scorecardresearch
 

फ्लाइट में ऑक्सीजन मास्क गिरते ही कितनी देर मिलती है सांस? जानिए सच

फ्लाइट में सफर के दौरान आपने ऊपर लगे ऑक्सीजन मास्क जरूर देखे होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपात स्थिति में नीचे आने वाला यह मास्क कितनी देर तक ऑक्सीजन देता है और इसे एक्टिवेट करने के पीछे क्या सिस्टम काम करता है?

Advertisement
X
आम तौर पर यात्री विमान काफी ज्यादा ऊंचाई पर उड़ते हैं (सांकेतिक तस्वीर-AI generated)
आम तौर पर यात्री विमान काफी ज्यादा ऊंचाई पर उड़ते हैं (सांकेतिक तस्वीर-AI generated)

फ्लाइट में सफर करते समय आपने अक्सर देखा होगा कि उड़ान शुरू होने से पहले केबिन क्रू यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क के बारे में जानकारी देता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर अचानक विमान के केबिन का दबाव कम हो जाए और ऊपर से ऑक्सीजन मास्क गिरने लगें, तो इनसे आखिर कितनी देर तक सांस ली जा सकती है?

इसका जवाब सिर्फ एक संख्या में नहीं है. अलग-अलग विमान और ऑक्सीजन सिस्टम के हिसाब से इसकी अवधि अलग हो सकती है. हालांकि कई यात्री ऑक्सीजन सिस्टम करीब 12 मिनट के आपातकालीन उतरने के प्रोफाइल को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं, जबकि कुछ सिस्टम 22 मिनट तक के प्रोफाइल के लिए बनाए जाते हैं.

अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन यानी एफएए के एक आधिकारिक विश्लेषण में बोइंग 737 के यात्री ऑक्सीजन सिस्टम का उदाहरण दिया गया है. इसमें बताया गया है कि विमान में लगे रासायनिक ऑक्सीजन जनरेटर से बनने वाली ऑक्सीजन लगभग 12 मिनट तक उपलब्ध रहती है.

इसका मतलब यह नहीं कि विमान में बैठे यात्रियों के पास सिर्फ 12 मिनट की सांस बची है. इस सिस्टम का मकसद यात्रियों को लंबे समय तक ऑक्सीजन देना नहीं, बल्कि विमान को सुरक्षित ऊंचाई तक नीचे लाने के दौरान अतिरिक्त ऑक्सीजन उपलब्ध कराना है.

Advertisement

इतनी ही देर की ऑक्सीजन क्यों?

आम तौर पर यात्री विमान काफी ज्यादा ऊंचाई पर उड़ते हैं. वहां केबिन को एक नियंत्रित दबाव में रखा जाता है, ताकि यात्री सामान्य रूप से सांस ले सकें.

अगर किसी वजह से केबिन का दबाव अचानक कम हो जाए, तो ज्यादा ऊंचाई के कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल सकती. इसे हाइपॉक्सिया कहा जाता है.

ऐसी स्थिति में पायलट आपातकालीन प्रक्रिया के तहत विमान को तेजी से कम ऊंचाई पर लाने की कोशिश करते हैं. FA के मुताबिक, दबाव खत्म होने की स्थिति में पायलट ऑक्सीजन मास्क पहनते हैं और विमान को सुरक्षित कम ऊंचाई की ओर ले जाते हैं. इसी दौरान यात्रियों के लिए ऑक्सीजन मास्क सक्रिय हो सकते हैं.यानी यात्री ऑक्सीजन मास्क का मुख्य उद्देश्य है विमान के सुरक्षित ऊंचाई तक पहुंचने तक जरूरी अतिरिक्त ऑक्सीजन देना.

मास्क से ऑक्सीजन आती कहां से है?

यह सवाल भी काफी दिलचस्प है. कई यात्री सोचते हैं कि हर सीट के ऊपर किसी बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर से मास्क जुड़ा होता है. लेकिन कुछ विमानों में ऐसा नहीं होता.

कई यात्री ऑक्सीजन प्रणालियों में रासायनिक ऑक्सीजन जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है. मास्क को खींचने पर जनरेटर की प्रक्रिया शुरू हो सकती है और रासायनिक प्रतिक्रिया के जरिए ऑक्सीजन बनने लगती है. FA की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे जनरेटर अलग-अलग आपातकालीन उतरने की अवधि के हिसाब से डिजाइन किए जा सकते हैं.
एक बार रासायनिक प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे सामान्य तरीके से बंद नहीं किया जा सकता. इसलिए मास्क को सिर्फ आपात स्थिति में ही इस्तेमाल किया जाता है.

