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पहले ही दिन सिद्ध बाबा क्षेत्र में दिखी बाघिन! 3 महीने के ब्रेक के बाद खुला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, पर्यटकों का हुआ भव्य स्वागत

Bandhavgarh News: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र पर्यटकों के लिए खुला. पहले दिन दिखी बाघिन. 1 महीने की एडवांस बुकिंग फुल, 5 साल में मिला 76 करोड़ का राजस्व. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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बांधवगढ़ में ताला, मगधी और खितौली गेट सजे.(PHoto:ITG)
बांधवगढ़ में ताला, मगधी और खितौली गेट सजे.(PHoto:ITG)

तीन महीने के मानसून ब्रेक के बाद मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 1 अक्टूबर से नए पर्यटन सत्र की शुरुआत हो गई. इसके साथ ही टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में जंगल सफारी दोबारा शुरू हो गई. पर्यटन सत्र के पहले दिन ताला, मगधी और खितौली गेट को आकर्षक ढंग से सजाया गया. पार्क प्रबंधन और वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने पर्यटकों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया.

गेट खोलने से पहले विधिवत पूजा-अर्चना कर वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटन सत्र के सफल संचालन की कामना की गई. ताला गेट से पार्क में प्रवेश करने वाले पर्यटकों के लिए पहला दिन ही यादगार बन गया. सिद्ध बाबा क्षेत्र के पास पर्यटकों को एक बाघिन के दीदार हुए. बाघिन को अपने प्राकृतिक परिवेश में विचरण करते देख पर्यटक रोमांचित हो उठे. सफारी वाहनों में सवार पर्यटकों ने बाघिन की गतिविधियों को काफी देर तक देखा और इस खास पल को कैमरों में कैद किया. नए पर्यटन सत्र के पहले ही दिन बाघिन के दीदार से पर्यटकों का उत्साह और बढ़ गया.

1 अक्टूबर से 30 जून तक कोर क्षेत्र में सफारी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में पर्यटन 1 अक्टूबर से 30 जून तक संचालित होगा, जबकि बफर क्षेत्र में पर्यटन वर्षभर जारी रहता है. पर्यटकों के स्वागत के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं. निर्धारित समय पर तीनों प्रमुख गेटों से पर्यटकों के प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हुई.

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प्रवेश द्वारों को फूलों और अन्य सजावटी सामग्री से सजाया गया था. पर्यटकों को पार्क के नियमों का पालन करने और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की जानकारी भी दी गई.

पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि नए पर्यटन सत्र से पहले सफारी व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. इस बार पर्यटकों को केवल बाघ दर्शन तक सीमित न रखते हुए जंगल, वन्यजीव, पक्षियों, वनस्पतियों, इतिहास, पर्यावरण और बांधवगढ़ के भौगोलिक महत्व की जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिए प्रसिद्ध होने के साथ अपनी प्राकृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय संस्कृति के लिए भी पर्यटकों को आकर्षित करता है. यहां प्राचीन गुफाएं, मंदिरों के अवशेष और शेषशय्या जैसे ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के अनुभव को और व्यापक बनाते हैं. जंगल सफारी के साथ बाघ, पक्षियों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को देखने का अवसर बांधवगढ़ को विशिष्ट पर्यटन अनुभव प्रदान करता है.

5 सालों में 9.5 लाख पर्यटक और ₹76 करोड़ राजस्व

बांधवगढ़ में देशी के साथ-साथ विदेशी सैलानियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के 5 पर्यटन सत्रों में 9,50,177 पर्यटक (8,34,693 देशी और 1,15,484 विदेशी) बांधवगढ़ पहुंचे, जिससे शासन को ₹76,01,32,188 की कुल आय प्राप्त हुई.

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2021-22: 1 लाख 76 हजार 51 पर्यटक (आय: 12.06 करोड़ रुपये)

2022-23: 1 लाख 85 हजार 825 पर्यटक (आय: 13.89 करोड़ रुपये)

2023-24: 1 लाख 78 हजार 926 पर्यटक (आय: 14.15 करोड़ रुपये)

2024-25: 1 लाख 96 हजार 889 पर्यटक (आय: 16.38 करोड़ रुपये)

2025-26: 2 लाख 12 हजार 486 पर्यटक (आय: 19.50 करोड़ रुपये)

लगभग एक माह की ऑनलाइन बुकिंग

क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि नए पर्यटन सत्र के शुरू होने से पहले ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की लगभग एक माह की ऑनलाइन टिकट बुकिंग हो चुकी है. इससे पर्यटकों में बांधवगढ़ को लेकर उत्साह और रुचि का पता चलता है.

सफारी वाहनों के निर्धारित मानकों के पालन पर विशेष सख्ती बरती जा रही है. सभी पर्यटक जिप्सियों की जांच और पंजीयन किया जा रहा है. वाहनों के दस्तावेज, तकनीकी स्थिति और निर्धारित मानकों के अनुरूप पंजीयन सुनिश्चित किया जा रहा है.

195 गाइडों को प्रशिक्षण, 105 को अंग्रेजी की ट्रेनिंग

पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए करीब 195 गाइडों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. ‘जंगल की पाठशाला’ के तहत गाइडों को वन्यजीवों के पदचिह्न, उनकी गतिविधियों, पक्षियों की पहचान, जंगल की वनस्पतियों और बांधवगढ़ के इतिहास से संबंधित जानकारी दी जा रही है.

इसके साथ ही 105 गाइडों को अंग्रेजी भाषा और बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी सरल, रोचक और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जा सके.

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हाथियों की मौजूदगी के बावजूद जारी रहेगी सफारी

क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि सफारी के लिए सभी तैयारियां पूरी हैं. जंगली हाथियों की आवाजाही के बावजूद सफारी जारी रहेगी. पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाइड और वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया गया है. नए पर्यटन सत्र में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है.

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