कर्नाटक सरकार में लोक निर्माण मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर अपने हालिया बयान को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है. जारकीहोली ने कहा कि मीडिया द्वारा उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था और उन्होंने कभी भी SIR प्रक्रिया को सही या वैध नहीं ठहराया.
जारकीहोली ने कहा, "मेरा तात्पर्य यह था कि 'फॉर्म-7' के माध्यम से कर्नाटक में कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने की भाजपा की साजिश को हमने सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया. यह सफलता हमारे राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के प्रयासों और उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के मार्गदर्शन से हासिल हुई. इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि मैं SIR प्रक्रिया को सही मानता हूं."
उन्होंने आगे कहा कि बेलागावी जिले से ही पात्र मतदाताओं के नाम गैर-कानूनी तरीके से हटाए जाने का विरोध शुरू हुआ था. वह पात्र मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े हैं.
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पार्टी नेताओं में दिखी असहजता
इससे पहले जारकीहोली ने कहा था कि कांग्रेस ने कर्नाटक में SIR का विरोध नहीं किया क्योंकि वहां पार्टी के प्रशिक्षण के कारण काम ठीक से हुआ, जबकि महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में गड़बड़ी हुई थी. एक करोड़ वोट हटाए जाने पर जारकीहोली ने कहा, "हां, ये वे लोग हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो कहीं और चले गए हैं, या जिनके नाम दो बार दर्ज हो गए थे; ऐसा काम दूसरी जगहों पर भी किया जाना चाहिए था."
उनके इस बयान पर पार्टी के ही मंत्री प्रियांक खड़गे ने असहमति जताई थी. प्रियांक खड़गे ने चित्तापुर और बीजापुर जैसे इलाकों में जीवित लोगों को मृत दिखाकर 'फॉर्म-7' जमा कराने तथा फर्जी तरीकों से फर्जी नाम हटाने की साजिश का उदाहरण दिया. यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में मतदाता सूची पुनरीक्षण और 'वोट चोरी' के खिलाफ एक विशाल महारैली का आयोजन करने जा रही है.