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दलितों के घर भोजन कैंपेन में साधु-संतों को भी शामिल करेगा संघ

आरएसएस ने 'सामाजिक समरसता और सदभाव यात्रा' के नाम से अभियान शुरु करने का फैसला किया है. संघ इस अभियान से पश्चिम उत्तर प्रदेश के इलाके में चलाएगा.

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साधु संतों के साथ मोहन भागवत (फाइल फोटो)
साधु संतों के साथ मोहन भागवत (फाइल फोटो)

बीजेपी इन दिनों दलितों को साधने के लिए हर संभव कोशिश में जुटी है. इस कड़ी में बीजेपी विधायक और सांसद दलितों के घर भोजन और रात्रि विश्राम कर रहे हैं. बीजेपी के बाद अब आरएसएस के सेवा विभाग ने साधु-संतों के जरिए दलितों का दिल जीतने के लिए अभियान शुरू करने जा रही है.

बता दें कि पश्चिम यूपी में दलितों की बड़ी आबादी है. पिछले दिनों एससी\एसटी एक्ट के संशोधन वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों संगठनों ने 'भारत बंद' किया था. इन सबके लिए दलितों ने मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया था. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आरएसएस ने 'सामाजिक समरसता और सदभाव यात्रा' के नाम से अभियान शुरू करने का फैसला किया है. संघ इस अभियान को पश्चिम उत्तर प्रदेश के इलाके में चलाएगा.

वृंदावन में मंगलवार को आरएसएस की हुई दो दिवसीय 'चिंतक बैठक' में इस अभियान को चलाने का निर्णय किया गया. 7 मई से हापुड़ से प्रमुख मंदिरों के साधु संत इस कार्यक्रम का आगाज करेंगे. वे सात दिनों तक आस पास के जिलों के दलित बस्तियों में जाएंगे. सूत्रों के माने तो ये साधु संत उन गांव को पहली प्राथमिकता देंगे, जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर और गौतम बुद्ध की मूर्तियां हैं.

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स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ताओं के साथ साधु संत बाबा साहब और गौतम बुद्ध की मूर्तियों पर माल्यार्पण करेंगे और श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके जरिए वे हिंदुओं की सामाजिक समरसता और एकता का प्रचार करेंगे. इतना ही नहीं वे दलित के घर नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात्रिभोज करेंगे.

संघ के सेवा विभाग के प्रमुख गंगाराम ने बताया कि जाति के बीच मतभेदों की समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या अधिक गंभीर है. उन्होंने कहा कि संत उन स्थानों पर भी जाएंगे जहां अंबेडकर और बुद्ध की मूर्तियां स्थापित हैं और आरएसएस के स्वयंसेवक उनके साथ होंगे.

वृंदावन बैठक में कार्यकर्ताओं ने चर्चा की कि संतों को खुद को हिंदुओं की एकता के लिए प्रचार करना चाहिए. उन्हें मंदिर तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि इस तरह के अभियानों में भाग लेना चाहिए. मुजफ्फरनगर, बरेली, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुरादाबाद जिलों के संतों की बैठक में ये फैसला लिया गया है.  

उन्होंने बताया कि 50 से अधिक प्रमुख संतों ने बैठक में भाग लिया. उन्होंने हिंदू समाज के विभाजन के बारे कती चिंताओं पर सवाल उठाया. ऐसे में यदि संत गांवों का दौरा करेंगे और समाज के वंचित वर्गों के साथ भोजन करेंगे, तो यह हिंदुओं की एकता के लिए प्रभावी संदेश जाएगा.

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