बचपन से आजतक हमनें अपने घरों व आसपास किसी भी कंस्ट्रक्शन के काम में छड़ यानी सारिया का इस्तेमाल होते देखते आए हैं. इन छड़ों में घुमावदार लाइनें होती हैं. हालांकि, यह लाइनें क्यों होती हैं,इस बारे में लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं जाता. कई बार लोग इसे सिर्फ एक डिजाइन समझ लेते हैं. लेकिन, सारिया की ये लाइनें बड़े काम की चीज होती है और एक बड़ी वजह से छड़ पर इसे उभारा जाता है.
चलिए ऐसे में समझते है कि आखिर सरिया प्लेन क्यों नहीं बनाया जाता है. इसमें ये लाइनें क्यों उभरी होती है. कंस्ट्रक्शन में काम आने वाले लोहे की छड़ पर जानबूझकर रिब्ड पैटर्न बनाए जाते हैं. यह स्टील और आसपास के कंक्रीट के बीच एक मैकेनिकल पकड़ बनाने के लिए होता है.
क्योंकि भारी भार के नीचे चिकनी स्टील कठोर कंक्रीट से बाहर निकल सकती है. इसलिए ये उभार या रिब कंक्रीट को स्टील में मजबूत पकड़ बनाने में मदद करता है. इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि कंक्रीट और लोहे या स्टील के सरिया के बीच पकड़ काफी मजबूत बने और दोनों मिलकर एक इकाई के रूप में काम करे.
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सरिया पर उभरे हुए रिब कंक्रीट के साथ मैकेनिकल इंटरलॉकिंग का काम करते हैं. ये सरिया पर उभरी ये लाइनें कंक्रीट में धंसे हुए छोटे एंकरों की तरह काम करती हैं, जो संरचना के झुकने, मुड़ने या भारी वजन सहन करने पर स्टील को फिसलने या बाहर निकलने से रोकती हैं.
रिब्ड डिजाइन स्टील बार की लंबाई के साथ तनाव और दबाव को समान रूप से पूरे छड़ पर शिफ्ट करता है. इस वजह से सरिया और उससे जुड़े कंक्रीट में कहीं से कोई कमजोर पॉइंट नहीं बनता है. इन्हीं लाइनों की वजह से कंक्रीट इतना ठोस और मजबूत पकड़ बनाता है कि भूकंप जैसी आपदा के दौरान तेज कंपन पर भी कंक्रीट में क्रेक से बचाव हो पाता है.
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इसलिए जब अगली बार किसी सरिया में ये उभरी हुई लाइनें दिखे, तो समझ जाए कि यही आपके मकान की मजबूती का सबसे जरूरी हिस्सा है. क्योंकि, इन लाइनों के बिना सरिया की पकड़ कंक्रीट में कभी भी मजबूत नहीं हो सकती है.