आजकल लोग अपने घरों फॉल्स सीलिंग बनवा रहे हैं. आधुनिक घरों में फॉल्स सीलिंग बनाने का फैशन ट्रेंड बन गया है. एक तरफ तो यह घर के इंटीरियर को खूबसूरत बना देता है, लेकिन इसके फायदे से ज्यादा नुकसान की संभावना रहती है. चलिए जानते हैं आखिर फॉल्स सीलिंग बनवाना कैसे घाटे का सौदा साबित हो सकता है.
फॉल्स सीलिंग को सस्पेंडेड सीलिंग या ड्रॉप सीलिंग भी कहा जाता है. वैसे तो फॉल्स सीलिंग किसी भी जगह को ज्यादा खूबसूरत बना सकती हैं. फॉल्स सीलिंग सिर्फ घर की खूबसूरती ही नहीं बढ़ाती है, बल्कि आजकल आधुनिकता का प्रतीक बन गई है.
फॉल्स सीलिंग असल में यह एक सेकेंडरी सीलिंग होती है, जो असली छत से कुछ इंच नीचे बनाई जाती है. फॉल्स सीलिंग न केवल इंटीरियर को आधुनिक लुक देती है, बल्कि इससे लाइटिंग, AC डक्ट, फायर अलार्म और वायरिंग छिपाने में भी मदद मिलती है.
फॉल्स सीलिंग करवाना शुरुआत में घर को खूबसूरत जरूर बनाता है, लेकिन लंबे समय में यह जेब पर भारी पड़ने वाला सौदा साबित हो सकता है. कई लोग इसे केवल एक बार का खर्च समझकर करवा लेते हैं, लेकिन कुछ साल बीतने के बाद इसमें बार-बार मरम्मत और बदलाव का खर्च जुड़ने लगता है.
क्यों घाटे का सौदा है फॉल्स सीलिंग बनवाना
ऐसे में समझते हैं कि फॉल्स सीलिंग को घाटे का सौदा क्यों कहा जाता है? अगर घर के ऊपर कोई और फ्लोर नहीं है या फिर टॉप फ्लोर वाले घर में फॉल्स सीलिंग बनवा रहे हैं. तब ऐसे में छत से थोड़ा भी पानी लीक होता है, तो वह सीधे फॉल्स सीलिंग पर जमा हो जाता है. विशेषकर यह जिप्सम बोर्ड पर जमा होकर इसे खराब करने लग जाता है.
सीलन की वजह से सीलिंग काली पड़ने लगती है. सड़ जाती है या टूटकर गिरने लगती है. इसे ठीक करने के लिए आपको पूरी सीलिंग का वह हिस्सा कटवाकर नया लगवाना पड़ता है.
वहीं असली छत और फॉल्स सीलिंग के बीच खाली जगह बन जाती है. यह जगह चूहों, कॉकरोच, छिपकलियों और दीमक के छिपने का सबसे सुरक्षित ठिकाना बन जाती है. चूहे अंदर लगे बिजली के तारों को कुतर सकते हैं. इससे शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है. यह भारी नुकसान करा सकता है.
बार- बार मेंटेनेंस होता है खर्चीला
वहीं वायरिंग खराब होने पर बार- बार फॉल्स सीलिंग खोलकर इसकी मरम्मत करना भी खर्चीला साबित होता है. अगर पेस्ट कंट्रोल भी करना होत तो बार-बार इसे खोलने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं.
फॉल्स सीलिंग की मरम्मत और मेंटेनेंस में काफी खर्चा होता है. फॉल सीलिंग के अंदर से बिजली के तार और एसी की पाइपलाइन गुजरती है.अगर कभी कोई तार जल जाए या एसी की पाइप लीक हो, तो फॉल्स सीलिंग को तोड़े बिना उसे ठीक करना नामुमकिन होता है. यानी एक छोटी सी खराबी को ठीक करने के लिए भी आपको पूरी सीलिंग दोबारा बनवानी पड़ सकती है.
कमरे की ऊंचाई कम कर देता है
फॉल्स सीलिंग के कारण कमरे की ऊंचाई 6 इंच से 1 फीट तक कम हो जाती है. इससे दमघोंटू माहौल बन जाता है. यदि कमरे की ऊंचाई पहले से ही कम है, तो फॉल्स सीलिंग के बाद कमरा छोटा और डार्क लगने लगता है. यह हवा के फैलाव को कम कर देता है. ठीक से वेंटिलेशन नहीं हो पाने की वजह से कमरा जल्दी गर्म हो सकता है.
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अच्छी से अच्छी फॉल्स सीलिंग भी 7 से 10 साल के बाद अपनी मजबूती खोने लगती है. समय के साथ इसके हुक और चैनल ढीले हो जाते हैं. अगर भारी पंखा या झूमर सही से सपोर्ट न मिले, तो पूरी सीलिंग के अचानक नीचे गिरने का डर रहता है. इससे जान-माल का नुकसान हो सकता है.