भी तेजी से बढ़ेगी. साल 2025 में जहां बैटरी की कुल मांग 19 GWh रही है, वहीं साल 2032 तक यह बढ़कर 362 GWh तक पहुंच सकती है. इसकी बड़ी वजह EV की बढ़ती संख्या के साथ अलग-अलग सेगमेंट में बड़ी बैटरी पैक का इस्तेमाल होना है.

साल 2025 में कुल बैटरी डिमांड में सबसे बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर का रहा. इनकी हिस्सेदारी 40 फीसदी रही. इसके बाद इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर 27 फीसदी और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर 23 फीसदी हिस्सेदारी के साथ रहे. हालांकि इलेक्ट्रिक बसों की बिक्री सिर्फ 0.2 फीसदी रही, लेकिन बड़े बैटरी पैक की वजह से कुल बैटरी डिमांड में उनका योगदान करीब 7.8 फीसदी रहा. वहीं इलेक्ट्रिक ट्रकों की हिस्सेदारी 1.9 फीसदी रही.

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रिपोर्ट का कहना है कि साल 2029 के बाद भारत के EV बाजार की रफ्तार काफी हद तक सरकार की नीतियों, चार्जिंग नेटवर्क और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर निर्भर करेगी. अगर इन एरिया में लगातार इन्वेस्टमेंट और सपोर्ट मिलता रहा, तो भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अनुमान से भी ज्यादा तेजी से आगे बढ़ सकता है.

लोकल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग चुनौती

फिलहाल EV कंपोनेंट बाजार में सबसे बड़ा हिस्सा बैटरी पैक का है, जिसकी हिस्सेदारी 52 फीसदी है. इसके बाद मोटर 22 फीसदी, इन्वर्टर 12 फीसदी, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) 11 फीसदी और DC-DC कन्वर्टर 3 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सप्लाई चेन में लोकल मैन्युफैक्चरिंग और कंपोनेंट्स के लोकलाइजेशन को लेकर अभी भी कई बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं. अगर इन्हें को दूर किया जाता है, तो भारत की EV इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ सकती है.
 

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