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जिसे लड़की समझा, वो लड़का था... चैट करते-करते इंस्पेक्टर ने 10 लाख गंवाए... डॉक्टर-बिजनेसमैन तक हनीट्रैप में फंसे

ये कहानी हैदराबाद की है. यहां सोशल मीडिया पर एक लड़की से कुछ लोगों की दोस्ती हुई. लड़की उनसे मीठी-मीठी बातें करने लगी. प्राइवेट बातें शुरू हो गईं और तस्वीरें-वीडियो भी शेयर करने को कहने लगी. लड़की जिन लोगों से बातें कर रही थी, उनमें डॉक्टर, बिजनेसमैन, लेक्चरर शामिल थे. एक पुलिस इंस्पेक्टर भी चैट कर रहा था, जो 10 लाख रुपये गंवा बैठा. बाद में पता चला कि वह लड़की नहीं, कोई लड़का था, जो फेक अकाउंट चला रहा था.

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23 साल के लड़के ने लड़की बनकर 82 लोगों को हनीट्रैप में फंसाया. (Photo: Representational)
23 साल के लड़के ने लड़की बनकर 82 लोगों को हनीट्रैप में फंसाया. (Photo: Representational)

सोशल मीडिया पर एक प्रोफाइल दिखी. नाम था चंदना. बातचीत शुरू हुई, फिर बातें प्राइवेट होने लगीं. सामने वाले को लगा कि वह किसी लड़की से बात कर रहा है. लेकिन वह एक 23 साल का लड़का था. उसने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए सैकड़ों नहीं, बल्कि 1,000 से ज्यादा लोगों से संपर्क किया. इनमें से 82 लोगों की प्राइवेट तस्वीरें और वीडियो लेकर उन्हें ब्लैकमेल किया.

मामला तेलंगाना के हैदराबाद का है. पुलिस का कहना है कि इस हनीट्रैप में डॉक्टर, बिजनेसमैन, लेक्चरर और गिग वर्कर्स जैसे अलग-अलग पेशों से जुड़े लोग फंसे. एक पुलिस इंस्पेक्टर भी फंस गया. इंस्पेक्टर की पत्नी ने शिकायत में कहा कि उसके पति से करीब 10 लाख रुपये वसूले गए. 

पुलिस ने इस मामले में 23 साल के के. पवन कुमार को पकड़ा है. वह हैदराबाद के कुकटपल्ली इलाके का रहने वाला है. पवन पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कर रहा था, लेकिन उसने पढ़ाई पूरी नहीं की थी. वह बेरोजगार था. उसने सोशल मीडिया पर महिला 'चंदना' के नाम से 13 फर्जी Instagram अकाउंट और 14 Facebook अकाउंट बनाए.

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इन प्रोफाइल्स के जरिए वह लोगों से चैट करता था. चैट करने वालों में डॉक्टर थे, बिजनेसमैन थे, लेक्चरर थे और दूसरे पेशों से जुड़े लोग भी. पुलिस का कहना है कि इस खेल में 82 पुरुष फंस गए. उनकी निजी तस्वीरें और वीडियो हासिल ले लिए गए और फिर उन्हें ब्लैकमेल किया गया. इस तरह 25 लाख रुपये से ज्यादा की उगाही किए जाने का अनुमान है.

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पुलिस का कहना है कि लड़की के नाम से बने फेक अकाउंट्स के जरिए पवन ने 1,000 से ज्यादा लोगों से बातचीत शुरू की थी. जैसे ही चैटिंग शुरू होती थी, धीरे-धीरे बातें प्राइवेट होने लगती थीं और कहानी अलग दिशा में चली जाती थी. पवन ने 'चंदना' बनकर करीब 82 पुरुषों को जाल में फंसा लिया. ये लोग समझते थे कि लड़की से बातें चल रही हैं और वह तैयार भी है, इसलिए अपनी प्राइवेट तस्वीरें और वीडियो भी भेजने लगे थे. पवन लोगों से हासिल की गई तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल फोन में रखता था.

