scorecardresearch
 

सोनभद्र: सियासी बढ़त ले गईं प्रियंका, बैकफुट पर योगी सरकार और सपा-बसपा

सोनभद्र नरसंहार मामले के पीड़ितों से मिलने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने जिस तरह के तेवर दिखाए हैं, उससे सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष तकबैकफुट पर हैं. सीएम योगी रविवार को सोनभद्र पहुंचे हैं तो सपा इस मुद्दे को धार देने में जुटी है, लेकिन इस मामले का क्रेडिट प्रियंका गांधी ले गई हैं. 

Advertisement
X
सोनभद्र नरसंहार के पीडि़त परिवारों से मिलती प्रियंका गांधी (फोटो-INC)
सोनभद्र नरसंहार के पीडि़त परिवारों से मिलती प्रियंका गांधी (फोटो-INC)

कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीन पर कब्जे को लेकर हुए नरसंहार के पीड़ितों से मिलने के लिए 26 घंटे तक जद्दोजहद करती रहीं. प्रियंका ने पीड़ितों से मिलने के लिए जिस तरह के तेवर दिखाए हैं, उससे योगी सरकार बैकफुट पर आ गई. उसी का नतीजा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज यानी रविवार को सोनभद्र पीड़ितों से मिलने पहुंचे. दूसरी ओर सपा-बसपा भी अब इस मुद्दे को धार देने की कवायद में जुट गए हैं. लेकिन, प्रियंका सोनभद्र मामले पर सियासी बढ़त लेने में कामयाब रही हैं.

बता दें कि सोनभद्र के घोरावल के उम्भा गांव में बुधवार को जमीन कब्जाने को लेकर नरसंहार हुआ. इस घटना में 10 लोगों की हत्या कर दी गई और 28 लोग घायल हो गए. इस घटना को लेकर प्रियंका गांधी फौरन एक्शन में आ गईं. योगी सरकार को घेरते हुए प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, 'बीजेपी राज में अपराधियों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि दिन-दहाड़े हत्याएं हो रही हैं. सोनभद्र के उम्भा गांव में भू-माफियाओं ने महिलाओं और आदिवासियों की सरेआम हत्या ने दिल दहला दिया. प्रशासन-प्रदेश के मुखिया और मंत्री सब सो रहे हैं. क्या ऐसे बनेगा अपराध मुक्त प्रदेश?'

Advertisement

इसके बाद प्रियंका गांधी ने घटना के दिन ही यूपी में पार्टी के विधायक अजय सिंह लल्लू और पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल को सोनभद्र भेजा. घटना के तीसरे दिन खुद पीड़ितों से मिलने प्रियंका गांधी सोनभद्र के लिए निकलीं. प्रियंका वाराणसी पहुंचीं और सीधे सोनभद्र नरसंहार में गंभीर रुप से घायलों से मिलने ट्रामा सेंटर निकल गईं. उन्होंने घायलों का हाल-चाल जाना और उनसे बात की.

प्रियंका गांधी यहीं नहीं रुकीं और पीड़ितों के परिवारवालों से मिलने के लिए ट्रामा सेंटर से सोनभद्र के लिए रवाना हुईं. मिर्जापुर में प्रवेश करते ही पुलिस प्रशासन ने उनका काफिला रोक दिया. वहां अफसरों से हल्की नोकझोंक के बाद प्रियंका गांधी कांग्रेस समर्थकों संग सड़क पर बैठ गईं. इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया और एसडीएम खुद अपनी गाड़ी से उन्हें चुनार गेस्टहाउस ले गए. 

प्रशासन के लाख समझाने के बाद भी प्रियंका गांधी पीड़ितों से मिलने के लिए अड़ी रहीं. प्रियंका के तेवर से योगी सरकार के पसीने छूट गए. यही वजह रही कि 26 घंटे के जद्दोजहद के बाद प्रियंका गांधी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और कांग्रेस की तरफ से प्रत्येक मृतक के परिवार को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने का एलान किया. प्रियंका के सोनभद्र जाने के बाद अब पीड़ितों से मिलने के योगी आदित्यनाथ पहुंचे हैं. जबकि समाजवादी पार्टी ने 23 जुलाई से सोनभद्र में न्याय यात्रा निकालने जा रही है, जिसका नेतृत्व सपा विधायक दल के नेता राम गोविंद चौधरी करेंगे.

Advertisement

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती सोनभद्र मामले को सिर्फ प्रेस कान्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए से उठाने की कवायद की है. इस तरह से यूपी के दोनों प्रमुख पार्टियों के नेताओं से आगे प्रियंका गांधी निकल गई हैं. वरिष्ठ पत्रकार शकील अख्तर कहते हैं कि सोनभद्र मामले में प्रियंका गांधी ने पहल करके इस मामले का क्रेडिट अपने नाम कर लिया है. अब सीएम योगी आदित्यनाथ और किसी दूसरे नेता के वहां जाने को औपचारिकता माना जा सकता है.

अपने इस कदम से प्रियंका हताश-नाउम्मीद कांग्रेसियों में उत्साह भरने में कामयाब रही हैं. बीजेपी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों में कांग्रेस को फिलहाल बढ़त भी दिला गई हैं. प्रियंका गांधी ने चुनार के किले में शनिवार को सोनभद्र में मारे गए लोगों के परिवारों से मिलने के बाद कहा कि वह अपने मकसद में कामयाब रहीं. यूपी में करीब 30 साल से हाशिए पर चल रही कांग्रेस को संजीवनी देने की उनकी कोशिश इस मायने में कामयाब होती दिखी कि दो दिन प्रदेश के कई जिलों में कांग्रेसी सड़क पर उतरते दिखे. नेताओं में प्रियंका के संघर्ष में शामिल होने की होड़ दिखी.  

हालांकि शकील अख्तर कहते हैं कि प्रियंका गांधी ने सोनभद्र के जरिए अभी मोर्चा जीता है, जंग नहीं. मौजूदा समय में मोदी-योगी बहुत मजबूत स्थिति में हैं. ऐसे में कांग्रेस को अभी अपनी जगह बनाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी, लेकिन सवाल यह है कि प्रियंका के पीछे क्या कांग्रेस के सिपहसलार सड़क पर उतरकर संघर्ष करने के लिए तैयार हैं? क्योंकि कांग्रेसी हमेशा इस उम्मीद में रहते हैं कि गांधी परिवार संघर्ष करे और वो राजनीतिक फायदा उठाएं.

Advertisement

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement