वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी करने के मामले में गिरफ्तार 14 आरोपियों को सोमवार को कोर्ट से राहत नहीं मिली. अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी. जानकारी के अनुसार, एक सप्ताह पहले इन 14 लोगों को उस समय गिरफ्तार किया गया था जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था. इस वीडियो में आरोप है कि सभी लोग गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी कर रहे थे और चिकन बिरयानी खा रहे थे.
मामले में आरोपियों पर धार्मिक स्थल को अपवित्र करने, धार्मिक भावनाएं आहत करने, सार्वजनिक उपद्रव फैलाने और जल प्रदूषण करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. बाद में पुलिस ने नाव को जबरन कब्जे में लेने का आरोप भी जोड़ा. शिकायतकर्ता और बीजेपी युवा मोर्चा के शहर इकाई प्रमुख रजत जायसवाल के वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने यह जानकारी दी.
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार यादव ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोप गंभीर और गैर जमानती हैं, इसलिए इस समय जमानत देने के पर्याप्त आधार नहीं हैं. अभियोजन पक्ष ने भी जमानत का विरोध किया और कहा कि आरोपियों द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है और इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है. साथ ही यह भी दलील दी गई कि अगर आरोपियों को जमानत दी जाती है तो इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
14 आरोपियों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के गंभीर आरोप
इस मामले में शिकायत उसी दिन दर्ज कराई गई थी, जिस दिन वीडियो सामने आया था. इसके बाद कोर्ट ने गुरुवार को सभी 14 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. वकील के अनुसार, आरोप है कि आरोपियों ने एक नाविक को धमकाया और जबरन अपनी नाव में साथ लेकर गंगा नदी में पार्टी की. पुलिस ने नाविक और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर कोर्ट में रिपोर्ट पेश की है. इसके बाद आरोपियों के खिलाफ अपहरण समेत अन्य धाराएं जोड़ने की मांग भी की गई है.
शिकायतकर्ता रजत जायसवाल ने कहा कि गंगा नदी सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. देश और दुनिया से हजारों श्रद्धालु काशी आते हैं और गंगा जल से पूजा अर्चना करते हैं. ऐसे में नदी के बीच नाव पर बिरयानी खाना और उसके अवशेष पानी में फेंकना पूरी तरह अनुचित है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं.
जल प्रदूषण और सार्वजनिक उपद्रव की धाराओं में दर्ज हुआ केस
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 298, 299, 196(1) बी, 270 और 279 के तहत केस दर्ज किया है. इसके साथ ही जल प्रदूषण अधिनियम 1974 के तहत भी कार्रवाई की गई है. फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की सुनवाई जारी है.