बाद में उन्हें धमकी दी जाती थी कि उनकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दी जाएगी. फंसाने की धमकी भी दी जाती थी. यानी सामने वाले के पास दो डर थे. एक, तस्वीरें और वीडियो परिवार या परिचितों तक पहुंचने का. दूसरा, पुलिस केस में फंसने का. इसी डर के सहारे 'चंदना' पैसों की डिमांड शुरू करती थी. चारमीनार के डीसीपी किरण खरे के मुताबिक, अनुमान है कि बीते कुछ साल में इस रैकेट के जरिए 25 लाख रुपये से ज्यादा की उगाही हुई. जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनमें 24 दूसरे राज्यों के और नौ विदेश में रहने वाले लोग भी शामिल थे.

इंस्पेक्टर बालास्वामी और 10 लाख रुपये का मामला

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इस हनीट्रैप में एक पुलिस इंस्पेक्टर भी फंस गए. इंस्पेक्टर की पत्नी ने पुलिस से शिकायत की है. इसमें कहा गया है कि पवन ने खुद को 'चंदना' का रिश्तेदार बताया. फिर इंस्पेक्टर की शादी चंदना से कराने का भरोसा दिलाया. इसी सिलसिले में इंस्पेक्टर से करीब 10 लाख रुपये ले लिए गए. यहां कहानी का एक और पेच है. इंस्पेक्टर को अक्टूबर की शुरुआत में एक अलग मामले में गिरफ्तार किया गया था. उस मामले में उन पर धोखाधड़ी और यौन शोषण से जुड़े आरोप लगाए गए थे. अब उनकी पत्नी का दावा है कि उनके पति खुद भी पवन के जाल में फंस गए थे. पत्नी की शिकायत के आधार पर खैरताबाद पुलिस ने अलग मामला दर्ज किया है.

अब वापस आते हैं उस शिकायत पर, जिसके बाद पुलिस ने पवन के खिलाफ कार्रवाई की. पुलिस का कहना है कि 22 साल के एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने शिकायत की थी कि साल 2024 से उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था. स्टूडेंट का आरोप था कि उससे करीब 4 लाख रुपये वसूले गए. इसके बाद सैदाबाद पुलिस ने जांच शुरू की और पवन को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक, उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज है.

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अब पुलिस के सामने कई सवाल हैं. क्या इन सभी फर्जी अकाउंट्स को एक ही व्यक्ति चला रहा था? क्या 82 कथित पीड़ितों से ही पैसे मांगे गए या ऐसे और लोग भी हैं, जिनकी शिकायत अभी सामने नहीं आई? क्या किसी दूसरे व्यक्ति ने भी इस काम में मदद की? इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आएंगे.

इस कहानी का सबक क्या है? सोशल मीडिया पर किसी की तस्वीर देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि प्रोफाइल के पीछे असल में कौन है. नाम कुछ और हो सकता है, फोटो किसी और की हो सकती है और बातचीत करने वाला व्यक्ति अपनी असली पहचान छिपा सकता है. बात इतनी है कि भरोसा करने और अपनी प्राइवेट डिटेल शेयर करने के बीच एक फर्क होता है. खासकर तब, जब सामने वाला व्यक्ति बहुत जल्दी बातचीत को निजी विषयों की तरफ ले जाने लगे या तस्वीरें और वीडियो भेजने को कहने लगे.

और अगर कोई प्राइवेट तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगता है, तो घबराकर भुगतान करने के बजाय चैट, प्रोफाइल लिंक, फोन नंबर और लेन-देन के सबूत रखने चाहिए. इसके बाद पुलिस और साइबर क्राइम से शिकायत की जा सकती है. हैदराबाद पुलिस के मुताबिक, पवन को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. 82 पुरुषों को निशाना बनाने और 25 लाख रुपये से ज्यादा की उगाही के दावों की जांच जारी है.

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