लोगों के मन में कई सारे सवाल और आशंकाएं होती हैं. इनके जवाब और हल लोग अक्सर गूगल पर ढूंढते हैं. इन दिनों काफी लोग गूगल पर एक सवाल पूछ रहे हैं - आखिर इंसानों को सपने क्यों आते हैं? हाल के दिनों में काफी लोग गूगल पर इस सवाल का जवाब ढूंढते दिखे. चलिए ऐसे में जानते हैं आखिर इस सवाल का जवाब क्या है? लोगों को सपने क्यों आते हैं और उनका कोई मतलब भी होता है या नहीं?
रात को सोते समय लगभग हर इंसान सपने देखता है. कभी हम खुद को किसी नई जगह पर पाते हैं, कभी पुराने लोगों से मुलाकात होती है, तो कभी ऐसे अजीबोगरीब घटनाक्रम दिखाई देते हैं जिनका वास्तविक दुनिया से कोई संबंध नहीं होता.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, सपने दरअसल एक तरह के भ्रम होते हैं, जो नींद के खास चरण में दिखाई देते हैं. ये सबसे ज्यादा REM (Rapid Eye Movement) स्लीप के दौरान आते हैं. यह वह अवस्था होती है, जब हमारा शरीर आराम कर रहा होता है, लेकिन दिमाग काफी सक्रिय रहता है.
दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान देखे गए सपनों को याद रखना सबसे मुश्किल होता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि जब हम जाग रहे होते हैं तो हमारे विचारों में एक तर्क और क्रम होता है. लेकिन नींद में दिमाग के भावनात्मक हिस्से ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, जबकि तर्क और विश्लेषण से जुड़े हिस्सों की गतिविधि कम हो जाती है. यही वजह है कि सपनों में कई बार ऐसी घटनाएं दिखाई देती हैं जिनका कोई सिर-पैर नहीं होता.
सपनों को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सपनों को लेकर वैज्ञानिकों के बीच अभी भी पूरी सहमति नहीं है. लोग नींद में सपने क्यों देखते हैं इसका सटीक जवाब अब तक नहीं मिला है. फिर भी इसको लेकर कई दिलचस्प सिद्धांत मौजूद हैं. एक सिद्धांत के अनुसार, सपने हमारे लिए एक तरह के भावनात्मक चिकित्सक का काम करते हैं. दिनभर की चिंताएं, तनाव, रिश्तों से जुड़ी बातें और भावनाएं सपनों के जरिए दिमाग प्रोसेस करता है. कई बार हमारा अवचेतन मन उन भावनाओं को समझने की कोशिश करता है, जिन्हें हम जागते हुए नजरअंदाज कर देते हैं.
एक अन्य थ्योरी कहती है कि सपने हमारे दिमाग की "फाइट ऑर फ्लाइट" यानी खतरे से निपटने की तैयारी का हिस्सा हो सकते हैं. सपने देखने के दौरान दिमाग का एमिग्डाला हिस्सा काफी सक्रिय रहता है, जो डर और सुरक्षा से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि यह प्रक्रिया हमें संभावित खतरों के लिए मानसिक रूप से तैयार कर सकती है.
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कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि सपने रचनात्मकता बढ़ाने में भी मदद करते हैं. कई कलाकार, लेखक और संगीतकार दावा कर चुके हैं कि उन्हें अपने सबसे बेहतरीन आइडिया सपनों से मिले. नींद के दौरान दिमाग पर तर्क की पाबंदियां कम हो जाती हैं, जिससे नई और अनोखी सोच उभर सकती है.
सपनों का संबंध याददाश्त से भी माना जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, नींद के दौरान दिमाग जरूरी जानकारियों और यादों को व्यवस्थित करता है. यही वजह है कि किसी नई चीज को सीखने के बाद अच्छी नींद लेने से उसे बेहतर तरीके से याद रखा जा सकता है.
कुछ सपने स्लीप डिसऑर्डर का संकेत होते हैं
हालांकि, हर सपना सुखद नहीं होता. तनाव, चिंता, नींद की कमी, गर्भावस्था, डिप्रेशन या कुछ दवाइयों के कारण डरावने सपने यानी नाइटमेयर भी आ सकते हैं. अगर ऐसे सपने बार-बार आने लगें और नींद को प्रभावित करें, तो यह किसी स्लीप डिसऑर्डर का संकेत भी हो सकता है.
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यानी सपनों का रहस्य पूरी तरह सुलझा नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि वे हमारे दिमाग, भावनाओं, याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य से गहराई से जुड़े हुए हैं. शायद यही वजह है कि सोते समय हमारा दिमाग एक अलग ही दुनिया रच देता है.