scorecardresearch
 

कैसे बनता है दूध की खाली थैलियों से पैसा? इतने रुपये में बिकती हैं

क्या दूध की खाली थैलियों से भी कमाई हो सकती है? इसका जवाब है- हां. इन बेकार समझी जाने वाली थैलियों को जमा करके और सही तरीके से बेचकर कमाई की जा सकती है. जानते हैं इसके लिए क्या-क्या करना होता है और इससे कितनी कमाई हो सकती है.

Advertisement
X
घरेलू स्तर पर इस्तेमाल होने वाले दूध के खाली पाउच का भाव फिक्स नहीं होता (Photo: Reuters and Getty)
घरेलू स्तर पर इस्तेमाल होने वाले दूध के खाली पाउच का भाव फिक्स नहीं होता (Photo: Reuters and Getty)

रोज सुबह दूध की थैली इस्तेमाल करने के बाद ज्यादातर लोग उसे कूड़े में फेंक देते हैं. लेकिन यह खाली प्लास्टिक पाउच पूरी तरह बेकार नहीं होता. बड़ी मात्रा में इकट्ठा किए गए ऐसे पाउच रीसाइक्लिंग के लिए बेचे जा सकते हैं. हालांकि इसकी कीमत जगह, क्वालिटी और स्क्रैप की स्थिति के हिसाब से बदलती है. उपलब्ध बाजार लिस्टिंग और डेयरी स्क्रैप नीलामी के आंकड़े बताते हैं कि खाली दूध के पाउच की कोई एक तय राष्ट्रीय कीमत नहीं है.

दूध की थैली किस रेट पर बिकती है?

प्लास्टिक स्क्रैप के ऑनलाइन B2B प्लेटफॉर्म प्लास्टिक4ट्रेड की लिस्टिंग में अलग-अलग जगहों पर दूध की LDPE पाउच स्क्रैप के अलग-अलग भाव दिखाई देते हैं. उदाहरण के तौर पर 2025 में पंचकूला की एक लिस्टिंग में 13 रुपये प्रति किलो, पुणे की एक लिस्टिंग में 15 रुपये प्रति किलो और उडुपी की एक गांठों में दबाए गए एलडीपीई दूध की थैलियों के प्लास्टिक स्क्रैप लिस्टिंग में 20 रुपये प्रति किलो का भाव दर्ज था. बहादुरगढ़ की नवंबर 2025 की एक अन्य लिस्टिंग मेंड्राई मिल्क पाउच स्क्रैप की कीमत 29 रुपये प्रति किलो दिखाई गई थी.

इससे साफ है कि घरेलू स्तर पर इस्तेमाल होने वाले दूध के खाली पाउच का भाव फिक्स नहीं होता. साफ-सुथरा और एक जैसी क्वालिटी का स्क्रैप, मात्रा और स्थानीय खरीदार के हिसाब से कीमत बदल सकती है. इसलिए किसी भी शहर में कबाड़ी से मिलने वाला रेट इन ऑनलाइन लिस्टिंग से अलग हो सकता है.

Advertisement

डेयरी की नीलामी में क्या रेट मिला?

नेशनल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ऑफ इंडिया के NCDFI eMarket पर उपलब्ध डेयरी स्क्रैप नीलामी के रिकॉर्ड में 18 जून 2026 को कायरा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन की मिल्क/घी पाउच (ओपेक फिल्म) स्क्रैप 17.29 रुपये प्रति किलो के रेट पर दर्ज की गई. इसी नीलामी रिकॉर्ड में HMHDPE/LDPE प्लास्टिक बैग की अलग-अलग लिस्टिंग 41.09 रुपये और 49.09 रुपये प्रति किलो तक दर्ज हैं.

एनसीडीएफआई ई-मार्केट के 29 जुलाई 2026 के एक अन्य रिकॉर्ड में कायरा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन की LDPE Film स्क्रैप 67.5 रुपये प्रति किलो पर लिस्टेड थी. लेकिन यह जरूरी नहीं कि घर से निकली हर खाली दूध की थैली इसी रेट पर बिके. अलग-अलग स्क्रैप कैटेगरी, क्वालिटी, मात्रा और खरीदार के कारण कीमत में बड़ा अंतर हो सकता है.

इसलिए 70 रुपये प्रति किलो वाला दावा पूरी तरह सही नहीं

67.5 रुपये प्रति किलो का रेट एक डेयरी स्क्रैप नीलामी में LDPE Film के लिए दर्ज जरूर हुआ, लेकिन इसे हर घर की इस्तेमाल की हुई दूध की थैली का तय भाव नहीं माना जा सकता. इसी तरह 14 रुपये या 27 रुपये प्रति किलो की ऑनलाइन लिस्टिंग को भी पूरे देश का एक समान रेट नहीं कहा जा सकता.

यानी अगर कोई यह दावा करे कि दूध की हर खाली थैली 70 रुपये प्रति किलो बिकती है, तो यह दावा भ्रामक हो सकता है. सही बात यह है कि खाली पाउच की कीमत स्क्रैप की क्वालिटी, मात्रा, प्रोसेसिंग और बाजार के हिसाब से बदलती है.

Advertisement

मुंबई की तीन महिलाओं ने शुरू किया था 'द मिल्क बैग प्रोजेक्ट'

दूध के खाली पाउच को अलग से जमा कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजने की पहल मुंबई में भी देखने को मिली. The Better India की रिपोर्ट के अनुसार, हंसू पारदीवाला, कुंती ओझा और चित्रा हिरेमथ ने 2019 में The Milk Bag Project शुरू किया था. इस पहल के तहत इस्तेमाल किए गए खाली दूध के पैकेट इकट्ठा कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजे गए.

इस तरह की पहल का मकसद सिर्फ स्क्रैप बेचकर पैसा कमाना नहीं, बल्कि इस्तेमाल के बाद प्लास्टिक को अलग करके रीसाइक्लिंग चेन तक पहुंचाना भी है.

घर में जमा थैलियों से कितनी कमाई होगी?

घर से निकलने वाली कुछ दूध की थैलियां जमा करके बड़ी कमाई होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. ऊपर उपलब्ध अलग-अलग लिस्टिंग और नीलामी रिकॉर्ड में रेट 14 रुपये प्रति किलो से लेकर अलग-अलग कैटेगरी में 67.5 रुपये प्रति किलो तक दिखे हैं. इनमें घरेलू इस्तेमाल के बाद की दूध की थैली के लिए 17.29 रुपये प्रति किलो का एक डेयरी नीलामी रिकॉर्ड भी शामिल है.

इसलिए अगर कोई घर की खाली थैलियां अलग से जमा करना चाहता है, तो सबसे सही तरीका है कि पहले स्थानीय कबाड़ी या रीसाइक्लर से रेट पता किया जाए. इससे यह भी मालूम हो जाएगा कि खरीदार इस्तेमाल की हुई दूध की थैली ले रहा है या केवल साफ और अलग की गई प्लास्टिक फिल्म खरीदता है.

Advertisement

खाली दूध की थैली से बहुत बड़ी कमाई शायद न हो, लेकिन उसे बाकी कचरे से अलग रखकर रीसाइक्लिंग तक पहुंचाना प्लास्टिक कचरा कम करने में मदद कर सकता है. और अगर पर्याप्त मात्रा में स्क्रैप जमा हो जाए, तो स्थानीय बाजार के हिसाब से उससे कुछ पैसे भी मिल सकते हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement