scorecardresearch
 

महाकाल मंदिर में 300 गार्डों ने एक साथ कूद-कूदकर किया ब्रिज की मजबूती का 'जंप टेस्ट', VIDEO 

उज्जैन के महाकाल मंदिर में नागपंचमी से पहले भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बने 91 फीट लंबे फुट ओवरब्रिज की मजबूती का अनोखा टेस्ट किया गया. करीब 300 सुरक्षा गार्डों ने एक साथ पुल पर 10 मिनट तक कूदकर इसकी क्षमता परखी. मंदिर समिति का कहना है कि ऐसा परीक्षण हर साल सुरक्षा व्यवस्था के तहत किया जाता है. हालांकि वीडियो सामने आने के बाद इस तरीके की वैज्ञानिकता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

Advertisement
X
पुल की मजबूती जांचने के लिए 300 सुरक्षा गार्डों को एक साथ कूदवाया गया (Photo ITG)
पुल की मजबूती जांचने के लिए 300 सुरक्षा गार्डों को एक साथ कूदवाया गया (Photo ITG)

विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए किए गए एक परीक्षण का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. मंदिर परिसर में भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बनाए गए लोहे के फुट ओवरब्रिज की मजबूती जांचने के लिए करीब 300 सुरक्षा गार्डों को एक साथ पुल पर कूदने के लिए कहा गया. मंदिर प्रशासन की ओर से इसे 'जंप टेस्ट' बताया गया. परीक्षण का उद्देश्य पुल पर भारी दबाव की स्थिति में उसकी मजबूती को परखना बताया जा रहा है, लेकिन आधुनिक दौर में ब्रिज की सुरक्षा जांच के इस तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

नागपंचमी के दौरान महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसी वजह से मंदिर प्रशासन हर साल पर्व से पहले सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करता है. इसी प्रक्रिया के तहत फुट ओवरब्रिज की क्षमता और मजबूती को लेकर परीक्षण किया जाता है. बताया जा रहा है कि ब्रिज की मजबूती जांचने के लिए करीब 300 सुरक्षा गार्डों को एक साथ पुल पर भेजा गया. इसके बाद उन्हें करीब 10 मिनट तक पुल पर कूदने के लिए कहा गया.

मंदिर प्रशासन की ओर से इस प्रक्रिया को 'जंप टेस्ट' नाम दिया गया है. इस परीक्षण के पीछे उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि नागपंचमी के दौरान जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु फुट ओवरब्रिज से गुजरेंगे, तब पुल पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार और कंपन जैसी परिस्थितियों का अंदाजा लगाया जा सके. हालांकि, इसी तरीके को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि क्या पुल की संरचनात्मक मजबूती जांचने के लिए इस तरह के परीक्षण के बजाय आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और वैज्ञानिक उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

Advertisement

पहली बार नहीं हुआ ऐसा परीक्षण

महाकाल मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों के अनुसार, यह कोई पहली बार नहीं है जब नागपंचमी से पहले इस तरह का परीक्षण किया गया हो. पिछले कुछ वर्षों से मंदिर समिति द्वारा पुल की क्षमता को परखने के लिए इसी तरह का परीक्षण कराया जाता रहा है. दरअसल, यह फुट ओवरब्रिज सालभर आम श्रद्धालुओं के नियमित आवागमन के लिए इस्तेमाल नहीं होता. इसका प्रमुख उपयोग नागपंचमी के अवसर पर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए आने वाली भारी भीड़ को व्यवस्थित तरीके से निकालने के लिए किया जाता है. साल के बाकी दिनों में पुल पर श्रद्धालुओं की सामान्य आवाजाही नहीं होने के कारण नागपंचमी से पहले इसकी विशेष जांच की जाती है.

91 फीट लंबा है फुट ओवरब्रिज

महाकाल मंदिर परिसर में स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना बताया जाता है. मंदिर में प्रवेश के लिए पहले श्रद्धालुओं के लिए अंदर से ही रास्ता उपलब्ध था. करीब 25 साल पहले तक इसी रास्ते से श्रद्धालुओं को भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए ले जाया जाता था. समय के साथ महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी. विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी, जिसके बाद दर्शन व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए वैकल्पिक मार्ग की जरूरत महसूस हुई. इसी के तहत मंदिर परिसर में करीब 91 फीट लंबा फुट ओवरब्रिज बनाया गया. इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाना और भीड़ को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाना है.

Advertisement

नागपंचमी पर उमड़ती है भारी भीड़

भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं. यही वजह है कि इस दिन महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. नागपंचमी के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं. ऐसे में दर्शन व्यवस्था के दौरान भीड़ का दबाव काफी अधिक रहता है. श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से मंदिर तक पहुंचाने और वापस निकालने के लिए प्रशासन को विशेष इंतजाम करने पड़ते हैं. फुट ओवरब्रिज इसी विशेष व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिए मंदिर प्रशासन की ओर से हर साल नागपंचमी से पहले इसकी मजबूती और सुरक्षा को लेकर परीक्षण कराया जाता है.

वैज्ञानिक तरीके से जांच पर उठे सवाल

विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि आधुनिक इंजीनियरिंग के दौर में किसी पुल की मजबूती जांचने के लिए कौन सी प्रक्रिया सबसे उपयुक्त है. सवाल उठ रहा है कि क्या सिर्फ लोगों को पुल पर कूदाकर उसकी संरचनात्मक क्षमता का भरोसेमंद आकलन किया जा सकता है या इसके लिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और इंजीनियरिंग परीक्षणों की आवश्यकता है. लोगों का एक वर्ग यह भी सवाल उठा रहा है कि अगर इस तरह के परीक्षण के दौरान कोई दुर्घटना हो जाती तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती. खासकर तब, जब एक साथ सैकड़ों सुरक्षा गार्ड पुल पर मौजूद हों. 

Advertisement

सद्दाम ओवैसी ने भी उठाए सवाल

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता सद्दाम ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस परीक्षण पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सवाल किया कि यदि इस तरह के परीक्षण के दौरान कोई दुर्घटना हो जाती या पुल टूट जाता तो उसमें घायल होने या जान गंवाने वाले सुरक्षा गार्डों की जिम्मेदारी किसकी होती. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मौजूदा दौर में पुल की मजबूती जांचने के लिए वैज्ञानिक संसाधन और उचित प्रशासनिक प्रक्रियाएं उपलब्ध नहीं हैं. उनके पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ लोगों ने इसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी परीक्षण बताया, जबकि कुछ ने परीक्षण के तरीके पर सवाल उठाए. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement