scorecardresearch
 

जब लॉर्ड माउंटबेटन की हत्या की गई, भारत के अंतिम वायसराय रहे थे

आज के दिन ही भारत के अंतिम वायसराय रहे लॉर्ड माउंटबेटन की दर्दनाक मौत हो गई थी. उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा युद्ध, राजनीति और ब्रिटिश राज से जुड़ा रहा. भारत की आजादी के समय वह उस शख्स के रूप में इतिहास में दर्ज हुए, जिसने ब्रिटिश सत्ता से भारतीय नेताओं को सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई.

Advertisement
X
आज के दिन ही लॉर्ड माउंट बेटन की हत्या कर दी गई थी
आज के दिन ही लॉर्ड माउंट बेटन की हत्या कर दी गई थी

27 अगस्त 1979 का दिन ब्रिटेन के शाही परिवार और भारत के इतिहास से जुड़े एक बड़े नाम के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ. इसी दिन लॉर्ड लुई माउंटबेटन की हत्या कर दी गई थी. वह भारत के आखिरी वायसराय थे और 1947 में भारत की आजादी और बंटवारे से पहले सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा चुके थे. उनकी हत्या आयरलैंड के तट के पास एक बम धमाके में हुई थी.


जिस नाव पर माउंटबेटन परिवार के साथ छुट्टी मना रहे थे. उसमें आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (IRA) के आतंकवादियों ने करीब 50 पाउंड का बम छिपा दिया था. माउंटबेटन उस समय 79 साल के थे. उनके साथ नाव पर परिवार के लोग भी मौजूद थे. धमाके में उनके 14 साल के पोते निकोलस समेत तीन अन्य लोगों की भी मौत हो गई. उसी दिन उत्तरी आयरलैंड के काउंटी डाउन में ब्रिटिश सैनिकों पर एक और बम हमला हुआ, जिसमें 18 ब्रिटिश पैराट्रूपर्स मारे गए.

मछली पकड़ने निकले थे माउंटबेटन
माउंटबेटन 27 अगस्त को आयरलैंड के उत्तर-पश्चिम में स्थित डोनेगल खाड़ी में अपनी मछली पकड़ने वाली नाव पर परिवार के साथ थे. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह यात्रा उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित होगी.

IRA के आतंकवादियों ने नाव में बम छिपा रखा था. बाद में संगठन ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि बम को समुद्र किनारे से रिमोट कंट्रोल के जरिए उड़ाया गया था.

Advertisement

विस्फोट इतना जोरदार था कि नाव तबाह हो गई और माउंटबेटन की मौत हो गई. उनके पोते निकोलस और नाव सहायक पॉल मैक्सवेल की भी जान चली गई. निकोलस की दादी डॉवेजर लेडी ब्रेबोर्न भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुईं और बाद में उनकी मौत हो गई. निकोलस के जुड़वां भाई टिमोथी, उनकी मां लेडी ब्रेबोर्न और उनके पिता लॉर्ड ब्रेबोर्न भी घायल हुए.

कौन थे लॉर्ड माउंटबेटन?
लॉर्ड लुई माउंटबेटन सिर्फ ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य नहीं थे, बल्कि उनका सैन्य और राजनीतिक करियर भी बेहद अहम रहा था. वह प्रिंस लुई ऑफ बैटनबर्ग के बेटे और महारानी विक्टोरिया के परपोते थे. कम उम्र में ही उन्होंने ब्रिटिश रॉयल नेवी ज्वाइन कर ली थी. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने नौसेना में सेवा की.

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. उनका युद्धपोत क्रेट के पास डूब गया था. बाद में उन्होंने विमानवाहक पोत की कमान संभाली और 1942 में उन्हें ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अभियानों का प्रमुख बनाया गया.

1943 में उन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्र राष्ट्रों की सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर नियुक्त किया गया. उनके नेतृत्व में जापान के खिलाफ अभियान चलाया गया, जिसके बाद बर्मा को दोबारा कब्जे से मुक्त कराने में सफलता मिली.

