12 अक्टूबर, 1492 को बहामास द्वीप समूह को देखा और यह मान लिया कि वे पूर्वी एशिया पहुंच गए हैं. उनका अभियान दल उसी दिन तट पर उतरा और स्पेन के लिए उस नई जगह पर अपना दावा किया. कोलंबस भारत और पूर्वी एशियाई देशों की खोज पर निकले थे. लेकिन, उन्होंने एक ऐसी धरती पर कदम रखा, जिसे आज पूरी दुनिया अमेरिका के नाम से जानती है. इस तरह भारत की खोज पर निकले कोलंबस एक नई दुनिया में पहुंच गए थे.
क्रिस्टोफर कोलंबस इटली के एक नाविक और खोजकर्ता थे. उन्होंने कई समुद्री यात्राएं की और समुद्री मार्गों को खोजा था. उन्होंने सबसे ज्यादा अटलांटिक महासागर में खोज अभियान चलाया था. इसी दौरान उन्होंने अमेरिका की खोज की. इसके अलावा यूरोप के भी कई अनदेखे हिस्सों तक पहुंचे.
कोलंबस की हमेशा से चाह थी वह एशिया के सोने और मसाले के द्वीपों तक पहुंचने वाले पश्चिमी समुद्री मार्ग की खोज करने जाएं. यानी उनकी इच्छा सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत आने की थी.
दक्षिण एशिया तक पहुंचने के जमीनी रास्तों पर ऑटोमन साम्राज्य का कब्जा था. उस समय यूरोपीय लोगों को दक्षिणी एशिया के लिए कोई सीधा समुद्री मार्ग नहीं पता था. वहीं मिस्र और लाल सागर के रास्ते का मार्ग ऑटोमन साम्राज्य ने यूरोपीय लोगों के लिए बंद कर दिया गया था. दक्षिण एशिया तक पहुंचने वाले सभी भूमि मार्ग ऑटोमन साम्राज्य की सीमा से होकर ही गुजरते थे.
कोलंबस के समय के नाविकों को पृथ्वी की स्थित और महादेशों व सागरों के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी. इस वजह से पूरी दुनिया का नक्शा नहीं बन पाया था. कोलंबस और अन्य नाविकों की यही गणना थी कि पूर्वी एशिया लगभग उसी स्थान पर स्थित होना चाहिए जहां उत्तरी अमेरिका ग्लोब पर स्थित है. उन्हें अभी तक यह नहीं पता था कि प्रशांत महासागर भी पृथ्वी पर मौजूद है.
कोलंबस ने सोचा कि यूरोप और ईस्ट इंडीज की समृद्धि के बीच केवल अटलांटिक महासागर ही है. इसलिए कोलंबस ने पुर्तगाल के राजा जॉन द्वितीय से मुलाकात की और उन्हें अपने इंडिया तक जाने के वेंचर का समर्थन करने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी.तब कोलंबस स्पेन चले गए. वहां राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला ने भी पहले उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया. फिर बाद में जनवरी 1492 में ग्रेनेडा के मूरिश साम्राज्य पर स्पेनिश विजय के बाद, जीत से उत्साहित स्पेनिश सम्राट ने उनकी यात्रा के लिए पैसा देने को सहमत हो गए.
3 अगस्त 1492 को, कोलंबस ने तीन छोटे जहाजों, सांता मारिया, पिंटा और नीना के साथ स्पेन के पालोस से यात्रा शुरू की और 12 अक्टूबर 1492 को वो अमेरिका पहुंच गए. कहा जाता है कि अमेरिका आने के बाद वह बहामास के एक द्वीप पर गए थे. वहां के मूल निवासी उसे गुआनाहानी कहते थे.
आज इसे ही क्यूबा और हिस्पानियोला के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि कोलंबस ने जब क्यूबा को देखा, तो उन्हें लगा कि वह चीन की मुख्य भूमि है और बाद में जब उनका अभियान हिस्पानियोला में उतरा, तो इसके बारे में कोलंबस को लगा कि वह जापान हो सकता है. बाद में उन्होंने अपने 39 आदमियों के साथ वहां एक छोटी सी कॉलोनी स्थापित की.
अपने जीवनकाल के दौरान, कोलंबस ने "नई दुनिया" के लिए कुल चार अभियानों का नेतृत्व किया. इसमें विभिन्न कैरिबियाई द्वीपों, मैक्सिको की खाड़ी और दक्षिण और मध्य अमेरिकी मुख्य भूमि की खोज की गई, लेकिन वह कभी भी अपने मूल लक्ष्य - एशिया के महान शहरों के लिए एक पश्चिमी महासागर मार्ग को पूरा नहीं कर पाए.