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उत्तराखंड की अंतिम वोटर लिस्ट जारी... SIR के बाद 71.58 लाख मतदाता, 12.70 लाख नाम कम

उत्तराखंड में SIR-2026 के बाद 3 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी हुई, जिसमें 71,58,949 मतदाता हैं. जनवरी 2025 की सूची के 84,29,459 मतदाताओं के मुकाबले 12,70,510 यानी 15.07 प्रतिशत कम हुए हैं. ड्राफ्ट सूची से 25,164 नाम बढ़े, लेकिन शुरुआती 79,60,762 से 8,01,813 कम हैं. 8,26,977 मतदाता अनुपस्थित, शिफ्ट या मृत श्रेणी में रहे.

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उत्तराखंड में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो गई है (File Photo: ITG)
उत्तराखंड में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो गई है (File Photo: ITG)

उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी हो गई है. अंतिम सूची में राज्य में कुल 71,58,949 मतदाता दर्ज हुए हैं. प्रदेश में इस अभियान की शुरुआत 8 जून 2026 को हुई थी. पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत तैयार ड्राफ्ट मतदाता सूची 14 जुलाई 2026 को प्रकाशित की गई, जिसके बाद मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया.

प्राप्त दावों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 3 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है. इस अभियान को लेकर कई बार विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन कर आपत्तियों को लेकर सवाल भी उठाए. लेकिन अब फाइनल रोल आने से चुनाव आयोग की स्थिति स्पष्ट हुई है. प्रदेश में 12.70 लाख से ज़्यादा वोटर कम हुए हैं.

ड्राफ्ट से पहले 84.30 लाख, एसआईआर में रह गए 71.58 लाख

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 6 जनवरी 2025 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 84,29,459 सामान्य मतदाता दर्ज थे. इनमें 43,64,667 पुरुष, 40,64,488 महिलाएं और 304 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल थे.

2025 की सूची की तुलना में एसआईआर-2026 के बाद आपके उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 71,58,949 सामान्य मतदाता रह गए हैं. इस तरह समान श्रेणी यानी सामान्य मतदाताओं की तुलना करने पर 12,70,510 मतदाताओं की कटौती सामने आई है. यह लगभग 15.07 प्रतिशत है.

8,26,977 मतदाताओं को ASDD श्रेणी में रखा गया. ASDD का अर्थ ऐसे मतदाताओं से है, जिनके संबंध में अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत होने जैसी स्थिति सामने आई थी. यह संख्या कुल शुरुआती मतदाताओं की करीब 10.39 प्रतिशत है.

अंतिम सूची में कुछ नाम वापस जुड़े, लेकिन कुल संख्या फिर भी काफी कम

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ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद मतदाताओं को अपने नाम और रिकॉर्ड की जांच करने तथा दावे और आपत्तियां दाखिल करने का मौका दिया गया. इस प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में 71,58,949 मतदाता दर्ज हुए. यानी ड्राफ्ट सूची के 71,33,785 के मुकाबले अंतिम सूची में 25,164 मतदाताओं की शुद्ध बढ़ोतरी हुई.

लेकिन इस आंकड़े को SIR से पहले के मुकाबले मतदाताओं की वृद्धि नहीं माना जा सकता. वास्तविक तस्वीर यह है कि 79,60,762 से घटकर अंतिम सूची 71,58,949 पर पहुंची है, यानी एसआईआर की शुरुआती संख्या के मुकाबले 8,01,813 मतदाता कम हैं. दूसरे शब्दों में, दावे-आपत्तियों के दौरान कुछ नाम दोबारा जुड़े या रिकॉर्ड में बदलाव हुए, लेकिन इससे शुरुआती सूची और अंतिम सूची के बीच हुई बड़ी कमी पूरी नहीं हुई.

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जिलों में क्या है स्थिति?

लोकसभा चुनाव 2024 और एसआईआर के बाद जिलावार तस्वीर

2024 के लोकसभा चुनाव में दर्ज मतदाताओं की संख्या और एसआईआर-2026 के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची की तुलना करें तो उत्तराखंड के सभी जिलों में मतदाताओं की संख्या में कमी दिखाई देती है। राज्य स्तर पर 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान कुल 84,29,549 मतदाता दर्ज थे, जबकि एसआईआर के बाद अंतिम सूची में यह संख्या 71,58,949 रह गई है. यानी दोनों सूचियों के बीच कुल 12,70,510 मतदाताओं का अंतर है. जिलावार आंकड़ों में भी मैदानी और पर्वतीय, दोनों क्षेत्रों में यह कमी दिखाई देती है.

