उत्तराखंड राजभवन में गुरुवार को इतिहास, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम देखने को मिला. राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने पूर्व विभागाध्यक्ष (डिपार्टमेंट ऑफ जर्नलिज्म कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल) डॉ. गिरीश रंजन तिवारी की पुस्तक 'अतीत से वर्तमान तक: नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा' का विमोचन किया.
इसके साथ ही सिद्धार्थ माधव द्वारा विकसित एआई आधारित हेरिटेज एवं टूरिज्म एप का भी लोकार्पण किया गया. इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि यह पुस्तक नैनीताल और राजभवन की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज है. वहीं एआई आधारित एप आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की अभिनव पहल है.
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उन्होंने प्रधानमंत्री के "विकास भी, विरासत भी" मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और तकनीकी नवाचार दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना समय की जरूरत है.
शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होगी पुस्तक
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि यह पुस्तक केवल राजभवन के निर्माण का इतिहास नहीं बताती, बल्कि नैनीताल, उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और उस दौर के सामाजिक परिवेश का भी विस्तृत दस्तावेज है.
उन्होंने कहा कि इतिहास प्रेमियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए यह पुस्तक बेहद उपयोगी साबित होगी. साथ ही उन्होंने घोषणा की कि इस पुस्तक को विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इससे लाभ उठा सकें.
राज्यपाल ने यह भी बताया कि पुस्तक की पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की जा चुकी है. अब इसकी प्रतियां प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों को भी भेजी जाएंगी.
राज्यपाल के पैतृक क्षेत्र के कारीगरों का भी रहा योगदान
पुस्तक के लेखक डॉ. गिरीश रंजन तिवारी ने अपने शोध का उल्लेख करते हुए बताया कि राजभवन के निर्माण में पंजाब के रामगढ़िया सिख कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. खास बात यह है कि ये कारीगर राज्यपाल गुरमीत सिंह के पैतृक क्षेत्र से जुड़े थे.
उन्होंने बताया कि ब्रिटिश वास्तुकारों द्वारा डिजाइन किए गए इस भव्य भवन का निर्माण भारतीय शिल्पकारों और मजदूरों ने किया था. वास्तुकला के लिहाज से यह भवन इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस की तुलना में स्कॉटलैंड के बालमोरल पैलेस से अधिक समानता रखता है.
डॉ. तिवारी ने कहा कि यह शोध राजभवन के इतिहास के कई ऐसे पहलुओं को सामने लाता है, जिनकी जानकारी अब तक बहुत कम लोगों को थी.
AI एप से डिजिटल रूप में जुड़ेगी उत्तराखंड की विरासत
समारोह के दौरान सिद्धार्थ माधव द्वारा विकसित एआई आधारित हेरिटेज एवं टूरिज्म एप भी लॉन्च किया गया. इस एप में हेरिटेज गाइड, स्मार्ट ट्रैवल प्लानर, इंटरएक्टिव टाइम कैप्सूल और 'हिडन जेम्स' जैसे कई आधुनिक फीचर शामिल किए गए हैं.
राज्यपाल ने कहा कि यह एप उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को डिजिटल माध्यम से देश और दुनिया के लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इससे पर्यटन को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
इस कार्यक्रम में सूचना विभाग, कुमाऊं विश्वविद्यालय, राजभवन के अधिकारी, शिक्षाविद्, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे.