बड़वानी पुलिस ने हवालात को सुधार की एक अनोखी पाठशाला में बदल दिया है. यहां दीवारों पर चित्रों के जरिए क्रूर डाकू अंगुलिमाल के हृदय परिवर्तन से लेकर रत्नाकर के महर्षि वाल्मीकि बनने तक की कहानियों को उकेरा गया है. ये चित्र और संदेश गिरफ्तार व्यक्तियों को यह सोचने का मौका देते हैं कि गलती जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत भी हो सकती है.
खास बात यह है कि बड़वानी पुलिस का यह बदलाव सिर्फ हवालात तक सीमित नहीं है. थाने में आने वाली महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड, शिशुओं को स्तनपान कराने के लिए विशेष कक्ष, छोटे बच्चों के लिए कॉमिक्स बुक्स और फरियादियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. पारदर्शिता के लिए जब्त की गई चीजों और वाहनों पर क्यूआर (QR) कोड लगाए गए हैं, ताकि लोग आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें. थाने की सजावट इस तरह की गई है कि यह किसी होटल या मॉल का हिस्सा प्रतीत होता है.
दरअसल, 'थाना' शब्द सुनते ही अमूमन जेहन में सख्ती, पूछताछ, हवालात और फाइलों के ढेर की तस्वीर उभरती है. लेकिन बड़वानी पुलिस ने थाने की इसी पारंपरिक छवि को बदलने की कोशिश की है. जिले के पांच थानों बड़वानी, राजपुर, सेंधवा शहर, सेंधवा ग्रामीण और पानसेमल में पुलिसिंग के साथ-साथ अब इंसानियत, सकारात्मक सोच और सुव्यवस्थित व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी गई है. बड़वानी थाने की हवालात की दीवारें अब महज बंद दरवाजे नहीं, बल्कि बदलाव की गाथाएँ सुना रही हैं.
बड़वानी एसपी पद्म विलोचन शुक्ल ने थानों को सिर्फ अपराध पर कार्रवाई करने का केंद्र न मानकर, सकारात्मक माहौल वाले सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल की है. हवालात के अंदर लिखे गए प्रेरणादायक संदेश गिरफ्तार व्यक्ति को अपने किए पर आत्मचिंतन करने और अपराध का रास्ता छोड़कर बेहतर जीवन की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हैं.
इन संदेशों के पीछे एक बहुत ही खास सोच है. बड़वानी थाने की हवालात में संदेश और प्रसंग अंकित करने से पहले रिटायर्ड जजों और IPS अधिकारियों से परामर्श लिया गया, ताकि ऐसे प्रसंग चुने जा सकें जो वास्तव में व्यक्ति को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करें. देखें VIDEO:-
इसी सोच के तहत दीवारों पर महात्मा बुद्ध और क्रूर डाकू अंगुलिमाल के हृदय परिवर्तन की कहानी को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है एक तरफ हिंसा की पहचान बना अंगुलिमाल और दूसरी तरफ बुद्ध की सीख से बदला हुआ उसका जीवन. ठीक इसी तरह रत्नाकर के महर्षि वाल्मीकि बनने की कथा को भी चित्रात्मक रूप दिया गया है.
इसके पीछे का संदेश बेहद साफ है कि इंसान चाहे कितना भी गलत रास्ते पर चला जाए, बदलाव की संभावना हमेशा बनी रहती है. पुलिस का प्रयास है कि हवालात में बंद व्यक्ति इन कहानियों और संदेशों को देखकर विचार करे और शायद अपने जीवन की दिशा बदलने का निर्णय ले.
हालांकि, यह बदलाव सिर्फ हवालात की दीवारों तक सीमित नहीं है. थाने में शिकायत लेकर आने वाले परिवारों और उनके साथ आने वाले बच्चों का भी विशेष ध्यान रखा गया है. बच्चों के लिए कॉमिक्स बुक्स की व्यवस्था की गई है, ताकि पुलिस थाने का माहौल उनके लिए भयभीत करने वाला न होकर सहज बने. फरियादियों के बैठने के लिए सुव्यवस्थित स्थान निर्मित किया गया है और रिकॉर्ड्स को भी बेहतर ढंग से व्यवस्थित किया गया है.
फाइलों के ढेरों को बॉक्स में व्यवस्थित करके उन पर पहचान संबंधी विवरण अंकित किए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड आसानी से खोजा जा सके।
पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से एक और अनूठी पहल की गई है. थाने में खड़े जब्त वाहनों पर QR कोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन करके वाहन की जब्ती से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
इसके अलावा, महिला फरियादियों के लिए महिला डेस्क पर सेनेटरी पैड की व्यवस्था की गई है और छोटे बच्चों के साथ आने वाली माताओं के लिए स्तनपान के लिए एक अलग स्थान निर्मित किया गया है.
मतलब अब थानों में सिर्फ अपराध, आरोपी और कानूनी कार्रवाई ही नजर नहीं आती, बल्कि फरियादी की जरूरत, सम्मान और सुविधा भी आधुनिक पुलिसिंग का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है. थानों की सजावट ऐसी की गई है कि वे किसी होटल या मॉल की तरह दिखाई देते हैं.
एसपी पद्म विलोचन शुक्ल के अनुसार, इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य थानों में एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना और पुलिस की जन-छवि को और अधिक बेहतर बनाना है.