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सरकार तो कहती है 5 मिनट... लेकिन क्या दिल्ली में इतनी देर में बुझाई जा सकती है आग?

क्या दिल्ली में आग लगने के 5 मिनट के अंदर आग पर काबू पाना कितना पॉसिबल है? क्या सरकारी की सिफारिश के हिसाब से आग को बुझाया जा सकता है?

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दिल्ली में आग को 5 मिनट में बुझाना पॉसिबल नहीं माना जाता है. (Photo: PTI)
दिल्ली में आग को 5 मिनट में बुझाना पॉसिबल नहीं माना जाता है. (Photo: PTI)

दिल्ली के मालवीय नगर में लगी आग ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या राजधानी फायर इमरजेंसी से निपटने के लिए तैयार है. जिस शहर में ऊंची इमारतें तेजी से बढ़ रही हैं, ट्रैफिक लगातार जाम रहता है और आबादी करोड़ों के पार पहुंच चुकी है, वहां क्या सचमुच आग लगने के पांच मिनट के भीतर दमकल पहुंच सकती है? सरकार ने तो शहरी क्षेत्रों में आग बुझाने के लिए 5 मिनट का वक्त तय किया है, लेकिन दिल्ली की ट्रैफिक वाली सड़कों और मौजूदा स्टाफ, फायर स्टेशन के आधार पर यह संभव हो सकता है. तो समझते हैं प्रेक्टिकली ये कितना संभव है...

सरकार ने क्या सिफारिश की है?

दिलचस्प बात यह है कि गृह मंत्रालय की स्टैंडिंग फायर एडवाइजरी काउंसिल ने शहरी क्षेत्रों में 5 से 7 मिनट के रिस्पॉन्स टाइम की सिफारिश की है. लेकिन यह सिर्फ एक सलाहकारी मानक है, कानूनी बाध्यता नहीं. गृह मंत्रालय के अनुसार, फायर सर्विस की जिम्मेदारी नगर निकायों और राज्य सरकारों की है. स्टैंडिंग फायर एडवाइजरी काउंसिल ने शहरी क्षेत्रों में 5 से 7 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 मिनट का रिस्पॉन्स टाइम सुझाया है.

इन्हीं मानकों के आधार पर गृह मंत्रालय की ओर से नियुक्त एजेंसी आरएमएसआई ने देशभर का फायर रिस्क विश्लेषण किया था. रिपोर्ट में सामने आया कि देश में 8,559 फायर स्टेशनों की जरूरत है. वैसे ये 2016 की रिपोर्ट है और हो सकता है कि अब ये जरूरत आगे बढ़ गई होगी. उस वक्त भारत में 2,987 फायर स्टेशन मौजूद थे और अब ये संख्या 3200 के आस-पास बताई जाती है. यानी देश में करीब 65 प्रतिशत फायर स्टेशनों की कमी है. 

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दिल्ली में आग

मालवीय नगर वाली आग में क्या हुआ था?

रिपोर्ट्स बताती हैं कि मालवीय नगर की घटना में आग लगने की पहली सूचना सुबह करीब 8 बजकर 50 मिनट पर मिली. अधिकारियों के अनुसार दमकल की पहली टीम करीब 9 बजकर 10 बजे घटनास्थल पर पहुंची.  यानी सूचना मिलने और दमकल के पहुंचने के बीच लगभग 20 मिनट का अंतर था. यह देरी सिर्फ ट्रैफिक की वजह से नहीं हुई. 

इसकी वजह ये है कि गीतांजलि एन्क्लेव स्थित निकटतम फायर स्टेशन की दोनों गाड़ियां उस समय अन्य घटनाओं में व्यस्त थीं. एक गाड़ी जोनापुर गांव में लगी आग बुझाने गई हुई थी, जबकि दूसरी किसी अन्य आपात स्थिति के लिए तैनात थी. ऐसे में अन्य फायर स्टेशनों से गाड़ियां बुलानी पड़ीं. यानी सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि स्टाफ दमकल की कमी भी आग में लेट से काबू पाने का कारण है. 

5 मिनट में आग बुझाना कितना संभव है?

द हिंदू से बातचीत में खुद चीफ फायर ऑफिसर अभिलाश मलिक ने बताया कि दिल्ली की मौजूदा परिस्थितियों में पांच मिनट का रिस्पॉन्स टाइम प्रेक्टिकल नहीं है. उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों में दिल्ली की आबादी तेजी से बढ़ी है, ट्रैफिक की स्थिति लगातार खराब हुई है और शहरी विस्तार भी बढ़ा है. ऐसे में पांच मिनट के भीतर दमकल का घटनास्थल पर पहुंचना लगभग असंभव हो गया है. साथ ही आग के समय मौजूद दमकल भी अहम कारण होती है. दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम, संकरी गलियां, अवैध पार्किंग, ऊंची इमारतों की बढ़ती संख्या, सीमित फायर स्टेशन, सीमित फायर फाइटर्स आग समय पर ना बुझा पाने के कारण बन रहे हैं. 

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क्यों जल्दी भड़क जाती है आग? 

इसके साथ ही अभिलाश मलिक ने बताया कि वहां एक मिनट से भी कम समय में अपने "फ्लैशओवर पॉइंट" तक पहुंच गई होगी. फ्लैशओवर वह स्थिति होती है जब कमरे में मौजूद लगभग सभी ज्वलनशील वस्तुएं एक साथ आग पकड़ लेती हैं और तापमान 500 से 600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है.

उनके मुताबिक पुरानी इमारतों में फ्लैशओवर होने में 15 से 17 मिनट लग जाते थे, लेकिन आधुनिक घरों और इमारतों में प्लास्टिक, सिंथेटिक फर्नीचर, फोम और कृत्रिम सामग्री के बढ़ते उपयोग के कारण यह समय घटकर 3 से 5 मिनट रह गया है. कई मामलों में यह एक मिनट से भी कम समय में हो सकता है. यानी जिस समयावधि में दमकल को पहुंचना चाहिए, उससे पहले ही आग पूरे कमरे को अपनी चपेट में ले सकती है.

इसके अलावा, स्टाफ की कमी भी फायर सिस्टम कमजोर होने की बड़ी वजह है.  दिल्ली अग्निशमन सेवा ने भी सभी रैंकों में 9123 कर्मियों की परिचालन क्षमता के लिए मंजूरी मांगी है और दिल्ली सरकार को 25 साल की विस्तार योजना सौंपी है. इससे पहले कुछ साल पहले भी सरकार ने माना था कि भारत में फायर सिस्टम में स्टाफ और मशीनों की कमी है. 

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आग से कितनी मौतें हुईं?

दिल्ली में आग

फायर सिस्टम में  स्टाफ की कितनी कमी?
दिल्ली में आग

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