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राम मंदिर ट्रस्ट के खजाने से सरकार को 5 साल में गए 396 करोड़! जानिए कैसे?

क्या आप जानते हैं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पिछले 5 सालों में सरकार को 396 करोड़ रुपये टैक्स के रुप में सरकार के खजाने में दिए हैं.

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राम मंदिर ने टैक्स के रुप में 396 करोड़ रुपये दिए थे. (Photo: PTI)
राम मंदिर ने टैक्स के रुप में 396 करोड़ रुपये दिए थे. (Photo: PTI)

चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और गबन के बाद से अयोध्या का श्री राम मंदिर चर्चा में है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लेन देन की जांच की जा रही है और पूरा हिसाब-किताब देखा जा रहा है. क्या आप जानते हैं जिस ट्रस्ट के ऊपर मंदिर की पूरी जिम्मेदारी है, उसके खजाने से सरकार के खाते में करोड़ों रुपये जाते हैं. वैसे ट्रस्ट को जो पैसा दान में मिलता है, उसका टैक्स नहीं देना होता. फिर सवाल है कि आखिर ट्रस्ट की ओर से किस तरह से सरकार को पैसे दिए गए हैं. तो समझते हैं कैसे ट्रस्ट की ओर इनडायरेक्ट तरीके से सरकार को पैसे दिए गए हैं... 
 
पिछले साल मार्च में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पिछले 5 सालों में सरकार को 396 करोड़ रुपये का टैक्स दिया है. ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने उस वक्त जानकारी दी थी कि  5 फरवरी, 2020 से पिछले साल तक यानी 5 साल में सरकार को टैक्स के रुप में 396 करोड़ रुपये दिए गए हैं. ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 396 करोड़ रुपये में जीएसटी के रुप में चुकाए गए है, जबकि बाकी 130 करोड़ रुपये दूसरे टैक्स के रुप में दिए गए हैं. 

कैसे गया टैक्स के रुप में पैसा

अब सवाल है कि जब ट्रस्ट को टैक्स नहीं देना होता तो फिर ये टैक्स किस रुप में सरकार को दिया गया है. इसका जवाब ये है ट्रस्ट को भले ही दान पर टैक्स नहीं देना होता, लेकिन ट्रस्ट मंदिर निर्माण या मंदिर के मेंटेनेंस में जो पैसा खर्च करता है, उस पर टैक्स लगता है और वो ट्रस्ट  सरकार को देता है. जैसे मान लीजिए मंदिर में कुछ निर्माण के लिए पत्थर खरीदा गया तो इस स्थिति में ट्रस्ट की ओर से पत्थर पर लगे जीएसटी के रुप में सरकार को पैसा जाएगा. मंदिर की ओर से निर्माण सामग्री पर जीएसटी, ठेकेदारों और निर्माण सेवाओं पर जीएसटी, भूमि पंजीकरण शुल्क और राजस्व शुल्क, रॉयल्टी, नक्शा स्वीकृति शुल्क के रुप में पैसा दिया जाता है. 

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आम भाषा में समझें तो भक्तों ने जो दान दिया, उस दान से मंदिर का निर्माण हुआ. लेकिन, जब ट्रस्ट ने निर्माण के लिए सामान खरीदा, ठेकेदारों को भुगतान किया, जमीन रजिस्टर्ड कराई या सरकारी अनुमतियां लीं, तब उन लेन-देन पर लगने वाले जीएसटी और अन्य शुल्क सरकार को चुकाने पड़े. इस तरह से ट्रस्ट के खजाने से सरकार को पैसे दिए गए. बता दें कि मंदिर पर 2,150 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और इसमें जो भी सामान खरीदा गया, उस पर 396 रुपये टैक्स दिया गया है. 

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