scorecardresearch
 
Advertisement
इन्फॉर्मेशन

क्या पौधे सच में मिट्टी से सोना निकाल सकते हैं? जानिए क्या कहती है रिसर्च

photo: Pexels
  • 1/6

हम अक्सर सुनते हैं कि “पैसा पेड़ों पर नहीं उगता”, लेकिन विज्ञान बताता है कि कुछ मामलों में पौधे मिट्टी से धातुएं जरूर खींच सकते हैं. दुनिया भर के वैज्ञानिक इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि क्या पौधों की मदद से मिट्टी में छिपी कीमती धातुओं को बाहर निकाला जा सकता है. इसी प्रक्रिया को Phytomining कहा जाता है. इस तकनीक में ऐसे पौधे लगाए जाते हैं जो मिट्टी से धातु को जड़ों के जरिए सोख लेते हैं और उन्हें अपने तनों और पत्तियों में जमा कर लेते हैं. बाद में इन पौधों को प्रोसेस करके धातु निकाली जा सकती है.
 

Photo: Pexels
  • 2/6

पौधे मिट्टी से धातु कैसे खींचते हैं?
वैज्ञानिकों ने पाया है कि कुछ खास पौधे मिट्टी से बड़ी मात्रा में धातु सोख सकते हैं. ऐसे पौधों को Hyperaccumulator plants कहा जाता है. ये पौधे अपनी जड़ों के जरिए मिट्टी से मेटल को खींचते हैं और उन्हें अपने अंदर जमा कर लेते हैं. जब पौधे पूरी तरह बड़े हो जाते हैं, तब उन्हें काटकर जलाया जाता है और उनकी राख से धातु निकाली जाती है. उदाहरण के लिए Noccaea caerulescens नाम का पौधा जिंक और कैडमियम जैसी धातुओं को बड़ी मात्रा में अपने अंदर जमा कर सकता है.
 

Photo: Pexels
  • 3/6

क्या पौधे सोना भी सोख सकते हैं?
सोना मिट्टी में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और यह आसानी से घुलता भी नहीं है. इसी वजह से पौधों के लिए सीधे सोना खींचना आसान नहीं होता. लेकिन वैज्ञानिकों ने प्रयोगों में पाया है कि अगर मिट्टी में कुछ खास रसायन मिलाए जाएं तो सोना घुलनशील बन सकता है. ऐसी स्थिति में कुछ तेजी से बढ़ने वाले पौधे सोने के बेहद छोटे कणों को जड़ों के जरिए अपने अंदर ले सकते हैं. करीब 15 साल पहले Chris Anderson ने एक प्रयोग में दिखाया था कि Brassica juncea यानी सरसों का पौधा रासायनिक रूप से तैयार मिट्टी से सोने के छोटे कण सोख सकता है.

Advertisement
Photo: Pexels
  • 4/6

रिसर्च में क्या पता चला?
वैज्ञानिकों को कुछ पौधों में सोने के बेहद छोटे कण यानी गोल्ड नैनोपार्टिकल्स भी मिले हैं. उदाहरण के तौर पर Sun Yat-sen University के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया कि कुछ पौधे पर्यावरण से धातुओं के सूक्ष्म कणों को अवशोषित कर सकते हैं. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि पौधे मिट्टी से खनिज और धातुएं कैसे लेते हैं.
 

Photo: Pexels
  • 5/6

खदानों में कैसे हो सकता है इसका इस्तेमाल?
फाइटोमाइनिंग तकनीक का इस्तेमाल खासकर उन जगहों पर किया जा सकता है जहां खदानों में थोड़ा-बहुत सोना या अन्य धातुएं मिट्टी में बच जाती हैं. ऐसी जगहों पर वैज्ञानिक सरसों, सूरजमुखी या तंबाकू जैसे तेजी से बढ़ने वाले पौधे उगाते हैं. जब पौधे बड़े हो जाते हैं तो मिट्टी में खास रसायन मिलाए जाते हैं ताकि धातु घुल सके. इसके बाद पौधे पानी के साथ धातु के कण भी सोख लेते हैं. जब पौधे पूरी तरह बढ़ जाते हैं, तो उन्हें काटकर उनकी प्रोसेसिंग की जाती है और उनमें जमा धातु को निकाला जाता है.

Photo: Pexels
  • 6/6

पर्यावरण के लिए क्यों बेहतर मानी जाती है यह तकनीक?
पारंपरिक खनन में भारी मशीनों और बड़े गड्ढों की जरूरत होती है, जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच सकता है. इसके मुकाबले Phytomining को ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल तरीका माना जाता है. पौधे मिट्टी को स्थिर रखते हैं, जिससे जमीन का कटाव कम होता है. साथ ही इससे खदानों के कचरे या कम गुणवत्ता वाली मिट्टी से भी धातु निकालने की संभावना बनती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक खनन उद्योग को ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद कर सकती है.

Advertisement
Advertisement