उत्तराखंड में दर्ज मुकदमों की FIR आम लोगों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने वाला पुलिस का सार्वजनिक पोर्टल लंबे समय से बंद था.इससे शिकायतकर्ताओं और उनके वकीलों को केस की FIR हासिल करने में दिक्कत आ रही थी.
इसी मामले को लेकर हरिद्वार के नेशनल पब्लिक ट्रस्ट ने नैनीताल हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिका में मांग की गई थी कि पोर्टल दोबारा शुरू किया जाए और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक दर्ज FIR सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए.
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई. 18 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस विभाग से सवाल किया था कि जब FIR सार्वजनिक करने की व्यवस्था तय है, तो पोर्टल बंद क्यों है. कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी थी कि व्यवस्था जल्द ठीक नहीं हुई तो डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में बुलाया जा सकता है.
पुलिस के दावे पर उठे सवाल, कोर्ट में हुआ लाइव डेमो
बुधवार की सुनवाई में पुलिस ने बताया कि तकनीकी समस्या दूर कर दी गई है और अब FIR Citizen Portal और देवभूमि मोबाइल ऐप से डाउनलोड की जा सकती है. हालांकि, पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया था कि उन्होंने उसी सुबह ऐप पर लॉगिन करने की कोशिश की, लेकिन ऐप काम नहीं कर रहा था. इसके बाद कोर्ट ने सिर्फ दावा सुनने के बजाय पुलिस को ऐप चलाकर दिखाने को कहा.
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इसके बाद पुलिस की तकनीकी टीम कोर्ट पहुंची और एंड्रॉयड फोन पर पूरी प्रक्रिया करके दिखाई. ऐप डाउनलोड करने के बाद जरूरी जानकारी भरनी होगी और सेल्फी अपलोड करनी होगी. इसके बाद संबंधित FIR देखी और डाउनलोड की जा सकेगी.
लाइव डेमो के बाद PIL निपटारा
अदालत के सामने पूरी प्रक्रिया काम करती दिखी. इसके बाद हाई कोर्ट ने माना कि FIR तक पहुंचने के लिए अब वैकल्पिक ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध है. इसी आधार पर जनहित याचिका का समाधान कर दिया गया.
अब उत्तराखंड में नागरिक Citizen Portal और देवभूमि ऐप के जरिए संबंधित FIR ऑनलाइन देख और डाउनलोड किए जा सकेंगे. जिस सुविधा को लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था, उसका रास्ता फिलहाल मोबाइल ऐप और नए ऑनलाइन सिस्टम से खुल गया है.