Advertisement

मास्क को अपनी तरफ खींचना क्यों जरूरी है?

फ्लाइट में सुरक्षा संबंधी जानकारी देते समय केबिन क्रू यात्रियों को बताता है कि ऑक्सीजन मास्क नीचे आने पर उसे अपनी तरफ खींचें और नाक-मुंह पर ठीक से लगाएं.कुछ रासायनिक ऑक्सीजन प्रणालियों में मास्क को खींचने की प्रक्रिया ही जनरेटर को सक्रिय करने का हिस्सा होती है. हालांकि अलग-अलग विमानों की प्रणालियां अलग हो सकती हैं, इसलिए वास्तविक आपात स्थिति में विमान के सुरक्षा निर्देशों का पालन करना सबसे जरूरी है.

पहले खुद मास्क लगाने को क्यों कहा जाता है?

आपने सुरक्षा प्रदर्शन में यह बात जरूर सुनी होगी कि आपात स्थिति में पहले अपना ऑक्सीजन मास्क लगाएं और उसके बाद किसी बच्चे या दूसरे यात्री की मदद करें.इसके पीछे सीधी वजह है- ऑक्सीजन की कमी होने पर सोचने-समझने और सही फैसला लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.

FAA के मुताबिक ऑक्सीजन की कमी यानी हाइपॉक्सिया में व्यक्ति की कार्यक्षमता तेजी से प्रभावित हो सकती है. यह असर ऊंचाई, दबाव कम होने की गति और व्यक्ति की स्थिति जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है. अचानक दबाव कम होने पर सामान्य समय की तुलना में उपयोगी चेतना का समय और भी कम हो सकता है.इसीलिए पहले खुद को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि आप उसके बाद दूसरे व्यक्ति की मदद कर सकें.

Advertisement

क्या ऑक्सीजन मास्क में हमेशा 12 मिनट की ही ऑक्सीजन होती है?

नहीं. यही इस पूरी जानकारी की सबसे अहम बात है.हर विमान में यात्री ऑक्सीजन सिस्टम बिल्कुल एक जैसा नहीं होता. FAA की तकनीकी रिपोर्ट में 12 मिनट और 22 मिनट जैसे अलग-अलग आपातकालीन उतरने के प्रोफाइल का उल्लेख है. कुछ विमानों में अलग तरह की ऑक्सीजन प्रणाली भी इस्तेमाल की जा सकती है.इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर फ्लाइट में ऑक्सीजन मास्क सिर्फ 12 मिनट चलता है.

सही बात यह है कि यात्री ऑक्सीजन सिस्टम को विमान और उसके आपातकालीन उतरने के प्रोफाइल के हिसाब से डिजाइन किया जाता है.

यह भी पढ़ें: प्लेन में फ्लश किया... फिर टॉयलेट वेस्ट कहां गया? जानिए पूरा राज

ऑक्सीजन खत्म होने से पहले विमान नीचे आ जाता है?

यही इन प्रणालियों की डिजाइन का मुख्य उद्देश्य है.अगर विमान का केबिन दबाव खत्म हो जाता है, तो पायलट आपातकालीन नीचे उतरने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. FA के मुताबिक ऐसी स्थिति में विमान को कम ऊंचाई पर लाना जरूरी होता है, जहां यात्रियों को अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत न पड़े.

इसलिए यात्री ऑक्सीजन मास्क को किसी लंबी यात्रा के लिए ऑक्सीजन देने वाला उपकरण समझना सही नहीं है. यह एक आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था है, जिसका काम विमान को सुरक्षित ऊंचाई तक पहुंचने के दौरान यात्रियों को अतिरिक्त ऑक्सीजन उपलब्ध कराना है.

Advertisement

तो अगली बार फ्लाइट में क्या याद रखें?

अगर कभी उड़ान के दौरान ऑक्सीजन मास्क नीचे गिरें, तो घबराने के बजाय तुरंत अपने मास्क को नाक और मुंह पर ठीक से लगाएं और केबिन क्रू के निर्देशों का पालन करें.सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑक्सीजन मास्क कितने मिनट चलता है, इसका एक ही जवाब सभी विमानों पर लागू नहीं होता. विमान और उसमें लगे ऑक्सीजन सिस्टम के अनुसार इसकी अवधि अलग हो सकती है.

लेकिन एक बात तय है- ऑक्सीजन मास्क यात्रियों को पूरी उड़ान के लिए ऑक्सीजन देने के लिए नहीं, बल्कि आपात स्थिति में विमान को सुरक्षित ऊंचाई तक लाने के दौरान सुरक्षा देने के लिए होता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement