
उत्तरकाशी के विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक पर लापता हुई महिला ट्रैकर बबीता पांडे को तलाशते हुए अब महीनाभर होने जा रहा है, लेकिन पहाड़ अब तक कोई जवाब नहीं दे पाए हैं. जो ट्रैक कभी अपनी खूबसूरती और सुकून के लिए जाना जाता था, वही अब सवालों, आशंकाओं और इंतजार का केंद्र बन गया है.
बबीता पांडे की तलाश में प्रशासन, पुलिस एवं राहत एजेंसियों ने खोज अभियान को और तेज कर दिया है. अब खोज अभियान को नए क्षेत्रों तक विस्तार देते हुए गोई क्षेत्र स्थित झील को खाली करने के साथ-साथ आसपास मौजूद भालुओं की संभावित गुफाओं में और दुर्गम स्थानों पर जाकर भी गहन तलाशी ली जा रही है.
गांव वालों ने पहले ही कहा था- भालू दिखे हैं
बता दें कुछ ग्रामीणों ने पहले ही दावा किया कि हाल के दिनों में दयारा क्षेत्र से लगे जंगलों में दो भालुओं के संघर्ष जैसी तेज दहाड़ें सुनाई दी थीं और कुछ स्थानों पर खून जैसे निशान भी देखे गए.यानी लोगों को मानना है कि शायद बबीता को भालू ले गए हों. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी.

सूत्रों के अनुसार ट्रैक रूट, कैंपिंग साइट, ढलानों, जंगलों और संभावित मार्गों की बार-बार जांच की जा चुकी है. यहां तक कि कुछ कठिन क्षेत्रों में विशेष खोज तकनीकों और गहन तलाशी का सहारा लिया गया, लेकिन अब तक कोई निर्णायक संकेत नहीं मिला.
खाली किया जा रही झील का पानी
अब खोज टीम को आशंका है कि झील में युवती से जुड़ा कोई सुराग, मोबाइल फोन या अन्य सामान मिल सकता है. इसी संभावना के आधार पर लगभग साढ़े सात फीट गहरी और करीब 50 मीटर से अधिक चौड़ी झील का पानी निकालने का निर्णय लिया गया. इसके लिए मौके पर दो वाटर पंप लगाए गए हैं और बुधवार शाम तक बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकाला जा चुका था.
खोज अभियान में पुलिस, एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन विभाग सहित अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से जुटी हुई हैं. टीमों द्वारा झील के आसपास के क्षेत्र, जंगलों, खाइयों और कठिन भूभागों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. साथ ही टीम एक बार फिर उन स्थानों को भी खंगाल रही है जहां भालुओं की संभावित गुफाएं होने की संभावना जताई जा रही है. अभियान से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए प्राकृतिक आश्रय स्थलों और वन क्षेत्रों की भी गहन जांच की जा रही है.
किसी दूसरे रास्ते पर निकल गईं बबीता?
प्रशासन का कहना है कि युवती का पता लगाने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों और तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है तथा खोज अभियान लगातार जारी रहेगा. वहीं सोशल मीडिया पर बबीता को लेकर भ्रामक खबरें प्रकाशित होने को लेकर पुलिस सख्त हो गयी है और ऐसे तत्वों पर कार्यवाही करने की बात कह रही है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं खड़ा है- क्या यह केवल एक ट्रैकिंग हादसा है? क्या बबीता किसी दूसरे रास्ते पर निकल गईं? या फिर इस कहानी का वह हिस्सा अभी सामने आना बाकी है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की? इन सवालों के जवाब फिलहाल पहाड़ों की खामोशी में छिपे हैं और पूरा उत्तरकाशी इंतजार कर रहा है.