पानी पुरी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. इसे कोई गोलगप्पा कहता है, कोई पुचका तो कोई पानी के बताशे. भारत के हर कोने में इसे बड़े चाव से खाया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पानी पुरी के अंदर आलू, छोले या मटर की फिलिंग ही क्यों भरी जाती है? ज्यादातर लोग मानते हैं कि ऐसा सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है. लेकिन एक्सपर्ट्स और फूड साइंस की मानें तो इसके पीछे स्वाद से कहीं बढ़कर एक बड़ा और दिलचस्प वैज्ञानिक कारण छिपा है. यदि आप भी उन लोगों में से हैं जो इस बारे में नहीं जानते तो ये स्टोरी आपके लिए है.
पुरी और तीखे पानी को बैलेंस करने का साइंस
पानी पुरी का कॉम्बिनेशन बहुत कमाल का होता है. इसकी पुरी फ्राइड और क्रिस्पी होती है जबकि इसका पानी काफी तीखा, खट्टा और लिक्विड होता है. यदि आप खाली पुरी में सीधे तीखा पानी भरकर खाएंगे, तो पानी तुरंत मुंह में फैल जाएगा और आपको सिर्फ मिर्च का झटका लगेगा. इसके अलावा खाली पूरी बहुत जल्दी गलकर टूट जाएगी. पुरी का स्ट्रक्चर खोखला होता है जो सभी फ्लेवर्स को अपने अंदर रोकने का काम करता है. उबले हुए आलू और छोले इस तीखे पानी को सोख लेते हैं और उसे पानी पुरी से बाहर बहने नहीं देते.
डाइजेशन और पेट के लिए जरूरी
पानी पुरी के पानी में जलजीरा, काला नमक, पुदीना और इमली जैसी चीजों का इस्तेमाल होता है. यह पानी काफी एसिडिक और मसालेदार होता है. खाली पेट इतना तीखा पानी पीने से पेट में जलन या एसिडिटी हो सकती है. पानी पुरी का पानी बैलेंस करने के लिए बेस की जरूरत होती है. आलू में मौजूद स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट पेट में एक कोटिंग बना देते हैं जो मसालेदार पानी के सीधे असर को कम करती है.
बॉडी को मिलती है इंस्टेंट एनर्जी
सिर्फ स्वाद ही नहीं, न्यूट्रिशन के लिहाज से भी आलू और छोले का मिक्सचर बहुत फायदेमंद है. हेल्दीफाईमी के मुताबिक, पानी पुरी में आलू और छोले जैसी अलग-अलग फिलिंग्स का इस्तेमाल किया जाता है. आलू से शरीर को तुरंत काम करने के लिए जरूरी कार्बोहाइड्रेट्स यानी एनर्जी मिलती है. वहीं जब इसमें काले छोले या सफेद मटर (रागड़ा) मिलाए जाते हैं, तो इससे थोड़ी बहुत मात्रा में ही सही लेकिन प्रोटीन और फाइबर भी मिल जाता है.