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'अल नीनो में भी कम बारिश जरूरी नहीं', जुलाई में सामान्य से ज्यादा बरसे बादल

केंद्र सरकार ने मॉनसून की स्थिति, खरीफ फसलों की तैयारियों और अल नीनो के संभावित असर को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. इसमें बताया गया कि जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो की संभावना है, लेकिन इससे हर बार सामान्य से कम बारिश हो, यह जरूरी नहीं है.

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देश में मॉनसून की रफ्तार बढ़ने के साथ बारिश की कमी में सुधार हुआ है. केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि 7 जुलाई तक देश में बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है. जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है. सरकार ने यह भी कहा कि अल नीनो वाले साल में भी जरूरी नहीं कि बारिश सामान्य से कम ही हो.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के मुताबिक, खरीफ फसलों की स्थिति और अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई. बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जून से 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश और मॉनसून की स्थिति की जानकारी दी.

आईएमडी ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मॉनसून पहुंचने में करीब 10 दिन की देरी हुई थी. हालांकि, 7 जुलाई तक देशभर में बारिश की कमी घटकर -12 प्रतिशत रह गई है. जुलाई के पहले सप्ताह में मॉनसून गतिविधियां सामान्य से बेहतर रही हैं.

सरकार ने बताया कि जुलाई में पूरे मॉनसून सीजन की करीब 30 प्रतिशत से ज्यादा बारिश होती है, इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. मौसम विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो रहने की संभावना है.

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खरीफ फसलों पर सरकार की नजर

कृषि मंत्रालय ने बैठक में अल नीनो के संभावित प्रभाव और खरीफ सीजन की तैयारियों की जानकारी दी. सरकार ने बताया कि बारिश, जलाशयों में पानी की स्थिति, फसल बुवाई, खाद-बीज की उपलब्धता, बाजार भाव और कीटों के प्रकोप पर लगातार निगरानी की जा रही है. देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए कृषि आपदा प्रबंधन योजनाओं को अपडेट किया गया है.

साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए अल नीनो के जोखिम से निपटने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सरकार ने कहा कि कम बारिश वाले सालों में भी जलवायु अनुकूल बीजों और नई तकनीकों की मदद से देश में खाद्यान्न उत्पादन को बनाए रखने में सफलता मिली है.

जरूरी वस्तुओं और पानी की स्थिति पर भी नजर

बैठक में खाद्यान्न भंडार, खाद की उपलब्धता, पेयजल, बिजली उत्पादन और पशुओं के चारे की स्थिति की भी समीक्षा की गई. सरकार ने बताया कि फिलहाल जलाशयों और भूजल की स्थिति सामान्य है, लेकिन पूरे मॉनसून सीजन में लगातार निगरानी जारी रहेगी.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्मी, ज्यादा नमी और डेंगू जैसी बीमारियों को लेकर राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी है. वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन के तहत 1 जुलाई से अब तक करीब 1 करोड़ मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया है.

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पीएमओ ने सभी मंत्रालयों और राज्यों को निर्देश दिया है कि मॉनसून की स्थिति और कमजोर जिलों पर लगातार नजर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते कदम उठाए जा सकें.

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