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चारधाम यात्रा: आज खुलेंगे गंगोत्री–यमुनोत्री के कपाट, जानें कब से कर सकेंगे बद्रीनाथ-केदारनाथ के दर्शन?

आज गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे. इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहेंगे.

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केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे. (Photo: ITG)
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे. (Photo: ITG)

अक्षय तृतीया के अवसर पर उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 का विधिवत शुभारंभ होने जा रहा है. आज गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे. इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहेंगे.

प्रशासन ने यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए कई इंतजाम किए हैं. बता दें, यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, जिसे श्रद्धालु ऑनलाइन या हरिद्वार, ऋषिकेश, विकासनगर में ऑफलाइन माध्यम से कराना होगा.

गंगोत्री और यमुनोत्री के बाद केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे. केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे. जिसके साथ ही चारों धाम की यात्रा पूरी तरीके से शुरू हो जाएगी.

हर साल की तरह इस बार भी चारधाम यात्रा में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु के शामिल होने वाले हैं. मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया-संवारा गया है और रंग-बिरंगे फूलों से मंदिर की सुंदरता को और निखारा गया है. हाल ही में हुई बर्फबारी के चलते गंगोत्री के आसपास की पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गई हैं.

चारधाम की विशेषता

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यमुनोत्री धाम को यमुना नदी का उद्गम स्थल माना जाता है, और यहां यमुनोत्री देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है. माना जाता है कि चारधाम यात्रा की शुरुआत यहीं से होती है. इसके साथ ही गंगोत्री धाम जिसे गंगा नदी का उद्गम स्थल माना जाता है. यहां मां गंगा के मंदिर में भक्त दर्शन करते हैं. हिमालय की गोद में बसे इस धाम की प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को काफी आकर्षित करती है.

वहीं, विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, भगवान शिव को समर्पित है. साथ ही बद्रीनाथ धाम जो भगवान विष्णु को समर्पित है. अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर अत्यंत पावन माना जाता है. जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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