Advertisement

भारत की आजादी में भी थी बड़ी भूमिका
माउंटबेटन के जीवन का सबसे अहम अध्याय भारत से जुड़ा था. 1947 में उन्हें भारत का आखिरी वायसराय बनाया गया. उस समय भारत ब्रिटिश शासन से आजादी की ओर बढ़ रहा था. माउंटबेटन ने भारतीय नेताओं और ब्रिटिश सरकार के बीच सत्ता हस्तांतरण को लेकर बातचीत की. इसी प्रक्रिया के बाद भारत और पाकिस्तान अस्तित्व में आए और दोनों देशों को 1947 में आजादी मिली.

भारत छोड़ने के बाद भी माउंटबेटन ने ब्रिटिश नौसेना में कई बड़े पद संभाले. वह ब्रिटेन के डिफेंस स्टाफ के प्रमुख और चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन भी रहे.

महारानी एलिजाबेथ के परिवार से था खास रिश्ता
माउंटबेटन का ब्रिटिश शाही परिवार से बेहद करीबी रिश्ता था. वह महारानी एलिजाबेथ-2 के दूसरे चचेरे भाई थे. उन्होंने अपने भतीजे फिलिप माउंटबेटन और तत्कालीन राजकुमारी एलिजाबेथ के रिश्ते को भी बढ़ावा दिया था. बाद में फिलिप और एलिजाबेथ की शादी हुई.

माउंटबेटन महारानी के बड़े बेटे चार्ल्स के गॉडफादर और मेंटर भी थे. यही वजह थी कि उनका शाही परिवार में खास सम्मान था. रिटायरमेंट के बाद उन्हें आइल ऑफ वाइट का गवर्नर और फिर लॉर्ड लेफ्टिनेंट बनाया गया. वह ब्रिटेन में सम्मानित और लोकप्रिय शख्सियत बने रहे.

IRA ने क्यों की थी हत्या?
माउंटबेटन की हत्या के पीछे आयरिश रिपब्लिकन आर्मी यानी IRA थी. यह संगठन उत्तरी आयरलैंड को ब्रिटेन से अलग कर उसे आयरलैंड गणराज्य के साथ मिलाने की कोशिश कर रहा था.

Advertisement

माउंटबेटन की हत्या को IRA के ब्रिटिश शाही परिवार के खिलाफ अभियान में एक बड़ा हमला माना गया. इस घटना ने ब्रिटेन में IRA के खिलाफ गुस्सा और बढ़ा दिया. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की सरकार ने भी संगठन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया.

उसी दिन काउंटी डाउन में ब्रिटिश सैनिकों पर हुए बम हमले ने हालात और गंभीर कर दिए. उस हमले में 18 ब्रिटिश पैराट्रूपर्स की मौत हुई थी.

बम लगाने वाला कौन था?
जांच के बाद IRA सदस्य थॉमस मैकमोहन को गिरफ्तार किया गया. उस पर माउंटबेटन की नाव में बम तैयार करने और लगाने का आरोप साबित हुआ. मैकमोहन IRA की साउथ आर्माघ ब्रिगेड का प्रमुख सदस्य था और विस्फोटकों का विशेषज्ञ माना जाता था. उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.

हालांकि माना गया कि इस हमले में कई लोग शामिल थे, लेकिन अदालत में सिर्फ मैकमोहन को दोषी ठहराया गया. करीब दो दशक बाद 1998 के गुड फ्राइडे एग्रीमेंट के तहत उसे जेल से रिहा कर दिया गया. यह समझौता उत्तरी आयरलैंड में लंबे समय से चले आ रहे हिंसक संघर्ष को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम था. रिहाई के बाद मैकमोहन ने दावा किया कि उसने IRA से दूरी बना ली है और बढ़ई का काम करने लगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement