उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर सेवा की फर्जी बुकिंग के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का स्पेशल टास्क फोर्स ने बड़ा खुलासा किया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर चारधाम यात्रा को साइबर अपराध मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एसटीएफ ने बिहार के नालंदा जिले से दो शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. जांच में देशभर में फैले साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग भी सामने आए हैं.
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए एंटी हेली फ्रॉड सेल लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, संदिग्ध वेबसाइटों और डिजिटल माध्यमों पर निगरानी कर रही थी. इसी दौरान जानकारी मिली कि एक संगठित गिरोह फर्जी फेसबुक पेज, व्हाट्सएप नंबर और बैंक खातों का इस्तेमाल कर खुद को अधिकृत हेलीकॉप्टर सेवा एजेंट बताकर लोगों को ठग रहा है. इस मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई.
तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच और मोबाइल डेटा के आधार पर एसटीएफ की टीम ने बिहार में करीब एक सप्ताह तक अभियान चलाया. इसके बाद बिहार शरीफ निवासी दीपक कुमार और शेखपुरा निवासी विजित कुमार उर्फ मिकी को गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने शिकायतकर्ता को फर्जी हेलीकॉप्टर टिकट उपलब्ध कराकर लाखों रुपये की ठगी की थी. इसके बाद मुकदमे में अन्य धाराएं भी बढ़ाई गई हैं.
चारधाम हेली टिकट के नाम पर साइबर ठगी
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई अहम बातें स्वीकार कीं. उन्होंने बताया कि गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए श्रद्धालुओं से संपर्क करता था. वीआईपी दर्शन, तुरंत कन्फर्म टिकट और सीमित सीटें उपलब्ध जैसे संदेश भेजकर लोगों को झांसे में लिया जाता था. ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी, जिन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. इसके बाद एटीएम से नकदी निकाली जाती थी और रकम गिरोह के सदस्यों के बीच 15 से 25 प्रतिशत कमीशन के आधार पर बांटी जाती थी.
जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह के तार बिहार के नालंदा में दर्ज एक अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामले से भी जुड़े हैं. इसके अलावा शिव कुमार पासवान उर्फ फुलटून नाम के एक अन्य आरोपी की भूमिका भी सामने आई है, जिसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. अन्य फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है.
एसटीएफ की जांच में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है. पूछताछ के दौरान कुछ नाबालिग बच्चों से भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि साइबर अपराधी नाबालिगों का भी इस्तेमाल इस तरह की ठगी में कर रहे हैं. इसके अलावा आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अनजान लोगों के मोबाइल हॉटस्पॉट और इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करते थे ताकि उनकी लोकेशन और डिजिटल पहचान ट्रेस न हो सके.
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों से जुड़ी कई शिकायतें दर्ज मिली हैं. मोबाइल फोन और व्हाट्सएप चैट की जांच में बैंक खातों, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड के आदान-प्रदान से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं. प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और अलग-अलग जगहों से साइबर ठगी को अंजाम दिया जा रहा था.
पुलिस ने दो आरोपियों को अरेस्ट किया
एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से पांच बैंक पासबुक, एक चेकबुक, दो मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड, सिम कार्ड से जुड़ी सामग्री, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं. एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को साइबर ठगी से बचाने के लिए एंटी हेली फ्रॉड सेल लगातार कार्रवाई कर रही है. अब तक 300 से ज्यादा फर्जी सोशल मीडिया लिंक और 100 से ज्यादा संदिग्ध व्हाट्सएप नंबर ब्लॉक कराए जा चुके हैं. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि हेलीकॉप्टर टिकट की बुकिंग केवल अधिकृत पोर्टल और सरकारी वेबसाइट से ही करें. किसी भी अनधिकृत लिंक या एजेंट के झांसे में न आएं.