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दिल्ली में सर्व धर्म सम्मेलन को लेकर आरएसएस और कट्टरपंथी सिख संगठन आमने-सामने

राष्ट्रीय सिख संगत और कट्टरपंथी सिख संगठनों के बीच पहले से ही 36 का आंकड़ा रहा है. एक तरफ आरएसएस राष्ट्रीय सिख संगत के जरिए पंजाब में आरएसएस की शाखाओं का प्रसार करना चाहता है. वहीं दूसरी ओर कट्टरपंथी सिख संगठन इस कोशिश को सिख विरोधी करार दे चुके हैं.

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दल खालसा के प्रमुख हरपाल सिंह चीमा दल खालसा के प्रमुख हरपाल सिंह चीमा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सिख इकाई राष्ट्रीय सिख संगत और कट्टरपंथी सिख संगठन दल खालसा के बीच 25 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित किए जा रहे सर्व धर्म सम्मेलन को लेकर तलवारें खिंच गई है.

राष्ट्रीय सिख संगत और कट्टरपंथी सिख संगठनों के बीच पहले से ही 36 का आंकड़ा रहा है. एक तरफ आरएसएस राष्ट्रीय सिख संगत के जरिए पंजाब में आरएसएस की शाखाओं का प्रसार करना चाहता है. वहीं दूसरी ओर कट्टरपंथी सिख संगठन इस कोशिश को सिख विरोधी करार दे चुके हैं.

आरएसएस द्वारा सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की 350वीं वर्षगांठ के मौके पर 25 अक्टूबर को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सर्व धर्म सम्मेलन आयोजित करने के फैसले से कट्टरपंथी संगठन भड़क गए हैं.

प्रतिबंधित संगठन दल खालसा के अध्यक्ष हरपाल सिंह चीमा ने राष्ट्रीय सिख संगत के इस आयोजन को सिखों के मामले में दखलअंदाजी करार दिया है. उन्होंने कहा," सिख संगत किसी एक राष्ट्र की सीमा में नहीं बंधी है. इसलिए यह नाम ही गलत है क्योंकि सिख संगत सिर्फ सिखों के 10 गुरुओं की फिलासफी में यकीन रखती है."

आरएसएस पर तीखा हमला बोलते हुए खालसा नेता ने कहा है कि यह कदम सिख धर्म विरोधी है और सिख धर्म की नींव को कुरेदने की कोशि‍श है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा.

सिखों को आरएसएस की राष्ट्रीय सिख संगत के इरादों के बारे में आगाह करते हुए कट्टरपंथी सिख नेताओं ने कहा है कि सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त,  राष्ट्रीय सिख संगत को सिख विरोधी करार दे चुका है. ऐसे में जो भी सिख राष्ट्रीय सिख संगत के किसी कार्यक्रम में भाग लेगा, उसे पतित सिख माना जाएगा.

गौरतलब है कि पंजाब में अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक गठबंधन होने के बावजूद भी कट्टरपंथियों और आरएसएस के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. पंजाब में 2014 के बाद आरएसएस की शाखाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. 2014 के आसपास राज्य में सिर्फ 600 के करीब शाखाएं लगती थी और अब बढ़कर 900 हो गई हैं जिससे खालिस्तानी संगठन बौखला गए हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिख धर्म को हिंदू धर्म का ही एक परिवर्तित रुप मानता है. जबकि कट्टरपंथी सिख संगठन सिख धर्म को स्वतंत्र धर्म बताते हैं. इसी तनाव के चलते खालिस्तानी उग्रवादी संगठन बब्बर खालसा ने वर्ष 2009 में राष्ट्रीय सिख संगत के तत्कालीन अध्यक्ष रुलदा सिंह की पटियाला में गोली मारकर हत्या कर दी थी. अब तक पंजाब में मारे गए कई वरिष्ठ आरएसएस नेताओं मौत के लिए भी कट्टरपंथी खालिस्तानी उग्रवादियों को जिम्मेदार माना जाता है.

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