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Momos Red Chutney: मोमोज की तीखी लाल चटनी के दीवाने हैं? कानपुर में नष्ट की गई 115 किलो चटनी; जानें क्यों बनी सेहत के लिए खतरा

Momos Red Chutney: कानपुर में 115 किलो मोमो की लाल चटनी नष्ट की गई है. उसे जांच के दौरान खानेलायक नहीं पाया गया. इसके बाद मोमो वाली लाल चटनी खाने के लिए कितनी सुरक्षित है इस पर सवाल उठने लगे हैं. आज हम आपको बताएंगे कि जिस चटनी को आप बहुत ही चाव से खाते हैं उसमें ऐसी क्या चीजें मिलाई जाती हैं, जो आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं.

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मोमज की तीखी लाल चटनी में आर्टिफिशियल कलर्स मिलाए जाते हैं. (Photo: ITG)
मोमज की तीखी लाल चटनी में आर्टिफिशियल कलर्स मिलाए जाते हैं. (Photo: ITG)

'चलो वो ठेले वाले भइया के मोमोज खाते हैं. इनकी तीखी लाल चटनी इतनी जबरदस्त होती है ना कि बस मजा आ जाता है.' ऐसा कुछ आप आजकल हर दूसरे व्यक्ति के मुंह से सुन सकते हैं. मोमोज खाना लगभग हर किसी को पसंद है और अगर मोमोज किसी ठेले पर बिकते हों तो बच्चों से लेकर बड़े तक उन्हें और चाव से खाते हैं. मोमोज के साथ मिलने वाली तीखी लाल चटनी इनके स्वाद को दोगुना कर देती है और इसके लोग बहुत ही चटकारे लेकर खाते हैं. क्या भी उन्हीं लोगों में शामिल हैं, जो मोमो की तीखी लाल चटनी के फैन हैं? अगर हां, तो आपके लिए एक खबर है जिसमें सुनकर आपको शॉक लग सकता है.

दरअसल, उत्तर प्रदेश के कानपुर में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई के दौरान मोमो के साथ परोसी जाने वाली करीब 115 किलो लाल चटनी को नष्ट किया गया है. जांच में चटनी को खाने योग्य नहीं पाया गया, जिसके बाद ये सवाल फिर चर्चा में आ गया कि आखिर मोमो की लाल चटनी में ऐसा क्या हो सकता है, जो सेहत के लिए खतरा बन जाती है? आइए जानते हैं कि किन वजहों से मोमो की लाल चटनी आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

1. आर्टिफिशियल कलर: मोमो की चटनी देखने में बिल्कुल चमकदार लाल रंग की होती है. लोग मानते हैं कि ये लाल मिर्च और टमाटर से बनती है इसलिए लाल रंग की होती है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये लाल चटनी हमेशा इनसे नहीं बनती है. कई जगह इसे चमकदार कलर देने के लिए सिंथेटिक फूड कलर्स का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ आर्टिफिशियल कलर्स लोगों में एलर्जी, स्किन पर रिएक्शन और बच्चों में हेल्थ समस्याओं का कारण बन सकते हैं.

2. स्वाद बढ़ाने वाला MSG: कई कमर्शियल मोमो चटनियों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) मिलाया जाता है, जिससे चटनी का स्वाद और ज्यादा बढ़ जाता है. हालांकि, कुछ लोगों को MSG की ज्यादा मात्रा होने की वजह से सिरदर्द, मतली, बेचैनी या धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. 

3. प्रिजर्वेटिव्स का ज्यादा इस्तेमाल: मोमो की चटनी को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए कई तरह के प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं. इसमें सोडियम बेंजोएट और पोटैशियम सोर्बेट जैसे प्रिजर्वेटिव्स को मिलाया जाता है. सीमित मात्रा में इनका इस्तेमाल सही रह सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा या बार-बार सेवन से कुछ लोगों में एलर्जी और पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं.

4. बहुत ज्यादा लाल मिर्च: लाल चटनी में कैप्साइसिन की मात्रा अधिक हो सकती है. जरूरत से ज्यादा तीखी चटनी खाने से पेट में जलन, एसिडिटी, गैस, दस्त और पेट दर्द की समस्या हो सकती हैं. जिन लोगों को पहले से अल्सर या IBS जैसी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.

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5. बासी या खराब इंग्रेडिएंट्स: अगर चटनी में पुराने टमाटर, लहसुन, मिर्च या बाकी खराब हो चुके इंग्रेडिएंट्स का इस्तेमाल किया जाए तो इसमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं. इससे फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त का खतरा बढ़ जाता है.

6. जरूरत से ज्यादा नमक और घटिया तेल: चटनी का स्वाद बढ़ाने और लागत कम करने के लिए कुछ जगहों पर इसमें ज्यादा नमक और कम गुणवत्ता वाले रिफाइंड या हाइड्रोजेनेटेड तेल का इस्तेमाल किया जाता है. अगर ऐसी चीजों को बार-बार खाया जाए तो ये हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और सूजन जैसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं.

7. गाढ़ापन बढ़ाने वाले केमिकल्स: कुछ पैकेज्ड या कमर्शियल चटनियों में जैंथन गम, कैरेजीनन और बाकी स्टेबलाइजर्स मिलाए जाते हैं ताकि चटनी का स्वाद लंबे समय तक एक जैसा बना रहे. सेंसिटिवल लोगों में ये पेट फूलने या पाचन संबंधी परेशानी का कारण बन सकते हैं.

8. खराब हाइजीन: स्ट्रीट फूड स्टॉल्स पर अक्सर चटनी ज्यादा मात्रा में बनाकर घंटों खुली रखी जाती हैं. गर्मी, धूल, मक्खियां और बार-बार इस्तेमाल होने वाले बर्तनों की वजह से इसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं. ये वजह है जिनकी वजह से इसे खाने से फूड पॉइजनिंग और पेट के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

  • जिन लोगों को एसिडिटी या गैस की समस्या होती है.
  • जिन लोगों को पेट का अल्सर है.
  • IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) से पीड़ित लोग.
  • जिन लोगों को बवासीर है.
  • छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग.
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