मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों में से दो पर सत्ताधारी बीजेपी की जीत पहले से ही पक्की मानी जा रही है. पार्टी ने इसके लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है. दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए अपनी पूर्व लोकसभा सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार घोषित किया है.
मीनाक्षी का नाम तय होने के बाद कांग्रेस के भीतर विवाद हो रहा है. कांग्रेस के ही कई नेता इस फैसले पर ऐतराज जता रहे हैं. कांग्रेस के बीच की इसी अनबन का बीजेपी फायदा उठाना चाह रही है.
क्या बोले कैलाश विजयवर्गीय और हेमंत खंडेलवाल?
चुनाव से ठीक पहले संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू कर दिया है.
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा, "मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारे दोनों घोषित उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे. लेकिन अगर हमारी पार्टी किसी तीसरे प्रत्याशी का ऐलान करती है, तो हम उसकी जीत भी पक्की करने की कोशिश करेंगे."
जब इस तीसरे संभावित उम्मीदवार को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सस्पेंस बनाए रखते हुए सिर्फ इतना कहा, "फिलहाल सिर्फ दो सीटों के लिए ही उम्मीदवारों का ऐलान किया गया है."
MP विधानसभा का मौजूदा गणित
मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी बेहद मजबूत स्थिति में है:
BJP: 164 सीटें
कांग्रेस: 64 सीटें
भारत आदिवासी पार्टी: 1 सीट
रिक्त : 1 सीट
जीत के लिए जरूरी वोट (प्रति सीट): 58 वोट
बीजेपी का पलड़ा भारी: 49 वोट अभी भी सरप्लस
बीजेपी के पास विधानसभा में 164 से 165 विधायक हैं. अपने दोनों घोषित उम्मीदवारों (तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल) को 58-58 (कुल 116) वोट देने के बाद भी बीजेपी के पास करीब 49 अतिरिक्त (सरप्लस) वोट बच जाएंगे.
अगर बीजेपी रणनीति के तहत आखिरी वक्त तीसरा उम्मीदवार उतार देती है, तो उसे मुकाबला जीतने या रोचक बनाने के लिए महज 10 से 11 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. ये वोट विपक्ष में क्रॉस वोटिंग, वोटिंग से अनुपस्थिति या अमान्य वोटों के जरिए आसानी से जुटाए जा सकते हैं.
कांग्रेस में खलबली क्यों?
कागजों पर कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, जो मीनाक्षी नटराजन को जिताने के लिए जरूरी 58 वोटों से अधिक हैं. लेकिन पार्टी के अंदरूनी हालात ठीक नहीं हैं.
दरअसल, बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर दलबदल और कानूनी कार्यवाही चल रही है, इसलिए उनके वोट को लेकर कांग्रेस आश्वस्त नहीं है.
वहीं, श्योपुर जिले की विजयपुर सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत वोट नहीं डाल सकेंगे.
कांग्रेस के पास जीत के लिए जरूरी आंकड़े (58) से महज 7 वोट अतिरिक्त है. और भाजपा इन्हीं पर आंख गड़ाए बैठी है. अगर 3-4 विधायकों ने भी पाला बदला, यानी क्रॉस वोटिंग की, तो कांग्रेस के हाथ से यह सीट खिसक सकती है.
इसी गणितीय बढ़त के कारण संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एलानिया तौर पर कहा है कि "अगर तीसरा उम्मीदवार आता है, तो उसकी भी जीत पक्की की जाएगी." हालांकि, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अभी तक इस रणनीतिक कदम पर पत्ते नहीं खोले हैं.