मध्य प्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब की अंतरराज्यीय तस्करी रोकने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने शराब तस्करी गिरोह के कथित सरगना समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक फैला हुआ था.
पुलिस के मुताबिक घटना में इस्तेमाल आयशर वाहन का चालक गजेन्द्र उर्फ अक्कु रावत है, जो अलीराजपुर जिले का रहने वाला है. उसे केरम सिंह चंगोड़ ने वाहन उपलब्ध कराया था. पुलिस ने केरम सिंह को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.
जांच में पता चला है कि अवैध शराब हरदा जिले के टिमरनी से लाई जा रही थी और उसे गुजरात पहुंचाया जाना था. शराब ठेकेदार पाटेन्द्र जायसवाल के नाम पर है. इस कारोबार में राहुल जायसवाल, मनीष जायसवाल और मोहिन जायसवाल की 30-30 फीसदी हिस्सेदारी बताई गई है, जबकि पाटेन्द्र जायसवाल की हिस्सेदारी 10 फीसदी थी.
राहुल जायसवाल के हाथ में था तस्करी नेटवर्क का संचालन
पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में राहुल जायसवाल की मुख्य भूमिका थी. वह हरदा जिले के टिमरनी का निवासी है और उसके खिलाफ हरदा में अलग-अलग धाराओं में आपराधिक मामले भी दर्ज हैं. आरोप है कि राहुल तीन शराब दुकानों से अवैध शराब की सप्लाई का नेटवर्क संचालित करता था. मनीष इंदौर और मोहिन गुजरात में रहता है, जबकि पाटेन्द्र बड़वानी जिले का निवासी है.
पुलिस ने राहुल जायसवाल को भी हिरासत में लिया है. जांच में सामने आया है कि अवैध शराब के कारोबार से मिलने वाली पूरी रकम पहले राहुल के पास जमा होती थी. इसके बाद वह गिरोह के अन्य सदस्यों को उनके हिस्से का पैसा देता था.
इस मामले में इंदौर निवासी विजय राव को भी पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है. उसने राहुल जायसवाल के लिए शराब तस्करी नेटवर्क में काम करने की बात स्वीकार की है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क, उसकी सप्लाई चेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है.