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महाभियोग पर कांग्रेस ही नहीं विपक्ष में भी फूट, नहीं मिला बड़े दलों का साथ

पूर्व कानून मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी सलमान खुर्शीद ने तो सार्वजनिक तौर पर इस प्रस्ताव की खिलाफत कर दी है. उन्होंने कहा कि वकील का काला गाउन और सफेद बैंड पहनने वाले किसी भी आदमी को कोर्ट के फैसले पर सोच समझकर सवाल उठाने चाहिए.

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चिदंबरम और मोइली (फाइल फोटो)
चिदंबरम और मोइली (फाइल फोटो)

महाभियोग प्रस्ताव पर कांग्रेस पार्टी भले ही 6 विपक्षी दलों को अपने साथ लाने में सफल हो गई हो, लेकिन बाकी विपक्षी खेमे के भीतर इसे लेकर मतभेद साफ दिख रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर वीरप्पा मोइली और पी. चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेता भी इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं.

सूत्रों के मिली जानकारी के मुताबिक महाभियोग प्रस्ताव पर कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के भी साइन नहीं हैं. इसके अलावा कांग्रेस के जिन 51 सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर साइन किए हैं उनमें से 6 पहले ही रिटायर हो चुके हैं. सपा की ओर से भी सांसद जया बच्चन, रेवती रमण और बेनी प्रसाद वर्मा के साइन इस प्रस्ताव पर नहीं हैं.

कांग्रेस 6 दलों को तो साथ लाने में सफल रही, लेकिन आरजेडी, टीएमसी, बीजेडी, डीएमके, AIADMK, टीडीपी, टीआरएस ने फिलहाल इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है. राज्यसभा में संख्याबल के आधार पर टीएमसी, टीडीपी और बीजेडी काफी मजबूत दल हैं.

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कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को जो महाभियोग प्रस्ताव दिया गया है, उस पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, वीरप्पा मोइली जैसे वरिष्ठ हैं. इसके अलावा मनीष तिवारी और लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी महाभियोग को लेकर खुले तौर से सहमत नहीं हैं.

दूसरी ओर गुलाम नबी आजाद ने दावा किया कि उनके प्रस्ताव पर कुल 71 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. हालांकि 7 सांसद रिटायर हो गए हैं.

पूर्व कानून मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी सलमान खुर्शीद ने तो सार्वजनिक तौर पर इस प्रस्ताव की खिलाफत कर दी है. उन्होंने कहा कि वकील का काला गाउन और सफेद बैंड पहनने वाले किसी भी आदमी को कोर्ट के फैसले पर सोच समझकर सवाल उठाने चाहिए. यह संवेदनशील मामला है और शीर्ष कोर्ट के फैसले पर राजनीति करना उचित नहीं है.

इससे पहले मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाया है. कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों ने राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर उन्हें ये प्रस्ताव सौंपा. शुक्रवार को विपक्षी पार्टियों की कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद की अगुवाई में बैठक हुई. इसके बाद कई विपक्षी दलों के नेता उपराष्ट्रपति को प्रस्ताव सौंपने पहुंचे थे.

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने विपक्षी दलों की ओर से लाए गए प्रस्ताव को रिवेंज पिटीशन करार दिया है. उन्होंने कहा कि महाभियोग का राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमान नहीं किया जाना चाहिए. साथ ही जेटली ने कहा कि जज लोया केस में कांग्रेस का प्रोपेगेंडा फेल साबित हुआ इसी वजह से बदले की भावना में चीफ जस्टिस के खिलाफ वह महाभियोग लेकर आई है.

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अरुण जेटली ने कहा कि एक जज के खिलाफ इस प्रस्ताव को लाकर अन्य जजों को डराने की कोशिश की जा रही है और यह संदेश दिया जा रहा है कि अगर तुम हमसे सहमत नहीं हो तो बदला लेने के लिए 50 सांसद काफी हैं. 

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