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ऊधमसिंह नगर में 2024 लोकसभा चुनाव के समय 14,02,573 मतदाता दर्ज थे. एसआईआर के बाद अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 11,47,030 रह गई. यानी जिले में 2,55,543 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई। यह 13 जिलों में संख्या के लिहाज से सबसे बड़ी गिरावट है.

देहरादून में लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान 14,36,362 मतदाता थे. एसआईआर के बाद अंतिम सूची में 11,94,797 मतदाता रह गए. इस तरह जिले में 2,41,565 मतदाताओं की कमी हुई. हरिद्वार में 2024 में 14,49,488 मतदाता थे, जो एसआईआर के बाद घटकर 12,45,458 रह गए। यानी यहां 2,04,030 मतदाता कम हुए.

नैनीताल में 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान 8,19,385 मतदाता दर्ज थे. एसआईआर के बाद अंतिम सूची में इनकी संख्या 6,97,547 रह गई. यानी जिले में 1,21,838 मतदाताओं की कमी हुई. इस तरह केवल इन चार जिलों - ऊधमसिंह नगर, देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल में ही लोकसभा चुनाव 2024 की तुलना में करीब 8.23 लाख मतदाताओं का अंतर दिखाई देता है.

Form-6: 1.46 लाख आवेदन आए, 1.29 लाख स्वीकार

दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया में Form-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए. विभाग की तालिका में Form-6 के साथ Form-8 के शिफ्टिंग मामलों को भी शामिल किया गया है. इस संयुक्त श्रेणी में कुल 1,46,511 आवेदन प्राप्त हुए.

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इनमें से 1,29,872 आवेदन स्वीकार किए गए, जबकि 16,639 आवेदन खारिज हुए. यानी प्राप्त आवेदनों में करीब 88.64 प्रतिशत आवेदन स्वीकार किए गए. इसका सीधा मतलब यह है कि ड्राफ्ट के बाद बड़ी संख्या में ऐसे पात्र लोगों के नाम अंतिम सूची में शामिल हुए, जिनके दावे प्रक्रिया में स्वीकार किए गए.

Form-7: करीब 1.94 लाख मामलों में 1.04 लाख वोट कट गए

Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने या किसी नाम के शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है. निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार किसी मतदाता की प्रविष्टि पर निर्धारित आधारों पर आपत्ति Form-7 के जरिए की जा सकती है.

SIR के दौरान विभाग की तालिका के अनुसार Form-7 से संबंधित कुल 1,93,890 मामले दर्ज हुए. इनमें 96,704 मामले Form-7 के अंतर्गत लिए गए, जबकि 97,186 मामलों में मतदाताओं को अंतिम सूची के लिए अयोग्य यानी “Marked Ineligible for Final” किया गया. वहीं 96,704 आपत्तियों में चुनाव आयोग ने 89,182 आपत्तियों को निरस्त कर दिया! 7,522 आपत्तियां स्वीकार हो गईं.

ASD सूची से सामने आया था बड़ा आधार

पुनरीक्षण से पहले और ड्राफ्ट के बीच 8,26,977 मतदाताओं का अंतर इस पूरी प्रक्रिया का सबसे बड़ा आंकड़ा है. विभाग की ASD तालिका में इन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत श्रेणी से जोड़ा गया है. जिलेवार देखें तो ऊधमसिंह नगर में 1,77,673, देहरादून में 1,86,008, हरिद्वार में 1,30,203 और नैनीताल में 71,810 ऐसे मतदाता दर्ज थे। ये चार जिले मिलकर ASD आंकड़े का बड़ा हिस्सा बनाते हैं.

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पर्वतीय जिलों में भी यह संख्या कम नहीं रही. अल्मोड़ा में 55,485, पौड़ी गढ़वाल में 51,359, टिहरी गढ़वाल में 43,625 और चमोली में 23,436 मतदाता ASD श्रेणी में थे। राज्य स्तर पर यह संख्या 8,26,977, यानी शुरुआती मतदाता सूची का 10.39 प्रतिशत थी.

अंतिम सूची में पुरुष और महिला मतदाताओं का आंकड़ा

अंतिम मतदाता सूची में 37,37,701 पुरुष, 34,21,036 महिलाएं और 212 थर्ड जेंडर मतदाता दर्ज हैं. इस तरह कुल संख्या 71,58,949 होती है. ड्राफ्ट सूची में पुरुष मतदाताओं की संख्या 37,23,614, महिलाओं की 34,09,954 और थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 217 थी.

इस तुलना से पता चलता है कि अंतिम चरण में पुरुष मतदाताओं की संख्या में 14,087 और महिला मतदाताओं की संख्या में 11,082 की शुद्ध बढ़ोतरी हुई, जबकि थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 5 कम हुई। तीनों को मिलाकर ड्राफ्ट से अंतिम सूची का शुद्ध अंतर 25,164 बैठता है.

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