4 मार्च को होली खेली जाएगी और इसके लिए लोगों ने पहले से ही कलर और गुलाल लाकर रख लिए हैं. होली के दिन एक सबसे बड़ी समस्या जो होती है वो है कि कई बार कलर लोगों की आंखों में चला जाता है. ऐसे में ये सिंथेटिक या केमिकल वाले कलर कई मामलों में मेडिकल इमरजेंसी की हालत तक पैदा कर सकते हैं. कई रिपोर्ट दावा करती हैं कि आजकल रंगों में लेड ऑक्साइड, मरकरी सल्फाइट और यहां तक कि कुचला हुआ कांच जैसे केमिकल भी होते हैं जो यदि कलर-गुलाल के साथ आंख में चले जाएं तो जलन, कॉर्नियल खरोंच या गंभीर एलर्जी हो सकती है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि यदि गलती से भी कलर आपकी आंख में चला जाए तो क्या करें.
सबसे पहले करें ये काम
जैसे ही रंग आपकी आंख में चला जाए तो सबसे पहले तुरंत भीड़ से दूर हो जाएं और आंख को रगड़ने से बचें क्योंकि रगड़ने से छोटे कण कंजंक्टिवा में और अंदर चले जाते हैं और कॉर्निया को खरोंच ला सकते हैं. रगड़ने की जगह आप साफ बहते पानी से आंख धोएं या फिर मिनरल वॉटर की बोतल से आंख को धीरे से साफ करें.
किन चीजों से बचें?
यदि आंख में कलर चला जाए तो लोग जलन को गुलाब जल, दूध या ओवर-द-काउंटर लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स से कम करने की कोशिश करते हैं. लेकिन डॉक्टर्स शुरुआत में पानी में आंख धोने के अलावा कुछ करने की सलाह नहीं देते.
गुलाब जल या दूसरे लिक्विड में प्रिजर्वेटिव या कंटैमिनेंट्स हो सकते हैं जो होली के रंग में मौजूद केमिकल्स के साथ रिएक्ट कर सकते हैं और इस स्थिति को और भी गंभीर बना सकते हैं. इसलिए पानी के अलावा कुछ भी इस्तेमाल न करें.
ये संकेत खतरे की घंटी
आंख ऐसे में थोड़ी लाल हो सकती है और उसमें से पानी भी आ सकता है लेकिन यदि आपको अचानक धुंधला दिखाई दे, बहुत अधिक दर्द हो जो धोने के बाद भी कम न हो, या ऐसा महसूस हो कि आंख में कोई बाहरी चीज फंस गई है तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें. ऐसा होना पलकों में सूजन या आंख पूरी तरह से न खुल पाना भी गहरी केमिकल चोट के संकेत हैं.
आंखों की सेफ्टी के लिए क्या करें?
होली पर आंख में गुलाल या कलर जाने से बचाने के लिए आंखों के चारों ओर नारियल तेल या कोल्ड क्रीम की एक मोटी परत लगाना एक बैरियर का काम कर सकता है, जिससे पाउडर का स्किन पर चिपकना और आंखों में जाना मुश्किल हो जाता है. सनग्लासेस या क्लियर प्रोटेक्टिव आईवियर पहनने की बहुत सलाह दी जाती है, खासकर जब बड़े ग्रुप में खेल रहे हों जहां रंग बिना सोचे-समझे फेंके जाते हैं.
हमेशा ऑर्गेनिक रंग से होली खेलना भी एक सुरक्षित ऑप्शन है, क्योंकि इनमें सस्ते, इंडस्ट्रियल-ग्रेड पाउडर में पाए जाने वाले हेवी मेटल्स नहीं होते हैं.