
झीलों की नगरी नैनीताल में करीब एक साल से बंद पड़ी लोअर माल रोड अब सिर्फ सड़क का मुद्दा नहीं रह गई है. यह मामला शहर के कारोबार, पर्यटन और रोजमर्रा की आवाजाही के साथ-साथ धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपरा से भी जुड़ गया है. सितंबर में मां नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण के लिए निकलना है. ऐसे में सड़क की मौजूदा स्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या मां का डोला इस बार भी उसी ऐतिहासिक रास्ते से गुजरेगा या रास्ता बदलना पड़ेगा ?
लोअर माल रोड को नैनीताल की पहचान और शहर की लाइफलाइन माना जाता है. करीब एक साल से सड़क के बंद होने के बाद कई बार निरीक्षण हुए, बैठकें हुईं और सड़क खोलने को लेकर समयसीमा तय की गई. लेकिन अब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है. इसी को लेकर स्वतंत्रता दिवस से मां नैना देवी नैनीताल व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने लोअर माल रोड पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है. धीरे-धीरे यह धरना व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों की आवाज का केंद्र बनता जा रहा है.
एक साल से बंद सड़क, अब बढ़ता इंतजार
लोअर माल रोड लंबे समय से बंद है. इस दौरान सड़क को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई बार कवायद हुई. अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया, बैठकों में समाधान को लेकर चर्चा हुई और अलग-अलग समय पर सड़क को लेकर उम्मीदें भी जगीं. लेकिन लोगों का कहना है कि जमीन पर वह बदलाव दिखाई नहीं दिया, जिसका उन्हें इंतजार था. व्यापारियों के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि माल रोड नैनीताल के पर्यटन और कारोबार से सीधे जुड़ी है. पर्यटक शहर की पहचान मानी जाने वाली इस सड़क से होकर गुजरते हैं और आसपास का व्यापार भी इसी आवाजाही पर निर्भर करता है. एक साल का लंबा इंतजार अब स्थानीय लोगों के धैर्य की परीक्षा बन गया है.
धरने पर जुटने लगे व्यापारी और स्थानीय लोग
स्वतंत्रता दिवस से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना अब लगातार समर्थन जुटा रहा है. व्यापारियों के साथ स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन और नगरपालिका के सभासद भी धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन जता रहे हैं. धरने का संदेश साफ है कि अब सिर्फ आश्वासन से बात नहीं बनेगी. लोगों की मांग है कि सड़क की समस्या का स्थायी समाधान जमीन पर दिखाई देना चाहिए. व्यापार मंडल अध्यक्ष पुनीत टंडन ने भी साफ कर दिया है कि इस बार किसी नई तारीख या मौखिक भरोसे के आधार पर आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा. उनका कहना है कि जब तक सड़क को लेकर ठोस काम और समाधान नजर नहीं आता, धरना जारी रहेगा.

सबसे बड़ा सवाल: मां नंदा-सुनंदा का डोला कहां से गुजरेगा
लोअर माल रोड की मौजूदा स्थिति के बीच अब धार्मिक परंपरा का सवाल भी सामने आ गया है. हर वर्ष मां नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण करता है. यह आयोजन नैनीताल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है. मां के डोले के साथ लोगों की आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा भी चलती है. सितंबर में जब डोला नगर भ्रमण के लिए निकलेगा, तब तक अगर लोअर माल रोड की स्थिति सामान्य नहीं हुई तो मार्ग को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. स्थानीय लोगों के सामने यही चिंता है कि कहीं सड़क बंद होने की वजह से मां नंदा-सुनंदा के डोले को भी अपना पारंपरिक मार्ग बदलना न पड़े. यह सिर्फ रास्ते का बदलाव नहीं होगा. लोगों की भावनाओं में इस ऐतिहासिक मार्ग की अपनी जगह है. इसलिए सड़क खुलने का इंतजार अब धार्मिक परंपरा से भी जुड़ गया है.
कई बड़े अधिकारियों ने किया निरीक्षण
लोअर माल रोड की समस्या प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने नई नहीं है. कुमाऊं कमिश्नर, जिलाधिकारी, सांसद और विधायक तक मौके का निरीक्षण कर चुके हैं. निरीक्षण के दौरान समाधान और सड़क खोलने को लेकर उम्मीदें बनीं. समयसीमा भी सामने आई. लेकिन करीब एक साल बाद भी सड़क पूरी तरह नहीं खुल सकी. यही वजह है कि अब स्थानीय लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके की स्थिति देख चुके हैं तो फिर समस्या के स्थायी समाधान में देरी क्यों हो रही है? लोगों का कहना है कि हर बार नई तारीख मिलने से अब भरोसा कायम करना मुश्किल हो रहा है. उन्हें अब तारीख नहीं, काम दिखाई देना चाहिए.
दरारें बढ़ने का दावा, अपर माल रोड को लेकर भी चिंता
व्यापार मंडल अध्यक्ष पुनीत टंडन का कहना है कि करीब एक साल के दौरान सड़क के एक छोटे हिस्से का भी स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. उनके मुताबिक सड़क की दरारें लगातार बढ़ रही हैं. अगर समय रहते समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो इसका असर आने वाले समय में अपर माल रोड तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है. यही चिंता स्थानीय लोगों और व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी है. उनका कहना है कि अभी समस्या जिस हिस्से तक सीमित है, उसे समय रहते ठीक नहीं किया गया तो भविष्य में इसका दायरा बढ़ सकता है.
नैनीताल आने वाला पर्यटक माल रोड को शहर की पहचान के तौर पर देखता है. यहां की झील, आसपास का बाजार और माल रोड का वातावरण शहर की तस्वीर का हिस्सा हैं. इसीलिए लंबे समय से सड़क बंद रहने का असर सिर्फ आवाजाही तक सीमित नहीं है. व्यापारियों के लिए यह रोजमर्रा की चिंता है, जबकि स्थानीय नागरिकों के लिए यह शहर की व्यवस्था और भविष्य से जुड़ा सवाल है. इसके साथ अब धार्मिक आयोजन भी सामने है. मां नंदा-सुनंदा का डोला इसी मार्ग से जुड़ी परंपरा का हिस्सा रहा है. ऐसे में सितंबर करीब आने के साथ सड़क का मुद्दा और संवेदनशील होता जा रहा है.
अब आश्वासन नहीं, काम का इंतजार
करीब एक साल से चली आ रही इस समस्या के बीच अब नैनीताल के लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है. क्या फिर कोई नई डेडलाइन मिलेगी? क्या एक और निरीक्षण होगा? या इस बार सड़क पर वास्तव में काम दिखाई देगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे. लेकिन सितंबर में मां नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण के लिए निकलने से पहले सड़क का समाधान होना स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद है. नैनीताल चाहता है कि लोअर माल रोड जल्द खुले, शहर की आवाजाही सामान्य हो और वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा भी उसी मार्ग से आगे बढ़े. फिलहाल धरना जारी है और स्थानीय लोगों की मांग भी स्पष्ट है अब सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए. सड़क पर काम चाहिए. नई तारीख नहीं, जमीन पर नतीजा चाहिए.