दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है. अब एएक्यूआई 300 के पार हो गया है, जिसके बाद ग्रैप की स्टेज-2 को लागू कर दिया है. कुछ दिनों पहले ग्रैप-1 की पाबंदियां लागू की गई थीं, लेकिन प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद ग्रैप-2 लागू कर दिया गया है. ग्रैप यानी ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट का प्लान है, जिसमें प्रदूषण को रोकने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाई जाती हैं. इसमें चार स्टेज तक पाबंदियां लगती है और अभी दूसरी स्टेज लागू हो गई है. ऐसे में जानते हैं कि जब ग्रैप-2 लागू हो जाता है तो किन-किन चीजों पर पाबंदियां लग जाती हैं.
सोमवार को दिल्ली की एयर क्वालिटी बिगड़कर 'बहुत खराब' कैटेगरी में पहुंच गई. शाम 4 बजे तक एक्यूआई बढ़कर 324 हो गया. इसके बाद अधिकारियों ने पूरे NCR में ग्रैप की दूसरी स्टेज की पाबंदियां लागू करने का फैसला लिया. इस दौरान दिल्ली का अधिकतम तापमान 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस सीजन में पहली बार दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंचा है. सोमवार सुबह 9 बजे एक्यूआई 312 दर्ज किया गया था. इसके बाद शाम 4 बजे तक यह बढ़कर 324 हो गया.
बता दें कि 28 सितंबर 2026 को CAQM की बैठक में ग्रैप के नियमों में कुछ बदलाव किए गए थे. उस वक्त उन पाबंदियों को स्टेज-1 में शामिल कर दिया गया था, जो स्टेज-2 में थीं. धूल नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कुछ उपायों को पहली स्टेज में ही मर्ज कर दिया गया था. डीजल जनरेटर सेट (डीजी सेट) और एनसीआर के साथ आसपास के राज्यों से आने वाली बीएश-IV या उससे पुराने मानक की बसों के प्रवेश से जुड़े उपायों को स्टेज-2 से हटाकर स्टेज-1 में शामिल किया गया. यानी जो पाबंदियां पहले स्टेज-2 में लागू होती थीं, वो पहले से स्टेज-1 में लागू हो चुकी हैं.

ग्रैप स्टेज-2 में क्या होता है?
स्टेज-2 में सबसे पहली बात यह है कि स्टेज-1 के उपाय जारी रहते हैं. अब प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकारी एजेंसियां पहले से ज्यादा सख्ती बरतेंगी. सड़कों पर रोजाना मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग के जरिए सफाई होगी और धूल रोकने के लिए पानी के साथ डस्ट सप्रेसेंट का छिड़काव किया जाएगा. प्रदूषण के हॉटस्पॉट वाले इलाकों में विशेष अभियान चलाए जाएंगे और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का पालन कराने के लिए निरीक्षण बढ़ाया जाएगा.
निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जाएगा. लोगों को सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने और जिनके काम की प्रकृति अनुमति देती है, उन्हें घर से काम करने की सलाह दी गई है.कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर निर्धारित पाबंदियां लागू की जाती हैं.
GRAP-2 में क्या-क्या पाबंदियां रहेंगी?
अभी इस स्टेज में स्कूल-कॉलेज बंद करने, सभी निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू करने या BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान नहीं है. कंस्ट्रक्शन के कामों में कुछ पाबंदियां रहेंगी, जिसमें बिल्डिंग कवर आदि शामिल है. GRAP-2 में 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ दफ्तर चलाने का अनिवार्य नियम नहीं है. वहीं, पाबंदियों को स्टेज-1 में ट्रांसफर करने से इसमें वो ही पाबंदियां रहती हैं.
ग्रैप-1 में क्या पाबंदियां हैं?
पत्तियां, कूड़ा और अन्य कचरा खुले में जलाने पर रोक रहेगी, यानी खुले में कचरा नहीं जला सकते.
जहां कंस्ट्रक्शन हो रहा है, वहां धूल उड़ने नहीं देनी है. निर्माण सामग्री को खुले में रखने, ढकने और धूल रोकने के नियमों का पालन करना होगा. नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है. साथ ही निर्माण मलबा खुले में नहीं फेंका जा सकता.
प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन नहीं चला सकेंगे. वैध पीयूसी प्रमाणपत्र और वाहन प्रदूषण से जुड़े लागू नियमों का पालन करना होगा.
बीएस-IV और उससे पुराने मानक वाली प्रतिबंधित इंटर-सिटी बसों को दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.
डीजल जनरेटर सेट मनमाने तरीके से नहीं चलाए जा सकेंगे और उनके संचालन पर नियमों के अनुसार पाबंदी रहेगी.
धूल नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट से जुड़े निर्धारित उपाय लागू रहेंगे.
मेट्रो पार्किंग को छोड़कर पार्किंग फीस को बढ़ा दिया गया है.