पहले की पीढ़ियां अपने रिश्ते को लेकर जितना प्राइवेट और शांत थी अब के जेन जी रिलेशनशिप पर उतना ही खुलकर और बिना किसी झिझक बात कर रहे है. अपने डेटिंग लाइफ पर जेन जी का अंदाज़ थोड़ा अलग है. ऐसे में डेटिंग ऐप से जेन जी का रिश्ता थोड़ा पुराना है. एक ऐप पर अपना पार्टनर चुनने का रिस्क शायद जेन जी सबसे ज्यादा ले सकता है. बम्बल, टिंडर जैसे ऐप्स इस पीढ़ी के लिए बहुत भरोसेमंद साबित हो रहे है.
लेकिन कुछ लोग ऐसे है जिन्हें शायद एक पार्टनर की जरूरत नहीं है, या तो वो किसी ब्रेकअप से उबर रहे हैं, या अपने करियर में बहुत बिजी है या किसी को कमिटमेंट देने से बचते है. ऐसे में जब वो बोर होते है तो अपनी बोरियत दूर करने के लिए या यूं कहें टाइमपास करने के लिए डेटिंग ऐप्स पर ID बनाकर एक पार्टनर की तलाश करने लगते है. यहीं आता है 'डोपामिन डेटिंग' .
डोपामिन डेटिंग क्या है?
डोपामिन डेटिंग (Dopamine Dating) का मतलब है जब कोई व्यक्ति किसी गंभीर रिश्ते या कनेक्शन की तलाश में नहीं, बल्कि सिर्फ टाइमपास करने, बोरियत दूर करने या तुरंत तारीफ पाने के लिए डेटिंग ऐप्स (जैसे टिंडर, बम्बल) का इस्तेमाल करता है. जब ऐप पर कोई मैच या मैसेज आता है, तो दिमाग में 'डोपामिन' (फील-गुड हार्मोन) रिलीज होता है, जिससे कुछ देर के लिए अच्छा महसूस होता है.
लेकिन क्या सिर्फ बोर होकर डेटिंग ऐप पर पार्टनर चुनना एक अच्छा संकेत है?
सिर्फ टाइमपास के लिए डेटिंग ऐप्स चलाना ऐसा लगता हो कि हम कुछ वक्त के लिए टाइमपास ही तो कर रहे है लेकिन इसके बहुत गंभीर नुकसान हो सकते है.
मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर (Mental Exhaustion)
स्वाभिमान (Self-esteem) का गिरना: जब आप दूसरों के 'राइट स्वाइप' या तारीफ पर निर्भर हो जाते हैं, तो मैच न मिलने पर आप खुद को कमतर आंकने लगते हैं और हमारे मन में तरह-तरह के सवाल उठते है. हम सेल्फ डाउट करने लगते है और इसे हमारे मेंटल हेल्थ पर बहुत प्रभाव पड़ता है.
'घोस्टिंग' और रिजेक्शन की आदत
असंवेदनशील बनना: जब हम सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए बात करते हैं, तो सामने वाले की फीलिंग्स की परवाह किए बिना अचानक बातचीत बंद (Ghosting) कर देते हैं. और धीरे-धीरे ये असंवेदनशीलता हमारे अंदर बढ़ती जाती है जहां हमें किसी को इग्नोर करने या उसकी भावनाओं को रिजेक्ट करने से फर्क नहीं पड़ता.
डोपामिन डेटिंग के शिकार से कैसे बचें?
ऐप यूज करने का टाइम तय करें: अगर आप इनका इस्तेमाल कर रहे हैं, तो डेटिंग ऐप्स पर बिताए जाने वाले टाइम की एक लिमिट (जैसे 15-20 मिनट) फिक्स करें.
बोरियत मिटाने के दूसरे ऑपशन्स ढूंढें: जब बोर हों, तो ऐप खोलने के बजाय कोई बुक पढ़ें, वॉक पर जाएं, नई हॉबी सीखें या दोस्तों से बात करें.
अपने इरादे साफ रखें: ऐप खोलने से पहले खुद से पूछें कि आप वहां क्यों जा रहे हैं-एंटरटेनमेंट के लिए या असल कनेक्शन के लिए?