जन्माष्टमी पर बालगोपाल के अभिषेक और प्रसाद के लिए पंचामृत का विशेष महत्व होता है. इसे कई लोग चरणामृत भी कहते हैं. शास्त्रों के अनुसार, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (या गंगाजल/मखाने) के मेल से बनने वाला पंचामृत पांच पवित्र चीजों से मिलकर बनता है जो धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है. इतना ही नहीं यह इतना टेस्टी होता है कि हर किसी को ये खूब पसंद आता है.
लेकिन अक्सर शिकायत आती है कि पंचामृत बनाते ही दूध फट जाता है या फिर दही की वजह से स्वाद बहुत खट्टा हो जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इसका कारण सामग्री का सही अनुपात न होना है. आइए जानते हैं पंचामृत बनाने की वह सही और पारंपरिक विधि, जिससे आपका पंचामृत न फटेगा और न ही खट्टा होगा, बल्कि इसका स्वाद बिल्कुल अमृत जैसा बनेगा.
आवश्यक सामग्री
कच्चा दूध: 1 कप (ठंडा या सामान्य तापमान पर)
ताजा दही: 2 से 3 बड़े चम्मच (दही खट्टा नहीं होना चाहिए)
देशी घी: 1/2 छोटा चम्मच (दही से कम)
शहद: 1 छोटा चम्मच
बूरा या शक्कर/मिश्री का पाउडर: 1 से 2 बड़े चम्मच
तुलसी के पत्ते, गंगाजल, बारीक कटे मखाने और चिरौंजी.
बनाने की पूरी विधि:
पंचामृत बनाने के लिए चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन का इस्तेमाल सबसे शुभ माना जाता है. अगर ये नहीं हो तो कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें.
बर्तन में 1 कप कच्चा दूध लें और उसमें बूरा या पसी हुई मिश्री डालकर अच्छी तरह मिला लें.
अब इसमें आधा चम्मच देसी घी और 1 चम्मच शहद डालकर मिक्स करें.
अब ताजे दही को हल्का सा फेंट लें और दूध के मिश्रण में धीरे-धीरे मिलाते हुए चलाएं.
अंत में इसमें 4-5 स्वच्छ तुलसी के पत्ते, थोड़ा सा गंगाजल और बारीक कटे मखाने और चिरौंजी डालें.
आपका शुद्ध, स्वादिष्ट और परफेक्ट पंचामृत प्रसाद बनकर तैयार है.
पंचामृत न फटने और सही बनने के सीक्रेट टिप्स:
कभी भी गर्म या गुनगुने दूध में दही या शहद न मिलाएं. गर्म दूध में दही मिलाने से पंचामृत तुरंत फट जाता है.
पंचामृत के लिए ताजा और मीठा दही ही इस्तेमाल करें. खट्टा दही पूरे प्रसाद का स्वाद बिगाड़ देता है.
हमेशा दूध में पहले शक्कर/मिश्री घोलें. फिर घी और शहद मिलाएं और सबसे अंत में फेंटा हुआ दही मिलाएं.